नए साल के पहले दिन बिहार की राजनीति की एक मजबूत महिला चेहरे राबड़ी देवी अपना 67वां जन्मदिन मना रही हैं। यह जन्मदिन उनके लिए सादगी भरा है, लेकिन उनका राजनीतिक सफर बेहद असाधारण रहा है। पटना स्थित राबड़ी आवास पर आज समर्थक और राजद कार्यकर्ता उन्हें शुभकामनाएं देने पहुंच रहे हैं, हालांकि आवास के बाहर किसी तरह की भीड़ या उत्सव का माहौल नजर नहीं आ रहा।
- Happy Birthday Rabri Devi: आवास पर सन्नाटा, लेकिन कार्यकर्ताओं की शुभकामनाओं का सिलसिला जारी
- Happy Birthday Rabri Devi: बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का ऐतिहासिक सफर
- Happy Birthday Rabri Devi: समृद्ध परिवार से सियासत की ऊंचाइयों तक का सफर
- Happy Birthday Rabri Devi: लालू यादव से विवाह और राजनीति में अनजाने प्रवेश की कहानी
- Happy Birthday Rabri Devi: आज भी सामाजिक न्याय की राजनीति की मजबूत आवाज
इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि परिवार के प्रमुख सदस्य इस समय पटना में मौजूद नहीं हैं। लालू प्रसाद यादव इलाज के सिलसिले में दिल्ली में हैं, जबकि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अपने परिवार के साथ विदेश यात्रा पर हैं। ऐसे में राबड़ी आवास के बाहर एक तरह का सन्नाटा पसरा हुआ है, लेकिन कार्यकर्ताओं का उत्साह कम नहीं हुआ है।
Happy Birthday Rabri Devi: आवास पर सन्नाटा, लेकिन कार्यकर्ताओं की शुभकामनाओं का सिलसिला जारी
राबड़ी देवी के जन्मदिन के मौके पर उनके पटना स्थित सरकारी आवास पर कोई बड़ा कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया है। आमतौर पर उनके जन्मदिन पर राजद नेताओं और समर्थकों की भारी भीड़ देखने को मिलती है, लेकिन इस बार माहौल बिल्कुल अलग है।
लालू प्रसाद यादव हाल ही में आंख के मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराकर दिल्ली में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। वहीं तेजस्वी यादव पहले से तय विदेश दौरे पर हैं। परिवार के इन दोनों बड़े चेहरों की गैरमौजूदगी के कारण राबड़ी आवास पर राजनीतिक गतिविधियां सीमित नजर आ रही हैं।
इसके बावजूद राजद के कई वरिष्ठ और स्थानीय कार्यकर्ता राबड़ी देवी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने पहुंच रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि राबड़ी देवी सिर्फ एक पूर्व मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि पार्टी और सामाजिक न्याय की राजनीति का मजबूत स्तंभ रही हैं।
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Happy Birthday Rabri Devi: बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का ऐतिहासिक सफर

राबड़ी देवी का नाम बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक पहचान रखता है। वह राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं और उन्होंने यह पद ऐसे समय में संभाला, जब राजनीतिक परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण थीं।
जब चारा घोटाले के मामले में लालू प्रसाद यादव को जेल जाना पड़ा, तब सत्ता पर संकट खड़ा हो गया था। उस दौर में राजनीतिक समीकरणों को संभालने और सरकार को बचाने के लिए लालू यादव ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी।
राजनीति से लगभग अनजान मानी जाने वाली राबड़ी देवी का मुख्यमंत्री बनना पूरे देश में चर्चा का विषय बना। आलोचनाओं के बावजूद उन्होंने पूरे कार्यकाल के दौरान सत्ता की जिम्मेदारी संभाली और बिहार की राजनीति में एक अलग पहचान बनाई।
Happy Birthday Rabri Devi: समृद्ध परिवार से सियासत की ऊंचाइयों तक का सफर
राबड़ी देवी का जन्म गोपालगंज जिले के सेलार कला गांव में एक संपन्न और प्रभावशाली परिवार में हुआ था। उनके पिता शिव प्रसाद चौधरी इलाके के बड़े जमींदार और सरकारी ठेकेदार थे। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत थी और गांव में उनकी हैसियत काफी ऊंची मानी जाती थी।
बताया जाता है कि उनके घर में सैकड़ों गाय-भैंसें थीं और दो मंजिला भव्य हवेली उनकी समृद्धि की पहचान थी। सोने की परत चढ़े दरवाजे और विशाल परिसर उस दौर में दुर्लभ माने जाते थे।
कम उम्र में ही उनके विवाह की चर्चा शुरू हो गई थी। उनके पिता चाहते थे कि उनका दामाद पढ़ा-लिखा, तेज-तर्रार और राजनीतिक समझ रखने वाला हो। इसी तलाश में छात्र राजनीति से उभर रहे लालू यादव का नाम सामने आया।
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Happy Birthday Rabri Devi: लालू यादव से विवाह और राजनीति में अनजाने प्रवेश की कहानी
राबड़ी देवी की शादी उस समय लालू यादव से तय हुई, जब लालू छात्र राजनीति में सक्रिय थे। पटना में हुई मुलाकात के दौरान लालू यादव की बेबाक शैली और राजनीतिक सोच ने उनके पिता को काफी प्रभावित किया।
परिवार के कुछ सदस्यों ने इस रिश्ते का विरोध भी किया, लेकिन शिव प्रसाद चौधरी अपने फैसले पर अडिग रहे। शादी के बाद लालू यादव की राजनीति तेजी से आगे बढ़ती गई और राबड़ी देवी परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ उनके संघर्षों की साक्षी बनती रहीं।
समय के साथ हालात ऐसे बने कि वही राबड़ी देवी, जो कभी राजनीति से दूर थीं, बिहार की सत्ता की कमान संभालती नजर आईं। उनका यह सफर बिहार की राजनीति में आज भी मिसाल के तौर पर देखा जाता है।
Happy Birthday Rabri Devi: आज भी सामाजिक न्याय की राजनीति की मजबूत आवाज
मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी राबड़ी देवी राजनीति में सक्रिय रहीं। वह विधान परिषद की सदस्य बनीं और राजद की वरिष्ठ नेता के रूप में अपनी भूमिका निभाती रहीं।
आज 67वें जन्मदिन पर भले ही राबड़ी आवास पर सन्नाटा हो, लेकिन उनका राजनीतिक कद और योगदान आज भी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। राबड़ी देवी का जीवन संघर्ष, सत्ता और सामाजिक न्याय की राजनीति का ऐसा अध्याय है, जिसे बिहार की सियासत में हमेशा याद किया जाएगा।
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