दुनिया के सबसे जानलेवा कैंसरों में शामिल पैंक्रियाज कैंसर को लेकर चीन से एक बड़ी और उम्मीद जगाने वाली वैज्ञानिक उपलब्धि सामने आई है। चीनी वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ऐसा मॉडल विकसित किया है, जो बिना किसी लक्षण वाले व्यक्ति में भी पैंक्रियाज कैंसर की पहचान कर सकता है। यह वही बीमारी है, जिसने दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक एपल के संस्थापक और सीईओ स्टीव जॉब्स की जान ले ली थी।
- Pancreatic Cancer AI Detection China: क्यों माना जाता है पैंक्रियाज कैंसर को सबसे खतरनाक
- Pancreatic Cancer AI Detection China: स्टीव जॉब्स की मौत ने क्यों बढ़ाई चिंता
- Pancreatic Cancer AI Detection China: डायबिटीज जांच से कैसे पकड़ में आया कैंसर
- Pancreatic Cancer AI Detection China: AI पर दुनियाभर में चल रहा शोध
- Pancreatic Cancer AI Detection China: क्यों मानी जा रही है यह खोज बड़ी क्रांति
पैंक्रियाज कैंसर को अक्सर “खामोश हत्यारा” कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण बेहद देर से सामने आते हैं। यही कारण है कि इस बीमारी से पीड़ित 90 प्रतिशत मरीज पांच साल से ज्यादा जीवित नहीं रह पाते।
Pancreatic Cancer AI Detection China: क्यों माना जाता है पैंक्रियाज कैंसर को सबसे खतरनाक
पैंक्रियाज कैंसर को चिकित्सा विज्ञान में सबसे घातक कैंसरों में से एक माना जाता है। आंकड़ों के अनुसार, इस बीमारी से पीड़ित केवल 10 प्रतिशत मरीज ही पांच साल तक जीवित रह पाते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि शुरुआती चरण में इस कैंसर की पहचान लगभग असंभव होती है।
अग्नाशय शरीर के भीतर गहराई में स्थित होता है। यहां बनने वाली गांठ शुरुआती दौर में न तो दर्द देती है और न ही कोई स्पष्ट संकेत। जब तक वजन तेजी से गिरना, पीलिया, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द या भूख न लगने जैसे लक्षण सामने आते हैं, तब तक कैंसर काफी फैल चुका होता है।
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Pancreatic Cancer AI Detection China: स्टीव जॉब्स की मौत ने क्यों बढ़ाई चिंता

एपल के सीईओ स्टीव जॉब्स की मौत ने इस बीमारी को पूरी दुनिया के सामने ला खड़ा किया था। अत्याधुनिक इलाज, बेहतरीन डॉक्टरों और संसाधनों के बावजूद वे इस कैंसर से जंग नहीं जीत सके। उनकी मौत इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण बन गई कि पैंक्रियाज कैंसर कितना खतरनाक और निर्दयी हो सकता है।
इसके बाद से ही वैज्ञानिक इस बीमारी की शुरुआती पहचान के तरीकों पर लगातार शोध कर रहे थे, जिसमें अब AI आधारित तकनीक को बड़ी सफलता मिली है।
Pancreatic Cancer AI Detection China: डायबिटीज जांच से कैसे पकड़ में आया कैंसर

चीन में 57 वर्षीय मजदूर किउ सिजुन सामान्य रूप से डायबिटीज की जांच कराने अस्पताल पहुंचे थे। जांच के बाद वे घर लौट गए, लेकिन तीन दिन बाद अस्पताल से अचानक फोन आया और उन्हें दोबारा बुलाया गया।
जांच के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम ने उनके पुराने मेडिकल डेटा में असामान्य पैटर्न पकड़ लिया था। आगे की विस्तृत जांच में पता चला कि उन्हें पैंक्रियाज कैंसर है, लेकिन राहत की बात यह थी कि बीमारी बेहद शुरुआती अवस्था में थी।
Pancreatic Cancer AI Detection China: समय पर ऑपरेशन बना जीवन रक्षक
कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में हो जाने के कारण डॉक्टरों ने तुरंत ऑपरेशन कर ट्यूमर को निकाल दिया। पैंक्रियाज कैंसर में ऐसा मौका बहुत कम मरीजों को मिल पाता है।
आज किउ सिजुन पूरी तरह स्वस्थ हैं और अपने खेतों में सब्जियां उगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें AI की ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन समय पर मिली चेतावनी ने उनकी जान बचा ली।
Pancreatic Cancer AI Detection China: AI पर दुनियाभर में चल रहा शोध

यह पहला मौका नहीं है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पैंक्रियाज कैंसर की पहचान हुई हो। अमेरिका, ब्रिटेन और चीन में पिछले कुछ वर्षों से ऐसे AI टूल्स पर काम हो रहा है, जो सीटी स्कैन, एमआरआई, ब्लड टेस्ट पैटर्न और मेडिकल रिकॉर्ड के जरिए इस कैंसर का पता लगाते हैं।
हालांकि, रूटीन डायबिटीज जांच के डेटा से बिना किसी लक्षण के कैंसर पकड़ लेना चिकित्सा जगत में क्रांतिकारी माना जा रहा है।
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Pancreatic Cancer AI Detection China: क्यों मानी जा रही है यह खोज बड़ी क्रांति
पैंक्रियाज कैंसर की जांच के पारंपरिक तरीकों में अत्यधिक रेडिएशन होता है, जिस वजह से विशेषज्ञ बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग की सलाह नहीं देते। AI आधारित यह नई तकनीक बिना अतिरिक्त खतरे के शुरुआती पहचान संभव बना सकती है।
इससे न केवल मरीजों की जान बचाई जा सकेगी, बल्कि कैंसर के इलाज का पूरा तरीका बदल सकता है।
Pancreatic Cancer AI Detection China: स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए नई उम्मीद
यह मामला साबित करता है कि तकनीक और चिकित्सा के मेल से असंभव मानी जाने वाली समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। आने वाले समय में यह तकनीक लाखों लोगों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकती है।
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