प्रवीण बागी
(संपादक )
45 वर्ष पुरानी भाजपा ने 45 वर्ष के युवा नितिन नवीन को अपना अध्यक्ष चुन लिया है। उनका केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा का निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना है। पार्टी के सबसे युवा अध्यक्ष के रूप में और निर्विरोध चुनाव के जरिए पार्टी ने एक बड़ा सन्देश दिया है। । यह नियुक्ति सिर्फ एक पद का बदलाव नहीं है, बल्कि भाजपा की रणनीति, संगठनात्मक सोच, और भारतीय राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन का संकेत भी है।
उनका चयन पार्टी में युवा नेतृत्व को आगे लाने की तत्काल जरूरत को दर्शाता है। यह बदलाव संकेत देता है कि भाजपा पुराने वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ नई पीढ़ी को भी मुख्य भूमिका दे रही है। 2029 के लिए रणनीति तैयार करते हुए युवा मतदाताओं और युवा कार्यकर्ताओं को मोहित करना चाहती है। पहले चुनावों में पार्टी ने देखा है कि अधिकांश भारत के वोटर युवा (18-39 वर्ष) हैं। ऐसे में नेतृत्व में युवा चेहरे का होना वोटरों के साथ जुड़ाव मजबूत कर सकता है।
नितिन पहले राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में चुने गए थे, और अब पूर्णकालिक अध्यक्ष बने हैं। यह प्रक्रिया पार्टी की परंपरा का हिस्सा मानी जाती है कि जब तक कोई नेता पूर्ण अध्यक्ष नहीं बनता, उसे कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में संगठन का अनुभव और जिम्मेदारी दी जाती है। भाजपा धीरज और अनुशासन के साथ नेतृत्व परिवर्तन कर रही है। यह एक प्रायोगिक तरीका है, जिससे नए अध्यक्ष को पहले संगठनात्मक कामकाज की समझ मिलती है।
उनकी नियुक्ति यह भी दर्शाती है कि भाजपा संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करना चाहती है। विशेष रूप से कैडर बेस्ड राजनीति पर फोकस बढ़ाना चाहती है। पार्टी के सभी स्तरों (राज्य/केंद्र) में तालमेल बढ़ाना चाहती है। कार्यकर्ता राजनीति को और गति देना चाहती है। पीएम नरेंद्र मोदी ने नितिन नवीन को अपना ‘बॉस’ बताते हुए पार्टी में पदानुक्रम की महत्ता पर जोर दिया है, जिससे यह संदेश जाता है कि संगठनवादी व्यवस्था जारी रहेगी।
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पार्टी ने 2024 के आम चुनावों में पूर्ण बहुमत नहीं पाया और उसे गठबंधन के माध्यम से शासन करना पड़ा। आगामी विधानसभा चुनावों (विशेष रूप से पश्चिम बंगाल जैसे कठिन क्षेत्रों में) में पार्टी को मजबूत रणनीति चाहिए। ऐसे में नितिन का चयन संगठन की रणनीतिक मजबूती के लिए है। वे बिहार जैसे महत्वपूर्ण प्रदेश से आते हैं, जो राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा की ताकत बढ़ाने में मदद कर सकता है। उनके नेतृत्व में पार्टी आंतरिक समन्वय, वोट बैंक विस्तार और चुनाव-पूर्व तैयारी पर ध्यान देगी। नितिन के जरिये प.बंगाल के ‘भद्रलोक’ को भी साधने की कोशिश है।पार्टी अध्यक्ष के रूप में उनके लिए यह बड़ी चुनौती है। छत्तीसगढ़ और सिक्किम की सफलता उन्हें रास्ता दिखाएगी।
नितिन नवीन का सफर पार्टी की साधारण कार्यकर्ता से शीर्ष नेतृत्व तक की कहानी है। यह भाजपा के उन सिद्धांतों को भी दर्शाता है, जहां कसौटी पर खरे संगठनकर्ता को मौका दिया जाता है। पारिवारिक राजनीति और वंशवाद की बजाय कार्यकर्ता-उत्प्रेरित नेतृत्व को तरजीह दी जाती है।भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि वह पारंपरिक नेतृत्व से आगे बढ़कर, नए विचारों के साथ 2029 की दिशा तय करने को तैयार है और इसके लिए उसने एक युवा, संगठित और लोक-संतुलन नेता को शीर्ष पर भेजा है।
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