European leaders guest on Republic Day: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो लुईस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन भारत आ रहे हैं और वह 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि होंगे। कोस्टा और लेयेन 16वें भारत यूरोपीय यूनियन शिखर सम्मेलन की सह अध्यक्षता भी करेंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में जानकारी दी गयी है कि यात्रा के दौरान कोस्टा और लेयेन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे तथा प्रधानमंत्री मोदी के साथ सीमित और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे।
- European leaders guest on Republic Day: यूरोपीय नेताओं की मौजूदगी वैश्विक राजनीति का संकेत
- European leaders guest on Republic Day: अहम है भारत व यूरोपीय यूनियन मुक्त व्यापार समझौते
- European leaders guest on Republic Day: जनवरी के अंत तक मुक्त व्यापार समझौता संभव
- European leaders guest on Republic Day: भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखला के केंद्र में होगा स्थापित
- European leaders guest on Republic Day: भारत की भूमिका संतुलनकारी
- European leaders guest on Republic Day: प्रधानमंत्री मोदी की अचूक विदेश नीति का नतीजा
- European leaders guest on Republic Day: इस साझेदारी असर एशिया प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र में दिखेगा
European leaders guest on Republic Day: यूरोपीय नेताओं की मौजूदगी वैश्विक राजनीति का संकेत
देखा जाये तो भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय यूनियन की शीर्ष उपस्थिति बदलती वैश्विक राजनीति का साफ संकेत है। यह दृश्य यह भी बताता है कि भारत और यूरोप का रिश्ता अब रणनीतिक धरातल पर पहुंच चुका है।
हम आपको बता दें कि भारत और यूरोपीय यूनियन 2004 से रणनीतिक साझेदार हैं लेकिन पिछले दो वर्षों में इस रिश्ते ने असाधारण गति पकड़ी है। फरवरी 2025 में यूरोपीय आयोग के पूरे प्रतिनिधिमंडल का भारत आना इस बात का प्रमाण था कि ब्रसेल्स अब नई दिल्ली को केवल एक उभरता बाजार नहीं बल्कि एक अनिवार्य शक्ति मान रहा है। अब गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनकर आना उसी निरंतरता की अगली कड़ी है।
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European leaders guest on Republic Day: अहम है भारत व यूरोपीय यूनियन मुक्त व्यापार समझौते
बताते चलें कि प्रधानमंत्री मोदी की एंतोनियो लुईस सैंटोस दा कोस्टा और उर्सुला वॉन डर लेयेन के साथ पिछले साल हुई संयुक्त दूरभाष वार्ता ने भी स्पष्ट कर दिया था कि बातचीत केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं है। व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश, नवाचार, रक्षा-सुरक्षा और आपूर्ति शृंखला लचीलापन जैसे मुद्दों पर ठोस प्रगति हुई है। सबसे अहम यह कि भारत व यूरोपीय यूनियन मुक्त व्यापार समझौते को शीघ्र पूरा करने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई है। वाणिज्य सचिव के अनुसार चौबीस में से बीस अध्याय पूरे हो चुके हैं और शेष पर रोजाना स्तर पर संवाद चल रहा है।

European leaders guest on Republic Day: जनवरी के अंत तक मुक्त व्यापार समझौता संभव
देखा जाये तो यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था उथल पुथल के दौर से गुजर रही है। अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियां और चीन की आपूर्ति शृंखला पर पकड़ ने यूरोप को वैकल्पिक साझेदार खोजने पर मजबूर किया है। इसी क्रम में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भारत यात्रा के दौरान संकेत दिया था कि जनवरी के अंत तक मुक्त व्यापार समझौता संभव है। उनका यह कहना कि दुनिया दुर्भाग्यपूर्ण संरक्षणवाद के पुनरुत्थान से गुजर रही है दरअसल भारत यूरोप निकटता की वैचारिक जमीन को रेखांकित करता है।
European leaders guest on Republic Day: भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखला के केंद्र में होगा स्थापित
हम आपको बता दें कि यूरोपीय यूनियन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 120 अरब यूरो तक पहुंच चुका है। बताया जा रहा है कि प्रस्तावित समझौता केवल शुल्क कटौती तक सीमित नहीं होगा बल्कि खनिज, स्वास्थ्य, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में नई साझेदारी की राह भी खोलेगा। साथ ही भारत मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारा जैसी परियोजनाएं भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखला के केंद्र में स्थापित करेंगी।
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European leaders guest on Republic Day: भारत की भूमिका संतुलनकारी
हम आपको बता दें कि यूक्रेन संघर्ष पर भी भारत और यूरोप के बीच संवाद खुलकर हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने शांति और स्थिरता पर भारत की निरंतर नीति दोहराई है। यूरोपीय पक्ष यह भी मानता है कि भारत की भूमिका संतुलनकारी है और वह संवाद का सेतु बन सकता है।
European leaders guest on Republic Day: प्रधानमंत्री मोदी की अचूक विदेश नीति का नतीजा
देखा जाये तो भारत और यूरोपीय यूनियन का यह उभार कोई संयोग नहीं बल्कि सुविचारित रणनीति का परिणाम है। यह साफ दिखता है कि मोदी की विदेश नीति न तो भावुक आदर्शवाद में फंसी है और न ही पुराने गुटों की कैद में है। यह नीति हित आधारित यथार्थवाद और मूल्यों की संतुलित भाषा बोलती है। यही कारण है कि भारत एक ओर रूस से संवाद बनाए रखता है तो दूसरी ओर यूरोप और अमेरिका के साथ भी भरोसेमंद साझेदार बना रहता है।
European leaders guest on Republic Day: इस साझेदारी असर एशिया प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र में दिखेगा
वहीं यूरोप के लिए भारत अब चीन का विकल्प ही नहीं बल्कि उससे बेहतर साझेदार बनकर उभर रहा है। लोकतांत्रिक व्यवस्था, युवा आबादी, तकनीकी क्षमता और विशाल बाजार भारत को स्वाभाविक आकर्षण देते हैं। साथ ही भारत के लिए यूरोप उच्च तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा सहयोग और वैश्विक नियम आधारित व्यवस्था में समर्थन का स्रोत है। यह साझेदारी वैश्विक शक्ति संतुलन को बहुध्रुवीय दिशा में धकेलती है। रणनीतिक स्तर पर इसका सबसे बड़ा प्रभाव एशिया प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र में दिखेगा। भारत और यूरोप का सहयोग समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आपूर्ति शृंखला सुरक्षा को मजबूत करेगा। इससे चीन की एकाधिकारवादी प्रवृत्तियों पर स्वाभाविक अंकुश लगेगा वह भी बिना किसी आक्रामक सैन्य टकराव के।
निष्कर्षः
देखा जाये तो मोदी की कूटनीति की विशेषता यह है कि वह भारत को सहभागी के रूप में प्रस्तुत करती है। मुक्त व्यापार समझौते में भी भारत ने अपने श्रम आधारित उद्योगों और उभरते क्षेत्रों के हितों को मजबूती से रखा है। बीस अध्यायों का पूरा होना बताता है कि भारत अब नियम स्वीकार करने वाला नहीं बल्कि नियम गढ़ने वाला देश बन रहा है।
आज जब दुनिया अस्थिरता और अविश्वास से जूझ रही है तब भारत और यूरोपीय यूनियन का यह मेल एक वैकल्पिक मार्ग दिखाता है। यह मार्ग टकराव का नहीं सहयोग का है, प्रभुत्व का नहीं साझेदारी का है। गणतंत्र दिवस समारोह के मंच से दुनिया को यह संदेश जाएगा कि भारत अब वैश्विक एजेंडा तय करने वाली शक्ति है। यही मोदी की विदेश नीति की असली सफलता है और यही आने वाले दशक की भूराजनीति का संकेत भी है।
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