रक्सौल, संवाददाता
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल शहर के लिए एक ऐतिहासिक दिन साबित हुआ, जब यहां वर्षों से चली आ रही ट्रैफिक जाम की विकट समस्या के समाधान हेतु रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के निर्माण की स्वीकृति मिली। एलसी गेट नंबर 33 और 34 पर आरओबी का निर्माण अब शीघ्र ही आरंभ होगा, जिससे स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी राहत मिलेगी।
रक्सौल शहर नरकटियागंज-सीतामढ़ी रेलखंड पर स्थित है, जहां ट्रेनों की लगातार आवाजाही और शंटिंग की वजह से रेलवे क्रॉसिंग गेट दिनभर में लगभग 14 घंटे तक बंद रहते हैं। इससे शहर में यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है और महाजाम की स्थिति बन जाती है। इस जाम में फंसे स्कूल बसों में बच्चे घंटों परेशान रहते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। सबसे दयनीय स्थिति एंबुलेंस में फंसे मरीजों की होती है, जिनकी जान समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण जोखिम में पड़ जाती है। अब आरओबी के निर्माण से इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान होगा।
आरओबी के निर्माण से न केवल जाम की समस्या समाप्त होगी, बल्कि रक्सौल शहर की अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा। स्थानीय व्यापारियों को नए ग्राहक मिलेंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी। साथ ही, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के वर्ष 2027 तक राज्य के किसी भी कोने से चार घंटे में राजधानी पटना पहुंचने के लक्ष्य को साकार करने में यह परियोजना अहम भूमिका निभाएगी।
रक्सौल अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रमुख केंद्र है। यहां से नेपाल जाने वाले पर्यटकों और व्यापारियों को अब आरओबी निर्माण के बाद सुगम आवाजाही का लाभ मिलेगा। इससे दोनों देशों के व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे।
आरओबी की स्वीकृति से रक्सौल के नागरिकों को वर्षों पुरानी जाम की समस्या से मुक्ति मिलेगी। यह परियोजना शहर के विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी, व्यापार को गति देगी और लोगों को राहत प्रदान करेगी। स्थानीय नागरिकों ने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए भारत सरकार, रेलवे मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन का आभार जताया है। इस स्वीकृति से रक्सौल के हर वर्ग के लोगों ने हर्ष व्यक्त किया है।
रक्सौल को मिली बड़ी सौगात : एलसी गेट 33 और 34 पर आरओबी निर्माण की स्वीकृति वर्षों पुरानी समस्या का होगा समाधान, लोगों ने किया स्वागत
