2029 का चुनाव और नितिन नबीन की ताजपोशी

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अशोक भाटिया
(वरिष्ठ स्तंभकार)
भारतीय जनता पार्टी के सांगठनिक ढांचे में आज एक बड़ा ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन 19 जनवरी को, नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया । जब आप यह लेख पढ़ रहे होंगे तब तक नये अध्यक्ष के रूप में नितिन नबीन के नाम की घोषणा हो चुकी होगी क्योकि नितिन नबीन के निर्विरोध चुने जाने की पूरी संभावना है और ऐसा हुआ तो वे भाजपा के इतिहास में सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाएंगे।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव पार्टी की राष्ट्रीय परिषद और विभिन्न राज्य परिषदों के प्रतिनिधियों वाले एक इलेक्टोरल कॉलेज द्वारा किया जाता है। पूरी प्रक्रिया पार्टी के राष्ट्रीय रिटर्निंग ऑफिसर की देखरेख में होती है।बीजेपी संविधान के अनुसार, इस पद के लिए उम्मीदवार का नाम किसी राज्य के इलेक्टोरल कॉलेज के कम से कम 20 सदस्यों द्वारा संयुक्त रूप से प्रस्तावित किया जाना चाहिए। नामांकित व्यक्ति ने पार्टी के सक्रिय सदस्य के रूप में चार कार्यकाल पूरे किए हों और उसकी न्यूनतम 15 साल की सदस्यता होनी चाहिए। संविधान में यह भी कहा गया है कि ऐसा संयुक्त प्रस्ताव कम से कम पांच राज्यों से आना चाहिए जहां राष्ट्रीय परिषद के चुनाव पहले ही पूरे हो चुके हैं।शुक्रवार को चुनाव कार्यक्रम जारी करते हुए, पार्टी के राष्ट्रीय रिटर्निंग ऑफिसर के लक्ष्मण ने कहा था, यदि आवश्यक हुआ तो 20 जनवरी को मतदान होगा और उसी दिन नए बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

कौन हैं नितिन नवीन?
नितिन नवीन बिहार के एक सीनियर बीजेपी नेता हैं, जिनकी राजनीतिक जड़ें बहुत मज़बूत हैं। पटना में जन्मे नितिन स्वर्गीय नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के बेटे हैं – जो एक सम्मानित बीजेपी नेता और पूर्व विधायक थे। अपने पिता की अचानक मौत के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। वे पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का लगातार 5 बार प्रतिनिधित्व किया है। नवीन को राज्य में बीजेपी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में से एक माना जाता है। उन्होंने 2006 में उपचुनाव जीतने के बाद 2010, 2015, 2020 और 2025 में लगातार चार विधानसभा चुनाव जीते हैं। हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनावों में, नवीन ने बांकीपुर से शानदार जीत हासिल की, और अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी को 51,000 से ज़्यादा वोटों के अंतर से हराया। उनकी लगातार चुनावी सफलता ने पार्टी के अंदर उनकी स्थिति को और मज़बूत किया है। फिलहाल, नवीन बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में सड़क निर्माण और शहरी विकास विभाग संभाल रहे हैं।
यहां यह बताना ज़रूरी है कि नवीन को जदयू के साथ बीजेपी के गठबंधन को मैनेज करने और एनडीए की चुनावी जीत में अहम भूमिका निभाने का श्रेय दिया जाता है। नवीन छत्तीसगढ़ में बीजेपी के प्रभारी भी रह चुके हैं, जो पार्टी के राष्ट्रीय ढांचे में उनके बढ़ते प्रभाव को दिखाता है। बीजेपी आलाकमान ने नितिन नबीन को अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का बड़ा फैसला केवल संगठनात्मक स्तर पर नहीं लिया, बल्कि देश की राजनीति को भी एक स्पष्ट संदेश दिया है। संदेश यह कि बीजेपी में नेतृत्व का रास्ता उम्र या वंश नहीं, बल्कि मेहनत, ऊर्जा और संगठनात्मक क्षमता से तय होता है। महज 45 वर्ष की उम्र में नितिन नबीन को यह जिम्मेदारी देकर पार्टी ने यह साबित कर दिया है कि बीजेपी भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए युवा नेतृत्व तैयार करती है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की कमान 83 वर्ष के मल्लिकार्जुन खड़गे के बुजुर्ग कंधों पर है।
बीजेपी में नितिन नबीन को अध्यक्ष बनाने का फैसला एक नियुक्ति नहीं बल्कि बीजेपी में पीढ़ीगत बदलाव की शृंखला का प्रतीक भी है। 1980 में स्थापना के बाद पहले अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और कुशाभाऊ ठाकरे जैसे नेताओं के नेतृत्व में पार्टी ने अपनी वैचारिक और सांगठनिक नींव मजबूत की। उनके बाद नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, वैंकया नायडू, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, नितिन गडकरी, जेपी नड्डा, अमित शाह जैसी दूसरी पीढ़ी ने धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव, देवेंद्र फडणवीस, योगी आदित्यनाथ, प्रह्लाद जोशी और अनुराग ठाकुर जैसी तीसरी पीढ़ी के साथ मिलकर पार्टी में संगठनात्मक विस्तार कर सत्ता तक पहुंचाया। अब चौथी पीढ़ी के रूप में युवा नितिन नबीन की ताजपोशी के साथ बीजेपी ने औपचारिक रूप से नेतृत्व की कमान सौंप दी है।
नितिन नबीन बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। इससे पहले यह रिकॉर्ड अमित शाह के नाम था, जिन्होंने 49 वर्ष की उम्र में पार्टी की कमान संभाली थी। उनसे पहले नितिन गडकरी 52 वर्ष की उम्र में अध्यक्ष बने थे। ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी भारतीय जनसंघ के दौर में कम उम्र में अध्यक्ष बने थे। इस फैसले के जरिए बीजेपी ने युवाओं को सीधा संदेश दिया है कि पार्टी में उम्र बाधा नहीं है। बल्कि सामाजिक दृष्टि देखें तो नितिन नबीन कायस्थ समुदाय से आते हैं, जिनकी संख्या चुनावी राजनीति में निर्णायक नहीं मानी जाती। इसके बावजूद उन्हें पार्टी का शीर्ष पद सौंपना यह दर्शाता है कि बीजेपी नेतृत्व चयन में जातिगत गणित से ऊपर उठकर संगठनात्मक क्षमता और राजनीतिक समझ को प्राथमिकता दे रही है। संगठन में काम करने वाला, जमीन से जुड़ा और चुनावी चुनौतियों को समझने वाला कार्यकर्ता शीर्ष तक पहुंच सकता है।
नितिन नबीन का चयन क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से भी बेहद अहम है। वह बिहार से आते हैं और पूर्वी भारत से बीजेपी के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं। मतलब साफ है कि पार्टी का फोकस केवल हिंदी पट्टी या पश्चिमी भारत तक सीमित नहीं है। बिहार, बंगाल, ओडिशा, असम और उत्तर-पूर्व जैसे राज्यों में बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है और नितिन नबीन को नेतृत्व सौंप कर पार्टी इस रणनीति को मजबूती प्रदान करना चाहती है। पीएम मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए एक लाख नए युवाओं को देश की राजनीति में लाने का वादा किया था। दूसरी तरफ आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत समेत संघ पदाधिकारों ने कई बार सार्वजनिक मंचों से युवाओं को नेतृत्व देने की बात कही। नितिन नबीन को पार्टी अध्यक्ष बनाना इसी बात का संकेत है।
भले ही नितिन नबीन का अध्यक्षीय कार्यकाल 3 साल का है जो जनवरी 2029 में पूरा होगा लेकिन इतना तो तय है कि 2029 का लोकसभा चुनाव उनके ही नेतृत्व में लड़ा जाएगा। उनसे पहले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर ही पार्टी ने अमित शाह और फिर जेपी नड्डा के अध्यक्ष कार्यकाल को विस्तार दिया था। यही वजह है कि उनकी टीम में युवाओं और अनुभवी नेताओं का संतुलन बनाने की बात कही जा रही है। पार्टी संगठन में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने का प्रावधान है और नई टीम में महिलाओं और युवा चेहरों को आगे लाने की तैयारी है

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