15 लाख मनरेगा मजदूरों का 38.87 करोड़ मजदूरी बकाया, 3 माह से नहीं हुआ भुगतान

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सुपौल, संवाददाता
मजदूरों का पलायन रोकने और स्थानीय तौर पर रोजगार उपलब्ध कराने की कोशिशों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। मनरेगा से मजदूरों को रोजगार देने के दावे पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्योंकि मजदूरों को काम तो मिला, लेकिन तीन महीने से मजदूरी नहीं। इससे उनके समक्ष रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। बच्चों की परवरिश करना भी मुश्किल हो गया है। अब वे पुन: पलायन की सोचने लगे हैं। मजदूरी में विलंब के कारण सक्रिय मजदूरों की संख्या भी घटने लगी है।
जिले में विगत 27 दिसंबर 2024 से मनरेगा मजदूरों का मजदूरी भुगतान बकाया है। जिले के सभी 11 प्रखंड में करीब 15 लाख 4 हजार मानव दिवस का कुल करीब 36 करोड़ 87 लाख रुपये मजदूरी भुगतान बकाया है। यानि जिले के करीब 15 लाख मनरेगा मजदूरों को बीते तीन महीनों से भुगतान नहीं मिल रहा है। वे बिना मजदूरी के ही काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार से इस मद में फंड नहीं आने की वजह से श्रमिकों का 36 करोड़ 87 लाख रुपये का भुगतान अटका हुआ है। श्रमिक काम तो कर रहे हैं, लेकिन उन्हें मेहनताना नहीं मिल रहा है। राशि के अभाव में 27 दिसंबर 2024 के बाद से ही मनरेगा का भुगतान बंद है। होली, ईद जैसे त्यौहार बीत गए लेकिन, श्रमिकों को मजदूरी मिलने का इंतजार बना हुआ है।
हालांकि इस बाबत सुपौल के डीडीसी सुधीर ने बताया कि राशि का भुगतान शुरू नहीं हो पाया है। जिस श्रमिक ने जितना अधिक दिन काम किया है, उस हिसाब से उसकी मजदूरी बकाया है। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार से बजट न मिलने की वजह से जिले में मनरेगा मजदूरों का भुगतान अटका हुआ है। कुल मिलाकर देखा जाय तो 79 करोड़ 26 लाख रुपये बकाया है। विभाग से आवंटन की मांग की गई है। आवंटन प्राप्त होते ही भुगतान कर दिया जाएगा।

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