प्रवीण बागी
भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों का इतिहास संघर्ष और अविश्वास से भरा रहा है। विभाजन के बाद से ही दोनों देशों के बीच चार बड़े युद्ध हो चुके हैं और सीमाओं पर तनाव आम बात रही है। ऐसे में युद्ध विराम समझौते को एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है, जो न केवल सीमावर्ती इलाकों में शांति स्थापित करता है, बल्कि दोनों देशों के बीच संवाद का मार्ग भी प्रशस्त करता है। पहलगाम हमले के बाद भारत ने पकिस्तान स्थित आतंकियों के 9 अड्डों पर सर्जिकल स्ट्राइक किया था जिसमे एक सौ से अधिक आतंकियों के मारे जाने की खबर है। इसके बाद पकिस्तान ने भी भारत पर ड्रोन अटैक करने शुरू कर दिए थे। फाइटर विमानों का भी इस्तेमाल किया था।
भारत ने उन तमाम हमलों को नाकाम कर दिया। इस बीच शनिवार को अचानक अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की तरफ से भारत -पाक के बीच युद्ध विराम की सूचना दी गई। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका की मध्यस्थता में दोनों देशों से उच्च स्तर पर बातचीत के बाद यह सहमति बनी है। अभी इसकी विस्तृत सूचना नहीं आई है कि किन शर्तों पर सहमति बनी है लेकिन यह टी तय है कि युद्ध किसी के लिए लाभकारी नहीं होता सिवाय हथियारों के सौदागरों के।
युद्ध विराम किसी भी क्षेत्र में स्थायित्व और शांति के लिए अनिवार्य कदम है। भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा पर होने वाली गोलाबारी से सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान जाती है और हजारों लोग विस्थापित होते हैं। ऐसे में युद्ध विराम समझौता न केवल जन-जीवन को सुरक्षित बनाता है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास के अवसर भी प्रदान करता है।
युद्ध विराम का राजनीतिक और कूटनीतिक महत्व भी कम नहीं है। इससे दोनों देशों के बीच आपसी संवाद का रास्ता खुलता है और विश्वास बहाली की प्रक्रिया शुरू होती है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी दोनों देशों की छवि में सुधार आता है, जिससे द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वार्ताओं में सकारात्मक माहौल बनता है। युद्ध विराम समझौते के बावजूद दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई को पाटना एक बड़ी चुनौती है। आतंकवाद, सीमा पर घुसपैठ, और राजनीतिक अस्थिरता जैसे मुद्दे शांति की राह में बाधा बने हुए हैं। इन चुनौतियों को पार करने के लिए केवल सैन्य और राजनीतिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी संवाद और सहयोग की आवश्यकता है।
भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम एक सकारात्मक पहल है, जो दोनों देशों के नागरिकों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करती है। अब आवश्यकता है कि इस पहल को स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ाया जाए। इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, कूटनीतिक समझ और आपसी विश्वास की नींव मजबूत करनी होगी।
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