Gupt Navratri: सनातन परंपरा में नवरात्रि केवल पर्व नहीं, बल्कि आत्मा को भीतर से जगाने का समय मानी जाती है। इन्हीं नवरात्रियों में एक है गुप्त नवरात्रि, जो दिखावे से दूर, मन की गहराइयों में साधना का अवसर देती है। पंचांग के अनुसार, साल 2026 में गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 19 जनवरी से हो चुकी है और इसका समापन 27 जनवरी को होगा। सोमवार को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग में गुप्त नवरात्र शुरू हो रहा है। यह नवरात्र आज कलश स्थापना से शुरू होकर 28 जनवरी बुधवार को विजयादशमी से साथ संपन्न होगा।
- Gupt Navratri: साधना सिद्दि देने वाला समय
- Gupt Navratri: सिद्धिदात्री दस देवियों की साधाना का पर्व
- Gupt Navratri: रोग-शोक से मुक्ति के लिए देवी दुर्गा का करें पाठ
- Gupt Navratri: वाणी पर नियंत्रण और क्रोध का त्याग
- Gupt Navratri: शुद्ध एवं सात्विक भोजन करें
- Gupt Navratri: ब्रह्मचर्य का पालन और आलस्य का त्याग
Gupt Navratri: साधना सिद्दि देने वाला समय
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि ‘गुप्त नवरात्र में तंत्र साधना की प्रधानता होती है। इस नवरात्र में श्रद्धालु अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्तियों में वृद्धि करने के लिए उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन योग साधना आदि करते हैं। तंत्र और शक्ति मतावलंबी साधना के दृष्टि से गुप्त नवरात्रों के कालखंड को बहुत सिद्धिदायी मानते हैं। मां वैष्णो देवी, पराम्बा देवी, हिंगलाज देवी और कामाख्या देवी का अहम पर्व माना जाता है।’ इन नौ दिनों में मां दुर्गा की 10 महाविद्याओं की उपासना की जाती है, जिनका संबंध तंत्र, मंत्र, योग और आत्मिक उन्नति से जुड़ा हुआ है। घरों और मंदिरों में कलश की स्थापना के साथ शक्ति की उपासना होगी। श्रद्धालु निराहार या फलाहार रह कर माता की आराधना करेंगे।
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Gupt Navratri: सिद्धिदात्री दस देवियों की साधाना का पर्व
माघ मास के इस गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की साधना की जाती है।

विशेष तौर पर तंत्रोक्त क्रियाओं, शक्ति साधनाओं, और महाकाल से जुड़े साधकों के लिए यह नवरात्र विशेष महत्व रखता है। इस दौरान देवी के साधक कड़े विधि-विधान के साथ व्रत और साधना करते है। देवी के सोलह शक्तियों की प्राप्ति के लिए यह पूजन करते है।
Gupt Navratri: रोग-शोक से मुक्ति के लिए देवी दुर्गा का करें पाठ
पंडित झा के कहा कि गुप्त नवरात्र में बनने वाले सिद्धिदायी योग में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अत्यंत कल्याणकारी होगा। नवरात्र में दुर्गा सप्तशती, देवी के विशिष्ट मंत्र का जाप, दुर्गा कवच, दुर्गा शतनाम का पाठ प्रतिदिन करने से रोग-शोक आदि का नाश होता है। व्यवसाय में वृद्धि, रोजगार, रोग निवारण आदि मनोकामनाओं के लिए इस नवरात्र में देवी की आराधना की जाती है।
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Gupt Navratri: वाणी पर नियंत्रण और क्रोध का त्याग
मां दुर्गा शक्ति का स्वरूप हैं, लेकिन वह शांति और करुणा भी हैं। पहले दिन संकल्प लेते समय अपने मन को शांत रखे। किसी को अपशब्द न बोलें, न ही घर में क्लेश करें
Gupt Navratri: शुद्ध एवं सात्विक भोजन करें
धार्मिक एवं आध्यातमिक कर्मकांडों के जानकार कहते हैं कि इन नौ दिनों में सात्विकता का पालन करना अनिवार्य है। अगर आप व्रत नहीं भी रख रहे हैं, तब भी घर में प्याज, लहसुन, मांस या मदिरा का प्रवेश नहीं हो तो ठीक रहेगा। नियम यह है कि पहले दिन ही अपने रसोई घर को शुद्ध कर लें।कहा गया है कि जैसा अन्न वैसा मन। अशुद्ध भोजन आपके विचारों को भी दूषित कर देता है जिससे ध्यान नहीं लग पाता।
Gupt Navratri: ब्रह्मचर्य का पालन और आलस्य का त्याग
गुप्त नवरात्रि आत्मिक उन्नति का समय है। इन नौ दिनों में शारीरिक और मानसिक ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इसके अलावा, दिन के समय सोने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान बाल कटवाना, नाखून काटना या दाढ़ी बनवाना अशुभ माना जाता है।
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