Panchayat Advancement Index PAI 2.0: गांव की सरकार का नया रिपोर्ट कार्ड, स्थानीय शासन की असली तस्वीर सामने

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PAI 2.0 से पंचायतों का राष्ट्रीय प्रदर्शन मूल्यांकन
Highlights
  • • पंचायत प्रदर्शन का राष्ट्रीय सूचकांक • बहुआयामी मूल्यांकन मानक • त्रिपुरा बना टॉप परफॉर्मर • डिजिटल रिपोर्टिंग चुनौती • ग्राम स्वराज से जुड़ा प्रशासनिक मॉडल

भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की जड़ें संसद भवन की दीवारों से कहीं ज्यादा गहराई में गांव की चौपाल तक फैली हुई हैं। स्थानीय स्वशासन को संवैधानिक ताकत 73वें संविधान संशोधन के बाद मिली, जब पंचायती राज संस्थाओं को औपचारिक दर्जा दिया गया। इसके बाद से ग्राम पंचायतें केवल विकास योजनाओं की क्रियान्वयन इकाई नहीं रहीं, बल्कि लोकतंत्र की पहली सीढ़ी बन गईं।

इसी स्थानीय शासन की कार्यक्षमता, पारदर्शिता और प्रभावशीलता को मापने के उद्देश्य से Panchayat Advancement Index (PAI) 2.0 की अवधारणा सामने आई है। यह पहल केवल प्रशासनिक मूल्यांकन नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के लोकतांत्रिक स्वास्थ्य का व्यापक आकलन है।

Panchayat Advancement Index PAI 2.0 Kya Hai

यह सूचकांक ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन को बहुआयामी मानकों पर मापने का प्रयास करता है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि योजनाओं पर खर्च हुए धन का वास्तविक सामाजिक प्रभाव कितना पड़ा।

मुख्य मूल्यांकन मानक शामिल हैं—
• सेवा वितरण की गुणवत्ता
• पारदर्शिता और जवाबदेही
• सामाजिक न्याय
• आधारभूत संरचना
• पर्यावरणीय प्रबंधन
• डिजिटल रिपोर्टिंग
• सामुदायिक भागीदारी

इस तरह मूल्यांकन केवल वित्तीय व्यय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शासन की गुणवत्ता को समग्र रूप से परखता है।

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Importance of Panchayat Advancement Index PAI 2.0 in Rural Governance

Panchayat Advancement Index PAI 2.0: गांव की सरकार का नया रिपोर्ट कार्ड, स्थानीय शासन की असली तस्वीर सामने 1

भारत में लगभग 2.68 लाख ग्राम पंचायतें हैं। इतने विशाल प्रशासनिक ढांचे की कार्यक्षमता सुनिश्चित करना अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में यह सूचकांक डेटा-आधारित निगरानी प्रणाली के रूप में काम करता है।

जब पंचायतों को पता होता है कि उनका काम राष्ट्रीय स्तर पर आंका जाएगा, तो—
• योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आती है
• भ्रष्टाचार की संभावना घटती है
• रिकॉर्ड प्रबंधन बेहतर होता है
• नागरिक भागीदारी बढ़ती है

यह व्यवस्था स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी पैदा करती है, जिससे पंचायतें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होती हैं।

Tripura Tops Panchayat Advancement Index PAI 2.0

Panchayat Advancement Index PAI 2.0: गांव की सरकार का नया रिपोर्ट कार्ड, स्थानीय शासन की असली तस्वीर सामने 2

हालिया रैंकिंग में त्रिपुरा का शीर्ष स्थान हासिल करना कई मायनों में महत्वपूर्ण संकेत देता है। सीमित संसाधनों वाले छोटे राज्य ने दिखाया कि प्रशासनिक समन्वय, तकनीकी अनुपालन और सामुदायिक सहयोग के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया जा सकता है।

यह उपलब्धि बड़े राज्यों के लिए भी संदेश है कि संसाधन ही सफलता का एकमात्र आधार नहीं होते—प्रबंधन और भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

Digital Challenges in Panchayat Advancement Index PAI 2.0

Panchayat Advancement Index PAI 2.0: गांव की सरकार का नया रिपोर्ट कार्ड, स्थानीय शासन की असली तस्वीर सामने 3

सूचकांक की विश्वसनीयता डेटा पर निर्भर करती है, और यहीं सबसे बड़ी चुनौती सामने आती है।

ग्रामीण भारत के कई क्षेत्रों में—
• इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित है
• तकनीकी दक्षता कम है
• डिजिटल रिपोर्टिंग ढांचा कमजोर है

ऐसे में आशंका रहती है कि जिन पंचायतों का जमीनी काम बेहतर है, वे डिजिटल अपलोडिंग की कमी के कारण रैंकिंग में पीछे रह जाएं।

Ranking Pressure vs Real Development

रैंकिंग प्रणाली प्रेरणा देती है, लेकिन इसके दुष्प्रभाव भी संभव हैं। अंक सुधारने की होड़ कहीं “कागजी विकास” को बढ़ावा न दे दे, यह चिंता विशेषज्ञों ने जताई है।

विकास का वास्तविक पैमाना है—
• नागरिक संतुष्टि
• जीवन गुणवत्ता
• सामाजिक समावेशन

इन पहलुओं को मात्र संख्यात्मक स्कोर में सीमित करना कठिन होता है।

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महात्मा गांधी ने ग्राम स्वराज्य की अवधारणा दी थी—आत्मनिर्भर, सशक्त और सहभागी गांव। आधुनिक प्रशासनिक सूचकांक उस विचार को तकनीकी आधार प्रदान करते हैं।

यह पहल पारंपरिक स्थानीय शासन को डिजिटल युग से जोड़ने का माध्यम बन सकती है, जहां नीति निर्माण और जमीनी क्रियान्वयन के बीच डेटा सेतु का काम करता है।

Policy Implications & Way Forward

उच्च रैंकिंग पाने वाली पंचायतों के मॉडल को अन्य राज्यों में साझा करना जरूरी है। “बेस्ट प्रैक्टिस” साझा करने से सूचकांक प्रतिस्पर्धा से आगे बढ़कर सहयोग मंच बन सकता है।

नीतिगत सुझाव—
• प्रशिक्षण कार्यक्रम विस्तार
• डिजिटल अवसंरचना निवेश
• कम रैंक पंचायतों को तकनीकी सहायता
• सामुदायिक जागरूकता अभियान

यह सूचकांक संकेत देता है कि भारत अब स्थानीय लोकतंत्र को मापने और मजबूत करने की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रहा है। इसकी सफलता केवल रैंकिंग जारी करने में नहीं, बल्कि उस डेटा को नीति सुधार में बदलने में निहित होगी।

यदि पारदर्शिता, निरंतरता और संवेदनशीलता के साथ इसे लागू किया गया, तो यह पहल ग्रामीण प्रशासनिक पुनर्जागरण का आधार बन सकती है। तब लोकतंत्र की असली ताकत—गांव—वास्तव में सशक्त दिखाई देगा।

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