पटना, संवाददाता।
वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर बिहार में जदयू में दरार नजर आ रही है। पार्टी के विधान पार्षद गुलाम गौस ने वक्फ (संशोधन) विधेयक का विरोध किया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर बार-बार अनुचित नीतियों के जरिए अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का इल्जाम लगाया। उन्होंने कहा कि मैं वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध करने वाला पहला व्यक्ति था। जब से यह केंद्र सरकार आई है, कभी लव जिहाद, सीएए, मॉब लिंचिंग, ट्रिपल तलाक और अब यह। यह हमारा धार्मिक मामला है।
केंद्र पर हमला बोलते हुए गौस ने कहा कि आपने हमारे अधिकारों की रक्षा के लिए कुछ नहीं किया।मौलाना आज़ाद फाउंडेशन द्वारा दी जाने वाली छात्रवृत्ति भी बंद कर दी गई। इसके अतिरिक्त कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाया है। हम अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सभी मुद्दों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने अपनी बात रखेंगे। मैं इन सभी मुद्दों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष उठाऊंगा। बता दें कि गुलाम गौस एक दिन पहले ही ईद के अवसर पर राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव से मिलने पहुंचे थे। उनकी इस मुलाकात से कई तरह की चर्चा होने लगी थी।
वहीं केंद्रीय मंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने कहा कि प्रदेश में नीतीश कुमार के नेतृत्व में मुसलमानों का सशक्तिकरण हुआ है। जदयू या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कांग्रेस से किसी प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। कांग्रेस को पहले अपने कार्यकाल पर नजर डालनी चाहिए कि उन्होंने बिहार और देश में लंबे समय तक शासन किया, लेकिन अल्पसंख्यकों के लिए क्या किया? उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने पिछले 20 वर्षों में मुसलमानों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक प्रगति के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। नीतीश सरकार ने भागलपुर दंगे पीड़ितों को न्याय दिलाया, विधवाओं को पेंशन दी और प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद पहुंचाई। कांग्रेस को सिर्फ वोट बैंक की चिंता है, जबकि नीतीश कुमार विकास और न्याय की राजनीति कर रहे हैं।
सांसद संजय झा ने कहा कि वक्फ बिल पहली बार नहीं आ रहा है। 2013 में भी संशोधित विधेयक आया था। हमारी पार्टी ने कहा था कि इसे पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू नहीं किया जाना चाहिए और हमें उम्मीद है कि सरकार इस पर विचार करेगी।
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