सुरेंद्र किशोर (पद्मश्री सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार )
बांग्ला देश में हाल में हुए हिन्दू विरोधी जघन्य अत्याचारों ने भारत की बहुसंख्यक आबादी को सावधान कर दिया है। इसीलिए उसके बाद यहां हुए लगभग सभी चुनावों में आम तौर पर राजग-भाजपा की ही विजय हो रही है। जब से भारत की बहुसंख्यक आबादी ने बांग्ला देश में हिन्दुओं के संहार व बलात्कार के जघन्य-हृदय विदारक दृश्य अपने टी. वी. चैनलों पर देखे हैं,तब से वे भारत में लगभग सारे चुनावों में भाजपा-राजग को विजयी बना रहे हैं।उसके बाद आम तौर से स्थानीय निकाय,विधान परिषद,विधान सभा उप चुनाव और विधान सभाओं के आम चुनावों में भाजपा की जीत हुई है। याद रहे कि भारत में भी जेहादी तत्व यहां इस्लामिक शासन कायम करने के लिए हथियारबंद दस्ते तैयार कर रहे हैं। लोगों को अब यह जानकारी भी हो रही है। यह भी कि उनके समर्थक कौन कौन दल हैं।
प्रयागराज के महाकुम्भ में 67 करोड़ लोगों की जुटान के पीछे भी यही भावना काम कर रही थी कि–‘बंटोगे तो कटोगे !‘एक रहोगे तो सेफ रहोगे।’ दरअसल मध्य युग में हुए मुस्लिम आक्रांताओं के अत्याचारों -बलात्कारों और नब्बे के दशक में कश्मीर में हुए पंडित संहार -बलात्कार की आधी-अधूरी कहानियां ही लोगों ने पढ़ी थीं। पर, अब तो टीवी चैनलों पर भारत की हिन्दू आबादी बांग्ला देश के सजीव चित्र देख रही है। वे यह अनुमान भी लगा रहे हैं कि भारत में सकिय जेहादी तत्वों के सफल होने पर ,उनके व उनके वंशजों के साथ क्या-क्या हो सकता है। हमारे इतिहासकारों ने हमें यह भी जानने नहीं दिया कि जिन आक्रांताओं ने पृथ्वीराज चौहान को मारा ,उन्हीं लोगों ने जयचंद को भी मारा था और अजमेर में संयोगिता को दरिंदों के हवाले कर दिया था।
सन 1951 में पश्चिम बंगाल में 20 प्रतिशत मुस्लिम आबादी थी। आज वह आबादी बढ़कर 33 प्रतिशत हो चुकी है और बढ़ती ही जा रही है। इस देश में जहां भी आबादी के अनुपात में परिवर्तन हो रहा है,वहां से आंतरिक पलायन भी हो रहा है। मीडिया भयवश उसकी रिपेार्टिंग नहीं करता। संभल इसका नमूना है।
मुस्लिम घुसपैठियों की संख्या भारत में अब कुल आठ करोड़ हो चुकी है। देश के नौ प्रदेश अब हिन्दू बहुल नहीं रहे जबकि आजादी के समय वे हिन्दू बहुल थे। इस्लामिक जेहादी डा.जाकिर नाइक को आप यू ट्यूब पर यह कहते सुन सकते हैं कि भारत में हिन्दुओं की आबादी अब सिर्फ 60 प्रतिशत ही रह गई है।डा.नाइक की योजना है कि पहले केरल को ‘मुक्त’ किया जाए। उसने आसपास के राज्यों के मुसलमानों से कहा है कि केरल में जाकर बसो। यह संयोग नहीं है कि केरल के ईसाई, धर्म परिवर्तन विरोधी कानून के पक्षधर हैं तो कर्नाटक के ईसाई इस कानून के खिलाफ। याद रहे कि कांग्रेस के दिग्विजय सिंह डा.नाइक को सार्वजनिक रूप से शांति दूत बता चुके हैं ।साठगांठ की पराकाष्ठा को समझिए।
अरविंद केजरीवाल ने अपने शासनकाल में दिल्ली में बड़ी संख्या में बांग्ला देशी-रोहिंग्या घुसपैठियों को बसाया। पश्चिम बंगाल में यही काम अब ममता बनर्जी कर रही है। पहले वाम मोरचा सरकार कर रही थी। केरल में वाम सरकार ने पहले जेहादी संगठन पीएफआई की पूरी मदद की। उस पर प्रतिबंध तक से मना कर दिया जब कि वहां के डीजीपी ने प्रतिबंध की सिफारिश राज्य सरकार से की थी। पर जब केरल हाईकोर्ट के आदेश पर माकपा सरकार को पीएफआई के दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी तो पीएफआई ने माकपा को छोड़कर कांग्रेस का दामन पकड़ लिया। कांग्रेस को पीएफआई माकपा की अपेक्षा अधिक विश्वसनीय मददगार मानता है।
उसी तरह जेहादियों ने पश्चिम बंगाल में कुछ दशक पहले माकपा को छोड़कर ममता बनर्जी का समर्थन शुरू कर दिया। ऐसा तब हुआ जब मुख्य मंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने कहा कि घुसपैठियों के कारण हमें राज्य के सात जिलों में सामान्य शासन चलाना कठिन हो रहा है। दूसरी ओर ममता और कांग्रेस की ओर से जेहदियों को पूरी छूट है बिना शर्त। क्या आपने कभी सुना या पढ़ा कि ममता बनर्जी या कांग्रेस ने किसी जेहादी घटना,पीएफआई, एसडीपीआई या अन्य किसी जेहादी संगठन के खिलाफ कोई बयान दिया हो ?
इस पृष्ठभूमि में जब नरेंद्र मोदी सरकार ने 11 मार्च 2025 को संसद में ‘आप्रवास और विदेशी विधेयक -2025’ लाया तो मुस्लिम वोट बैंक के आधार पर टिके राजनीतिक दलों ने उसका विरोध कर दिया। इस विधेयक में यह प्रावधान है कि इस देश में अवैध प्रवेश पर सात साल तक की सजा दी जाएगी और जुर्माना लगाया जाएगा। आज 90 प्रतिशत मुसलमानों के वोट को पीएफआई -एसडीपीआई-जाकिर नाइक कंट्रोल कर रहे है । कुछ साल पहले मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान जाकर वहां के लोगों से अपील कि थी कि आप लोग मोदी को सत्ता से हटाइए। यानी अय्यर ने प्रकारांतर से यह भी साबित किया कि पाकिस्तान भी भारत के मुस्लिम वोट के एक हिस्से को कंट्रोल करता है।
तेलंगाना और कर्नाटका विधान सभाओं के पिछले चुनावों में मुस्लिम वोट बैंक के बल पर ही कांग्रेस सत्ता में आई। इसलिए वहां की कांग्रेस सरकारें वही काम कर रही हैं जो करने के लिए जेहादी उन्हें निदेश दे रहे हैं। पर, इधर मोदी सरकार भी इस देश को अतिवादी मुसलमानों और उनके समर्थक दलों के हाथों में जाने से रोकने के लिए अब कुछ अधिक ही जोर लगा रही है। बांग्लादेश के जेहादियों को धन्यवाद कि उसने वीभत्स दृश्य दिखा कर भारत के बहुसंख्यकों को सावधान कर दिया। उनसे अधिक बड़ा काम तो अनजाने में कांग्रेस के सलमान खुर्शीद और मणि शंकर अय्यर ने यह कह कर कर दिया कि ‘जो कुछ बांग्लादेश में हो रहा है, वह भारत में भी हो सकता है।’
अभी तो कुछ जगह होली बंद हो रही हैं, पूजापाठ बंद कराए जा रहे हैं। कुछ जगह क्रिकेट मैच वल्र्ड कप जीतने पर भी भारत में हर्ष जुलूस निकालने पर जेहादी हिंसा कर रहे हैं। जिस दिन पीएफआई-एसडीपीआई समर्थक सरकार केंद्र में बन जाएगी, उस दिन इस देश के गैर मुसलमानों का क्या हाल होगा, उसकी कल्पना कर लीजिए। अपने वंशजों के बारे में सोच कर देखिए। शुक्र है कि अब बांग्लादेश में जेहादियों के अत्याचार के बाद विधान सभा उप चुनाव, विधान परिषद चुनाव, यहां तक कि स्थानीय निकायों के चुनावों में भी जेहाद समर्थक दल नहीं जीत रहे हैं।
जेहाद समर्थक राजनीतिक दलों की पहचान क्या है ?
सन 2002 में गुजरात के गोधरा में जेहादियों ने 59 कार सेवकों को पेट्रोल छिड़क कर ट्रेन के डिब्बे में ही जिन्दा जला दिया। उस जघन्य घटना की किसी तथाकथित धर्म निरपेक्ष-समाजवादी -सामाजिक न्याय वाले दल ने निन्दा तक नहीं की। उल्टे मनमोहन सरकार के रेल मंत्रालय ने बनर्जी जांच कमेटी से यह कहवा दिया कि वे 59 लोग अपनी ही गलती से जल मरे थे। जो संगठन इस देश में हथियारों के बल पर इस्लामिक शासन कायम करने के लिए कातिल दस्ता तैयार कर रहा है ,उनके साथ साठगांठ करना कुछ प्रगतिशील बुद्धिजीवियों के लिए धर्म निरपेक्षता है। कितु उसका विरोध करना सांप्रदायिकता है, नफरत फैलाना है और देश को बांटना है। ऐसे अनेक उदाहरण दिए जा सकते हैं। यानी, इस तरह हमारी राजनीति व बौद्धिक वर्ग के एक पक्ष ने धर्म निरपेक्षता और सांप्रदायिकता की परिभाषा ही बदल दी है। जबकि चीन सरकार ऐसी परिभाषा नहीं मानती। वह अपने यहां उइगर जेहादियों से लड़ रही है।
अब इस देश के आम लोगों के लिए यह बहुत चिंता की बात नहीं। उल्टे संकेत तो यह है कि वोट के लिए जेहादी समर्थक राजनीतिक दल नहीं चेतेंगे तो अगले चुनावों में भी उनका सफाया होता जाएगा। हां,अपवादों को छोड़कर जेहाद समर्थक दलों के अधिकतर नेता इस देश को लूूट कर अरबों के मालिक बन चुके हैं।वैसे एक नेता ने तो लंदन में बड़ा होटल भी खरीद लिया है,यह बात योगी आदित्यनाथ ने हाल में उत्तर प्रदेश विधान सभा में कही।
विकट स्थिति आने पर वैसे अरबपति नेतागण तो सपरिवार विदेश चले जाएंगे। पर, उनके बेचारे बंधुआ वोटर क्या करेंगे ?