Economic Crisis in Pakistan: पाक पीएम बोले- कर्ज मांगने में अब शर्म आती है, सिर झुकाना पड़ता है

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Big Economic Crisis in Pakistan-Pak PM
Highlights
  • • भारी कर्ज में डूबा पाकिस्तान • पाक पीएम बोले दूसरों के सामने हाथ फैलाना शर्मिंदगी भरा • UAE ने पाकिस्तान को कर्ज चुकाने की दी थी मोहलत • चीन का पाकिस्तान में 60 अरब डॉलर का निवेश • पाक पीएम ने माना देश में विकास, शोध एवं एनोवेशन पर काम नहीं हुआ

Economic Crisis in Pakistan: हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान भारी आर्थिक संकट से जूझ रहा है। पाकिस्तान को हर साल दूसरे देशों के सामने मदद की गुहार लगानी पड़ती है। अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने विदेशी कर्ज पर देश की बढ़ती निर्भरता को लेकर नाराजगी जताई है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को माना कि देश की बदहाल आर्थिक हालात के कारण उन्हें बार‑बार विदेशी दौरों पर जाकर कर्ज मांगना पड़ा। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री राजधानी इस्लामाबाद में कारोबारी नेताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘मैं आपको बताना चाहता हूं कि जब फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और मैं दुनियाभर में पैसे मांगने जाते हैं तो हमें शर्म आती है।’

Economic Crisis in Pakistan:  दूसरों के सामने सिर झुकाना शर्मिंदगी भरा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि -कर्ज लेना हमारे आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है। कई बार हमें मजबूरी में समझौता करना पड़ता है। कई बार ऐसा होता है कि कर्ज देने वाले देश की शर्तों को ‘ना’ भी नहीं कह पाते।शहबाज शरीफ ने कहा कि कर्ज का बोझ देश की इज्जत पर भारी पड़ रहा है और अब वैकल्पिक आर्थिक रास्ते तलाशने की जरूरत है। उनका बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान IMF से मदद और पुराने कर्ज को रोलओवर (आगे बढ़ाने) की कोशिश कर रहा है। पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के ताजा बयान से यह तो जाहिर हो गया है कि पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है और अंतरराष्ट्रीय मदद पर बहुत ज्यादा निर्भर हो चुका है। शहबाज ने चीन को “हर मौसम का दोस्त” बताया और कहा कि सऊदी अरब, यूएई और कतर ने भी अच्छे-बुरे हर वक्त में पाकिस्तान का साथ दिया है।

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Economic Crisis in Pakistan: पाकिस्तान में लगभग एक करोड़ लोग बेरोजगार

प्रधानमंत्री ने देश में बढ़ती गरीबी और बेरोजगारी पर भी चिंता जताई। उन्होंने माना है कि देश में अब तक शोध , विकास, और  इनोवेशन पर ठीक से काम नहीं हुआ। पाकिस्तान में गरीबी बढ़कर आबादी के करीब 45 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसकी वजह महंगाई, बाढ़ और आर्थिक अस्थिरता है। बेरोजगारी दर करीब 7.1 प्रतिशत हो चुकी है और 80 लाख से ज्यादा लोग बेरोजगार हैं।

2018 में जहां 21.9 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे थे, अब यह आंकड़ा करीब 45 प्रतिशत बताया जा रहा है। अत्यधिक गरीबी 4.9 प्रतिशत से बढ़कर 16.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। पीएम ने कहा है कि पाकिस्तान का निर्यात अब भी कपड़ा उद्योग पर निर्भर है। हालांकि उनका मानना है कि सॉफ्टवेयर, कृषि और पशुपालन में संभावना है, लेकिन ढांचागत कमजोरियां और कम उत्पादकता विकास में बाधा हैं। देश पर कुल सरकारी कर्ज मार्च 2025 तक 76,000 अरब रुपये से ज्यादा हो चुका है, जो चार साल में लगभग दोगुना हो गया। पाकिस्तान कर्ज चुकाने और डिफॉल्ट से बचने के लिए बार-बार IMF और चीन पर निर्भर है।

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Economic Crisis in Pakistan: UAE ने पाकिस्तान को कर्ज चुकाने की दी थी मोहलत

गौरतलब है कि पाकिस्तान के ऊपर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का भारी कर्ज है। UAE ने  2025 की शुरुआत में पाकिस्तान का 2 अरब डॉलर का कर्ज चुकाने की समयसीमा को आगे बढ़ा दिया था । साथ ही बिजली, बंदरगाहों के संचालन और गंदे पानी के साफ-सफाई वाले प्रोजेक्ट्स में 10 से 25 अरब डॉलर निवेश करने का वादा किया है। इसी तरह कतर ने पाकिस्तान में 3 अरब डॉलर के निवेश को जमीन पर उतारने के लिए समझौता किया है। यह निवेश विमानन, खेती और पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों में होगा। कतर पाकिस्तान को गैस की सप्लाई करने वाला भी एक बड़ा देश है। इन सभी देशों की मदद से ही इस समय पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था किसी तरह चल रही है। यह मदद चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे और विशेष निवेश सुविधा परिषद जैसे सरकारी ढांचों के जरिए दी जा रही है, जो इस वक्त पाकिस्तान की आर्थिक रीढ़ बने हुए हैं।

Economic Crisis in Pakistan: चीन का पाकिस्तान में 60 अरब डॉलर का निवेश

यह सभी जानते हैं कि चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा मददगार देश है। पाकिस्तान को चीन कई बार बिना शर्त के भी कर्ज देता रहा है। अब चीन ने भी पाकिस्तान को राहत देने के लिए उसका कर्ज लौटाने की समय-सीमा बढ़ा दी है। साल 2024-25 में यह मदद करीब 4 अरब डॉलर की मानी जा रही है। इसके अलावा चीन ने पाकिस्तान में बिजली परियोजनाओं, सड़कों, बंदरगाहों और दूसरे ढांचागत कामों में 60 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है। UAE(सऊदी अरब) ने दिसंबर 2024 में पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक में 3 अरब डॉलर जमा कराए। इसके बाद साल 2025 में पाकिस्तान को करीब 1.2 अरब डॉलर का तेल उधार पर दिया गया, ताकि तुरंत भुगतान का दबाव न पड़े। सऊदी अरब ने खनन, खेती और सूचना तकनीक के क्षेत्र में 5 से 25 अरब डॉलर तक निवेश करने के संकेत भी दिए हैं।

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