बांग्लादेश में अगले महीने आम चुनाव होने वाले हैं। पूरी दुनिया की नजर बांग्लादेश में चल रही राजनीतिक हलचल पर नजर है। राजनीतिक विश्लेषक कह रहे हैं कि इस बार आम चुनाव में एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल सकता है। बांग्लादेश की राजनीति से लंबे समय तक बाहर रही पाकिस्तान समर्थक कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी पहली बार सरकार बनाने के बेहद करीब पहुंचती नजर आ रही है।
- Jamaat-e-Islami Party in Bangladesh:बांग्लादेश में 300 सीटों पर होने हैं चुनाव
- Jamaat-e-Islami Party in Bangladesh:1972 में इस पार्टी पर लगा था बैन
- Jamaat-e-Islami Party in Bangladesh: सर्वे में जमात और BNP में मामूली अंतर
- Jamaat-e-Islami Party in Bangladesh: जमात का दावा-पार्टी टकराव की राजनीति नहीं करती
- Jamaat-e-Islami Party in Bangladesh: देश में अब ‘इस्लाम ही समाधान है’ का नारा
- Jamaat-e-Islami Party in Bangladesh: बांग्लादेश में भारत जैसी ही चुनावी प्रक्रिया
Jamaat-e-Islami Party in Bangladesh:बांग्लादेश में 300 सीटों पर होने हैं चुनाव
बांग्लादेश में 12 फरवरी को 300 संसदीय सीटों पर आम चुनाव होंगे मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बांग्लादेश में हाल ही में हुए दो अलग-अलग सर्वे में जमात देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरती नजर आ रही है। सर्वे के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को जमात-ए-इस्लामी पार्टी कड़ी टक्कर दे रही है।
Jamaat-e-Islami Party in Bangladesh:1972 में इस पार्टी पर लगा था बैन
बताते चलें कि जमात-ए-इस्लामी पार्टी ने 1971 में बांग्लादेश की आजादी का विरोध किया था और पाकिस्तानी सेना का साथ दिया था। देश की आजादी के बाद 1972 में इस पर बैन लगा दिया गया था। यह बैन 1975 में हटाया गया और 1979 में जियाउर रहमान के शासन में पार्टी को चुनाव में भाग लेने की अनुमति मिली।
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Jamaat-e-Islami Party in Bangladesh: सर्वे में जमात और BNP में मामूली अंतर
एक अमेरिकी संस्था की ओर से कराए गए सर्वे में यह दावा किया गया है कि BNP को 33 प्रतिशत और जमात को 29 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिलता दिख रहा है। गौरतलब है कि इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट (IRI) ने दिसंबर में यह सर्वे कराया था। उधर जनवरी में किए गए एक ज्वांइट सर्वे में BNP को 34.7 प्रतिशत और जमात को 33.6 प्रतिशत समर्थन मिला था। यह सर्वे नरेटिव, प्रोजेक्शन BD, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी (IILD) और जगोरन फाउंडेशन ने मिलकर किया था।
Jamaat-e-Islami Party in Bangladesh: जमात का दावा-पार्टी टकराव की राजनीति नहीं करती
जमात-ए-इस्लामी पार्टी के प्रमुख शफीकुर रहमान का कहना है कि उनकी पार्टी अब विरोध और टकराव की राजनीति नहीं करती। हमारी पार्टी लोगों के हितों की राजनीति कर रही है। शफीकुर रहमान का कहना है कि हमारे कार्यकर्ता मेडिकल कैंप लगाने, बाढ़ पीड़ितों की मदद करने और आंदोलन में मारे गए लोगों के परिवारों को सहायता देने की बात कही।
Jamaat-e-Islami Party in Bangladesh: देश में अब ‘इस्लाम ही समाधान है’ का नारा
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बांग्लादेश के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लोगों में पिछली सरकार की नीतियों को लेकर गुस्सा है, जिसका फायदा जमात को मिल रहा है। पार्टी अब ‘इस्लाम ही समाधान है’ का नारा देकर खुद को एक नैतिक विकल्प के रूप में पेश कर रही है।ढाका में एक आम नागरिक कहता है कि लोग अब पुराने दलों से थक चुके हैं और उन्हें जमात एक नया और साफ विकल्प लगती है।
Jamaat-e-Islami Party in Bangladesh: बांग्लादेश में भारत जैसी ही चुनावी प्रक्रिया
बताते चलें कि बांग्लादेश में भी भारतीय चुनाव प्रक्रिया जैसी है चुनावी प्रक्रिया है। यहां संसद सदस्यों का चुनाव भारत की तरह ही फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली के जरिए होता है। यानी जिस उम्मीदवार को एक वोट भी ज्यादा मिलेगा, उसी की जीत होगी। चुनाव परिणाम आने के बाद सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन के सांसद अपने नेता का चुनाव करते हैं और वही प्रधानमंत्री बनता है। राष्ट्रपति देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाते हैं।
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