Bihar Bank Strike से चरमराई बैंकिंग व्यवस्था, आम जनता परेशान
बुधवार को Bihar Bank Strike के चलते राज्य की बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के आह्वान पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, ग्रामीण बैंक और सहकारी बैंकों के कर्मचारी सामूहिक हड़ताल पर चले गए। इसका सीधा असर राज्य की आर्थिक गतिविधियों और आम जनता की रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ा।
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के मुताबिक, सिर्फ बिहार में ही करीब 65 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय लेनदेन ठप हो गया। राज्यभर की हजारों बैंक शाखाओं में ताले लटके रहे, जिससे बैंक से जुड़ी लगभग सभी अहम सेवाएं बाधित हो गईं।
RTGS-NEFT और चेक क्लियरेंस पूरी तरह प्रभावित
हड़ताल के कारण चेक क्लियरेंस, RTGS, NEFT और डिमांड ड्राफ्ट जैसी अहम सेवाएं पूरी तरह से ठप रहीं। व्यापारियों के भुगतान अटक गए और बड़े ट्रांजैक्शन रुकने से बाजार में नकदी प्रवाह पर सीधा असर पड़ा।
हालांकि कुछ निजी बैंक सीमित रूप से खुले रहे, लेकिन सरकारी बैंकों पर निर्भर ग्राहकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर लोग घंटों बैंक शाखाओं और एटीएम के बाहर खड़े नजर आए, लेकिन अंत में उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा।
ATM खाली, नकदी संकट से जूझे लोग
लगातार तीन दिनों की छुट्टियों के बाद अचानक आई बैंक हड़ताल ने नकदी संकट को और गंभीर बना दिया। कई जिलों में सरकारी बैंकों के ATM पूरी तरह खाली हो गए। जिन इलाकों में एटीएम खुले भी थे, वहां कुछ ही घंटों में नकदी खत्म हो गई।
लोगों को मजबूरी में निजी बैंकों के एटीएम का सहारा लेना पड़ा, जहां अतिरिक्त शुल्क और लंबी कतारों ने परेशानी और बढ़ा दी। ग्रामीण इलाकों में हालात और ज्यादा खराब रहे, जहां बैंकिंग सेवाओं पर लोगों की निर्भरता ज्यादा है।
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कारोबारियों को सबसे ज्यादा नुकसान
Bihar Bank Strike का सबसे ज्यादा असर व्यापारियों और छोटे कारोबारियों पर पड़ा। जिनका भुगतान चेक या ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए होना था, उनके काम पूरी तरह से अटक गए। कई व्यापारियों ने बताया कि माल की आपूर्ति रुक गई और लेनदेन ठप होने से नुकसान बढ़ता जा रहा है।
उद्योग और व्यापार संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर हड़ताल लंबी चली, तो इसका असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
फाइव डे बैंकिंग की मांग बनी हड़ताल की मुख्य वजह

इस Bihar Bank Strike की सबसे बड़ी वजह बैंक कर्मचारियों की ‘फाइव डे बैंकिंग’ की मांग है। बैंक कर्मचारी चाहते हैं कि सप्ताह में सिर्फ पांच दिन काम हो और सभी शनिवार को अवकाश दिया जाए।
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के सचिव डी.एन. त्रिवेदी के अनुसार, पिछले वेतन समझौते के दौरान भारतीय बैंक संघ (IBA) ने सभी शनिवार को छुट्टी देने पर लिखित सहमति दी थी, लेकिन अब तक केंद्र सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
“एक जैसा काम, अलग नियम क्यों?”
बैंक कर्मचारियों का कहना है कि जब RBI, LIC और वित्त मंत्रालय जैसे संस्थानों में शनिवार को अवकाश रहता है, तो बैंकों के कर्मचारियों के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है। उनका तर्क है कि काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है और मानसिक तनाव भी अधिक है।
कर्मचारियों का मानना है कि पांच दिन का कार्य सप्ताह न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, बल्कि इससे काम की गुणवत्ता और उत्पादकता भी बेहतर होगी।
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बिहार के बड़े शहरों में प्रदर्शन, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
हड़ताल के दौरान पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और दरभंगा जैसे बड़े शहरों में बैंक कर्मचारियों ने रैलियां निकालीं और प्रशासनिक कार्यालयों के सामने प्रदर्शन किया। नौ बैंक यूनियनों के संयुक्त मंच UFBU के नेतृत्व में यह आंदोलन हुआ, जिसमें देशभर के करीब आठ लाख बैंक कर्मचारियों के शामिल होने का दावा किया गया है।
यूनियनों ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आने वाले दिनों में लंबी हड़ताल और राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन की चेतावनी भी दी गई है।
Bihar Bank Strike का आर्थिक असर, बढ़ सकती है चिंता
फिलहाल Bihar Bank Strike ने राज्य की आर्थिक गतिविधियों को झटका दिया है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर राजस्व, कारोबार और आम जनता की वित्तीय स्थिति पर और भी गहरा हो सकता है।
राज्य में बैंकिंग व्यवस्था की बहाली को लेकर अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार और भारतीय बैंक संघ के अगले कदम पर टिकी हैं।
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