इस्लामिक जेहाद के खिलाफ अमेरिका और भारत

By Team Live Bihar 28 Views
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अशोक भाटिया,(वरिष्ठ समीक्षक व टिप्पणीकार)
अमेरिका के राष्ट्रीय खुफिया विभाग की प्रमुख तुलसी गबार्ड रायसीना डायलॉग में हिस्सा लेने के लिए इस समय भारत में हैं। डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिकी प्रशासन के किसी शीर्ष अधिकारी की यह पहली भारत यात्रा है। उनकी भूमिका सीआईए, एफबीआई और एनएसए सहित 18 अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की देखरेख करने की है। तुलसी गबार्ड अमेरिका की खुफिया ब्यूरो की प्रमुख हैं और वह हिंदू धर्म को मानती हैं। हालांकि वह भारतीय मूल की नहीं हैं, लेकिन हिंदू धर्म से जुड़ाव के कारण ही उनका नाम तुलसी रखा गया। उन्होंने 21 वर्ष की उम्र में राजनीति में कदम रखा और चार बार सांसद बनीं। डेमोक्रेट के तौर पर अपना राजनैतिक कैरियर प्रारंभ किया था, लेकिन 2024 में वह रिपब्लिक पार्टी से जुड़ गईं। एक समय पर उनका नाम राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर भी उभर रहा था। 2024 में अमेरिकी चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के बाद उन्हें अमेरिका के खुफिया ब्यूरो के निदेशक पद पर नियुक्ति के लिए सीनेट में राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रस्ताव लाया गया था, सीनेट से पास होने के बाद वह खुफिया ब्यूरो के प्रमुख के पद की शपथ हाथ में गीता लेकर लेकर की थी। राजनीति में आने से पहले तुलसी गबार्ड इराक युद्ध के समय बतौर लेफ्टिनेंट कर्नल सेवा दे चुकी हैं।
उन्होंने भारत के साथ कई विषयों पर मिल कर सुलझाने पर सहमती प्रकट की । उन्होंने कहा कि आतंकवाद ने अमेरिका और भारत के अलावा बांग्लादेश, सीरिया, इजरायल और कई मिडिल ईस्ट देशों को प्रभावित किया है। यह एक ऐसा खतरा है जिसे प्रधानमंत्री मोदी भी गंभीरता से लेते हैं और दोनों देश इसके निदान के लिए साथ मिलकर काम करेंगे। उन्होंने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई है और वहां अल्पसंख्यकों का लंबे समय से हो रहे उत्पीड़न और हिंसा पर नाराजगी जाहिर की। तुलसी गबार्ड ने कहा कि बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यको का उत्पीड़न, हत्या और देश में इस्लामिक आतंकियों का खतरा इस्लामी खलीफा के साथ शासन करने की विचारधारा में डूबा हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप इस्लामिक आतंकवाद को हराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हिंदुओं, बौद्धों, ईसाइयों और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों का लंबे समय से दुर्भाग्यपूर्ण उत्पीड़न, हत्या और दुर्व्यवहार अमेरिकी सरकार और राष्ट्रपति ट्रंप और उनके प्रशासन के लिए चिंता का विषय रहा है। इस्लामिक आतंकवादियों का खतरा और विभिन्न आतंकवादी समूहों के वैश्विक प्रयास एक ही विचारधारा और उद्देश्य के लिए हैं। ये एक इस्लामी खिलाफत के आधार पर शासन करना चाहते हैं।
तुलसी गबार्ड के बयान पर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सरकार ने बयान जारी कर कहा कि हम तुलसी गबार्ड की टिप्पणियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं। उनका बयान पूरी तरह भ्रामक तथा बांग्लादेश की छवि और उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला है। गबार्ड का बयान ठोस प्रमाणों पर आधारित ना होकर पूरी तरह से बेतुके आरोप हैं। इसने पूरे देश को कटघरे में खड़ा कर दिया है। दुनिया के कई देशों की तरह बांग्लादेश भी चरमपंथ का सामना कर रहा है। लेकिन हम अमेरिका सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं।
गौरतलब है कि रायसीना डायलॉग की शुरुआत 2016 में हुई थी। इसे शांगरी-ला डायलॉग की तर्ज पर शुरू किया गया था। शांगरी-ला रक्षा मंत्रियों का सम्मेलन है जबकि रायसीना में विभिन्न देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक होती है।इसका आयोजन विदेश मंत्रालय और थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन मिलकर करते हैं। विदेश मंत्रालय का ऑफिस रायसीना हिल्स पर होने की वजह से इसे रायसीना डायलॉग कहा जाता है। इसका आयोजन हर साल होता है। ‘रायसीना डायलॉग’ के जरिए दुनिया भर के नेताओं और नीति-निर्माताओं को एक ऐसा प्लेटफऑर्म मिलता है, जहां वो अतंरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा कर सकें।इस बार रायसीना डायलॉग का थीम- कालचक्र- पीपुल, पीस एंड प्लैनेट है। ‘रायसीना डायलॉग’ में शामिल होने वाले 20 विदेश मंत्रियों में से 11 यूरोप से हैं। इनमें यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रई सिबिहा का भी नाम है।
तुलसी गबार्ड ने सोमवार को रक्षामंत्री राजनाथ से भी मुलाकात की, इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की गई। इसके अलावा सोमवार को ही तुलसी गबार्ड और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के बीच भी द्विपक्षीय वार्ता हुई, इसी बीच डोभाल ने दुनियाभर के शीर्ष खुफिया अधिकारियों के सम्मेलन की अध्यक्षता भी की। सम्मेलन के दौरान आतंकवाद और और सुरक्षा चुनौतियों को लेकर देशों के मध्य सहयोग बढ़ाने को लेकर प्रमुख चर्चा हुई। तुलसी गबार्ड ने भारत के खिलाफ पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी हमलों पर गंभीर चिंता जाहिर की है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कट्टरपंथियों का आतंकवाद एक ऐसा खतरा है जिसने न सिर्फ भारत और अमेरिका को प्रभावित किया है, बल्कि कई मिडिल ईस्ट देशों को भी प्रभावित किया है। गबार्ड ने नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात के दौरान यह बात कही। मीडिया ने जब उनसे यह पूछा कि ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान से हो रहे भारत पर हमलों को कैसे देखता है, तो गबार्ड ने कट्टरपंथियों के आतंकवाद के खतरे की तरफ इशारा किया। गबार्ड ने बताया कि आतंकवाद के इस खतरे को समाप्त करने के लिए अमेरिका और भारत एक साथ मिलकर रणनीति बना रहे हैं। पीएम मोदी और ट्रंप के इस सहयोग से न सिर्फ दोनों देशों में, बल्कि वैश्विक स्तर पर आतंकवाद से निजात पाकर सुरक्षित माहौल तैयार करने में मदद मिलेगी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तुलसी गबार्ड के सामने खालिस्तानी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई है। यह संगठन अमेरिकी धरती से भारत के खिलाफ उकसावे वाली और हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। भारत ने इस संगठन को पहले ही गैरकानूनी घोषित कर रखा है। इसकी स्थापना 2007 में अमेरिका में गुरपतवंत सिंह पन्नू ने की थी। संगठन का मुख्य लक्ष्य पंजाब को भारत से अलग कर एक स्वतंत्र खालिस्तान राष्ट्र की स्थापना करना है। इसके लिए यह ‘रेफरेंडम 2020′ जैसे अभियानों के जरिए दुनिया भर के सिख समुदाय को जोड़ने की कोशिश करता रहा है।

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