बेगूसराय के घाटों पर उमड़ी श्रधालुओं की भीड़, लगे हर-हर गंगे के जयकारे: कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने किया गंगा स्नान

By Team Live Bihar 48 Views
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बेगूसराय: कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान करने के लिए आज बेगूसराय के घाटों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही घाट पर हर-हर गंगे के जयकारे से गूंजते रहे। सबसे अधिक भीड़ झमटिया घाट, सिमरिया घाट और साहेबपुर कमाल के मल्हीपुर घाट पर उमड़ी। इन जगहों पर पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया। बछवाड़ा के झमटिया घाट पर स्थानीय लोगों के अलावा बड़ी संख्या में समस्तीपुर और दरभंगा जिला के श्रद्धालुओं की भी भीड़ जुटी। जबकि, साहेबपुर कमाल के मल्हीपुर राज घाट(मुंगेर घाट)पर स्थानीय के अलावा सहरसा, सुपौल, मधेपुरा और खगड़िया जिला के श्रद्धालु पहुंचे।

उत्तर वाहिनी गंगा तट सिमरिया में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर स्नान करने के लिए शुक्रवार को बिहार ही नहीं, विभिन्न राज्यों और विदेशी श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। गंगा स्नान करने के लिए रात से बंगाल, आसाम, झारखंड व उत्तर प्रदेश के साथ नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालू पहुंच गए थे। श्मशान घाट से रामघाट तक सभी घाटों पर स्नान का सिलसिला लगातार चलता रहा । गंगा स्नान के बाद पौराणिक समय से चले आ रहे दान और पूजा की परंपरा के तहत श्रद्धालुओं ने बड़े पैमाने पर सिमरिया धाम के सभी मंदिरों में पूजा-अर्चना‌ की।

सर्वमंगला सिद्धाश्रम में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रही। गंगा स्नान के लिए उमड़ने वाली भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक बंदोबस्त किए गए थे। एनएच के सभी चौक चौराहों पर जहां पुलिस बल की तैनाती थी वहीं, राजेन्द्र पुल स्टेशन से लेकर गंगा घाट तक कदम-कदम पर पुलिस बल तैनात किए गए थे। वाच टावर से घाटों की निगरानी की जा रही थी। सर्वमंगला सिद्धाश्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी चिदात्मन जी ने कहा कि गंगा सदैव से मोक्ष दायिनी रही है और मोक्षदायिनी रहेगी। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा स्नान और पूजन से सभी प्रकार के लोभ, मोह, ईर्ष्या और पाप का शमन होता है। लौकिक और पारलौकिक गति की प्राप्ति होती है।

ज्ञान मंच से श्रीमदभागवत कथा, कार्तिक व्रत और मिथिला महात्म ने श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। दूसरी ओर मगध और नेपाल से आने वाले हजारों भक्तों ने अपनी भगतई की सिद्धि की। भगतई को लेकर घाट का वातावरण जहां एक ओर तंत्र-मंत्र में लीन रहा तो ही भक्ति के अजूबे भी देखने को मिले। लोग अलग-अलग तरीके से अपने साधना को सिद्ध कर रहे थे।

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