Pax Silica India Entry से पहले शेयर बाजार में क्यों मचा हड़कंप
12 जनवरी की सुबह जैसे ही शेयर बाजार खुला, निवेशकों को बड़ा झटका लगा। सेंसेक्स देखते ही देखते तेज गिरावट के साथ नीचे चला गया। बाजार में घबराहट फैल गई और निवेशकों के बीच यह सवाल गूंजने लगा कि आखिर आगे क्या होगा। लेकिन ठीक दोपहर 1 बजे के आसपास माहौल अचानक बदल गया। सेंसेक्स ने यू-टर्न लिया और गिरावट पलक झपकते ही तेजी में बदल गई।
- Pax Silica India Entry से पहले शेयर बाजार में क्यों मचा हड़कंप
- Pax Silica India Entry को लेकर अमेरिकी राजदूत का बयान बना ट्रिगर
- Pax Silica India Entry: आखिर क्या है पैक्स सिलिका?
- Pax Silica India Entry और सेमीकंडक्टर-AI की लड़ाई
- Pax Silica India Entry क्यों है चीन के लिए टेंशन?
- Pax Silica India Entry और भारत-अमेरिका रिश्तों का नया अध्याय
इस अचानक बदलाव के पीछे वजह घरेलू नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत-अमेरिका संबंधों से जुड़ी एक बड़ी घोषणा थी, जिसने बाजार की दिशा ही बदल दी।
Pax Silica India Entry को लेकर अमेरिकी राजदूत का बयान बना ट्रिगर
12 जनवरी को नई दिल्ली में पदभार संभालने के बाद अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने एक ऐसा बयान दिया, जिसने न सिर्फ सियासी गलियारों में बल्कि शेयर बाजार में भी हलचल मचा दी। सर्जियो गोर ने साफ कहा कि अमेरिका के लिए भारत से ज्यादा महत्वपूर्ण देश कोई और नहीं है।
इसी बयान के बाद बाजार में तेजी देखने को मिली। निवेशकों ने इसे भारत-अमेरिका रिश्तों में बड़े रणनीतिक बदलाव के संकेत के रूप में देखा। चर्चाएं शुरू हो गईं कि 21वीं सदी की टेक्नोलॉजी पॉलिटिक्स में भारत की भूमिका अब पूरी तरह बदलने वाली है।
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Pax Silica India Entry से ट्रंप की रणनीति में दिखा बदलाव
डोनाल्ड ट्रंप, जिनकी टैरिफ नीति के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में पहले खटास आई थी, अब रिश्तों को सुधारने की दिशा में कदम बढ़ाते दिख रहे हैं। ट्रंप प्रशासन के दूत के जरिए यह संकेत दिया गया कि अमेरिका भारत को अपनी सबसे महत्वाकांक्षी टेक्नोलॉजी रणनीति पैक्स सिलिका में शामिल करना चाहता है।
यही ऐलान बाजार के लिए सबसे बड़ा पॉजिटिव संकेत साबित हुआ।
Pax Silica India Entry: आखिर क्या है पैक्स सिलिका?
पैक्स सिलिका एक नई अमेरिका-नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय टेक्नोलॉजी कोएलिशन है, जिसे 12 दिसंबर 2025 को लॉन्च किया गया। इसमें पहले से ही जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड्स, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हैं।
इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य एक भरोसेमंद, सुरक्षित और इनोवेशन-ड्रिवन ग्लोबल सप्लाई चेन तैयार करना है, खासकर उन तकनीकों के लिए जो भविष्य की दुनिया को तय करेंगी।
Pax Silica India Entry और सेमीकंडक्टर-AI की लड़ाई
आज की आधुनिक दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5G, डेटा सेंटर, रोबॉटिक्स और सेमीकंडक्टर पर टिकी है। इन सभी तकनीकों में सिलिकॉन और क्रिटिकल मिनरल्स की अहम भूमिका है। फिलहाल इन सप्लाई चेन पर चीन का बड़ा प्रभाव है।
पैक्स सिलिका का मकसद इसी निर्भरता को तोड़ना है। अमेरिका चाहता है कि भरोसेमंद देशों के साथ मिलकर सेमीकंडक्टर, AI इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग की सप्लाई चेन को सुरक्षित किया जाए।
Pax Silica India Entry से भारत को क्या मिलेगा?
अगर भारत इस रणनीतिक समूह में शामिल होता है, तो उसे कई स्तरों पर फायदा मिलेगा।
भारत का सेमीकंडक्टर मिशन वैश्विक स्तर पर मजबूती पाएगा।
एडवांस टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ेगा।
हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
भारत वैश्विक टेक सप्लाई चेन में एक अहम खिलाड़ी बनकर उभरेगा।
सर्जियो गोर ने साफ संकेत दिए हैं कि अगले महीने भारत को इस पहल में औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा।
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Pax Silica India Entry क्यों है चीन के लिए टेंशन?
पैक्स सिलिका का सबसे बड़ा भू-राजनीतिक संदेश चीन के लिए है। अभी सेमीकंडक्टर, AI चिप्स और क्रिटिकल मिनरल्स पर चीन की मजबूत पकड़ है। इस नए गठबंधन के जरिए अमेरिका और उसके सहयोगी देश उस दबदबे को संतुलित करना चाहते हैं।
यह कोई सैन्य गठबंधन नहीं है, बल्कि टेक्नोलॉजी और आर्थिक सुरक्षा पर आधारित साझेदारी है, जो भविष्य की शक्ति संरचना को नया आकार देगी।
Pax Silica India Entry और भारत-अमेरिका रिश्तों का नया अध्याय
पैक्स सिलिका केवल टेक्नोलॉजी अलायंस नहीं, बल्कि एक नई आर्थिक सुरक्षा रणनीति है, जहां टेक्नोलॉजी, राष्ट्रीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था आपस में जुड़ जाती हैं। अमेरिका भारत को इस इकोसिस्टम का केंद्रीय स्तंभ बनाना चाहता है।
कुल मिलाकर, यह साझेदारी भारत को सिर्फ दर्शक नहीं बल्कि भविष्य की टेक्नोलॉजी पॉलिटिक्स का मुख्य खिलाड़ी बना रही है। यही वजह है कि 12 जनवरी को शेयर बाजार ने अचानक यू-टर्न लिया और निवेशकों का भरोसा लौटा।
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