नए साल 2026 की शुरुआत तंबाकू और सिगरेट का सेवन करने वालों के लिए बड़ा झटका लेकर आई है। केंद्र सरकार ने सिगरेट, पान मसाला, जर्दा और गुटखा जैसे तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी और नया सेस लगाने का फैसला किया है। इस फैसले से न सिर्फ तंबाकू उत्पादों की कीमतें बढ़ेंगी, बल्कि इनका असर शेयर बाजार से लेकर आम लोगों की जेब तक साफ दिखाई देने लगा है।
- Cigarette Tobacco Tax Hike: सिगरेट पर 8,500 रुपये तक बढ़ी एक्साइज ड्यूटी
- Cigarette Tobacco Tax Hike: दिसंबर में संसद से मिल चुकी है मंजूरी
- Cigarette Tobacco Tax Hike: 40% GST के ऊपर लगेगा नया सेस
- Cigarette Tobacco Tax Hike: तंबाकू कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट
- Cigarette Tobacco Tax Hike: सरकार का मकसद क्या है?
- Cigarette Tobacco Tax Hike: हर साल 10 लाख से ज्यादा मौतें
सरकार का यह नया कदम 1 फरवरी 2026 से लागू होगा, लेकिन इसके संकेत मिलते ही तंबाकू कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सरकार ने साफ कर दिया है कि तंबाकू उत्पादों पर टैक्स को और सख्त किया जाएगा ताकि इनके सेवन को हतोत्साहित किया जा सके।
Cigarette Tobacco Tax Hike: सिगरेट पर 8,500 रुपये तक बढ़ी एक्साइज ड्यूटी
केंद्र सरकार ने सिगरेट पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में बड़ा इजाफा किया है। नए नियमों के मुताबिक, सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 स्टिक्स पर 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक की अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी वसूली जाएगी।
यह ड्यूटी मौजूदा टैक्स स्ट्रक्चर के ऊपर होगी। यानी पहले से लग रहे 40 प्रतिशत जीएसटी के अलावा अब एक्साइज ड्यूटी भी चुकानी होगी। इससे सिगरेट के दामों में सीधा और बड़ा उछाल आने की पूरी संभावना है।
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Cigarette Tobacco Tax Hike: दिसंबर में संसद से मिल चुकी है मंजूरी

सरकार ने यह फैसला अचानक नहीं लिया है। दिसंबर 2025 में संसद ने दो अहम विधेयकों को मंजूरी दी थी, जिनके जरिए पान मसाला पर स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर और तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क लगाने की अनुमति दी गई थी।
इसी के तहत वित्त मंत्रालय ने 31 दिसंबर 2025 की देर रात कैपेसिटी डिटरमिनेशन एंड कलेक्शन ऑफ ड्यूटी नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। यह नियम पान मसाला, गुटखा और तंबाकू पैकेजिंग मशीनों पर आधारित टैक्स व्यवस्था को और सख्त बनाता है।
Cigarette Tobacco Tax Hike: 40% GST के ऊपर लगेगा नया सेस
अब तक भारत में तंबाकू उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता था। लेकिन 1 फरवरी 2026 से सरकार ने कंपनसेशन सेस को खत्म कर उसकी जगह हेल्थ और नेशनल सिक्योरिटी सेस लगाने का फैसला किया है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, 1 फरवरी से पान मसाला, सिगरेट, तंबाकू और इससे जुड़े अन्य उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी के अलावा अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी भी लगेगी। हालांकि बीड़ी पर जीएसटी 18 प्रतिशत ही रहेगा। पान मसाला पर नया स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा सेस अनिवार्य रूप से लागू होगा।
Cigarette Tobacco Tax Hike: तंबाकू कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट
सरकार के इस ऐलान का असर शेयर बाजार में तुरंत देखने को मिला। तंबाकू सेक्टर की दिग्गज कंपनी आईटीसी के शेयरों में करीब 8.62 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शेयर 402 रुपये से फिसलकर 368 रुपये के स्तर तक पहुंच गया।
वहीं मार्लबो सिगरेट बेचने वाली कंपनी गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के शेयरों में भी 12 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स पर भी इसका गहरा असर पड़ा और यह 3 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया। निवेशकों में इस फैसले को लेकर साफ चिंता नजर आई।
Cigarette Tobacco Tax Hike: सरकार का मकसद क्या है?
सरकार का स्पष्ट उद्देश्य तंबाकू उत्पादों के सेवन को हतोत्साहित करना है। तंबाकू न सिर्फ सेहत के लिए खतरनाक है, बल्कि इससे देश पर स्वास्थ्य खर्च का बोझ भी बढ़ता है। टैक्स बढ़ाकर सरकार तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता और खपत दोनों को नियंत्रित करना चाहती है।
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Cigarette Tobacco Tax Hike: हर साल 10 लाख से ज्यादा मौतें
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया भर में तंबाकू सेवन से हर साल 80 लाख से ज्यादा लोगों की मौत होती है। भारत में यह आंकड़ा और भी चिंताजनक है।
देश में हर साल 10 लाख से ज्यादा लोगों की मौत सिर्फ सिगरेट पीने के कारण होती है। अगर अन्य तंबाकू उत्पादों को भी शामिल किया जाए तो यह संख्या करीब 13.5 लाख मौतों तक पहुंच जाती है।
Cigarette Tobacco Tax Hike: एक सिगरेट से 20 मिनट कम होती है जिंदगी
लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज की एक स्टडी के मुताबिक, एक सिगरेट पीने से औसतन 20 मिनट की जिंदगी कम हो जाती है। अगर कोई व्यक्ति 10 साल तक रोजाना 10 सिगरेट पीता है, तो वह अपनी जिंदगी के करीब 500 दिन खुद कम कर लेता है। यह आंकड़ा तंबाकू के खतरों की गंभीरता को साफ दिखाता है।
Cigarette Tobacco Tax Hike: सेहत के साथ अब जेब पर भी मार
सरकार के नए फैसले के बाद यह साफ है कि सिगरेट, पान मसाला और गुटखा अब सिर्फ सेहत ही नहीं, बल्कि जेब पर भी भारी पड़ने वाले हैं। बढ़ती कीमतें कई लोगों को तंबाकू छोड़ने पर मजबूर कर सकती हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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