Pappu Yadav Judicial Custody: 31 साल पुराने केस में गिरफ्तारी, अस्पताल में पुलिस निगरानी में इलाज

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गिरफ्तारी के बाद पटना सिविल कोर्ट में पेशी के दौरान पप्पू यादव
Highlights
  • • 31 साल पुराने केस में पप्पू यादव गिरफ्तार • मेडिकल जांच के बाद पटना सिविल कोर्ट में पेशी • कोर्ट ने भेजा ज्यूडिशियल कस्टडी • स्वास्थ्य कारणों से जेल नहीं भेजा गया • पीएमसीएच में पुलिस कस्टडी में इलाज • 9 फरवरी को जमानत पर सुनवाई

बिहार की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी कानूनी कार्रवाई ने शनिवार को सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव को 31 साल पुराने एक मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद पटना सिविल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजने का आदेश दिया गया। हालांकि स्वास्थ्य कारणों को देखते हुए अदालत ने उन्हें फिलहाल जेल भेजने के बजाय अस्पताल में इलाज की अनुमति दी है।

मेडिकल जांच के बाद उन्हें एंबुलेंस से कोर्ट लाया गया। पेशी के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे। कोर्ट के आदेश के बाद अब वे पीएमसीएच में पुलिस कस्टडी में रहकर इलाज कराएंगे।

Pappu Yadav Judicial Custody: मेडिकल जांच के बाद कोर्ट में पेशी

गिरफ्तारी के बाद सबसे पहले पप्पू यादव की मेडिकल जांच कराई गई। स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्हें एंबुलेंस के जरिए पटना सिविल कोर्ट लाया गया। पेशी के दौरान उनके समर्थकों और मीडिया की भारी मौजूदगी देखी गई, जिसके कारण सुरक्षा व्यवस्था सख्त रखी गई थी।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद उन्हें ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजने का आदेश दिया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए तत्काल जेल भेजना उचित नहीं होगा।

Pappu Yadav Judicial Custody: जेल नहीं, अस्पताल में रहेंगे सांसद

अदालत के आदेश के मुताबिक फिलहाल पप्पू यादव जेल नहीं जाएंगे। उन्हें इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में भर्ती रहने की अनुमति दी गई है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि अस्पताल में रहने के बावजूद वे पुलिस कस्टडी में ही माने जाएंगे। यानी सुरक्षा और निगरानी पूरी तरह पुलिस के नियंत्रण में रहेगी। उनकी आवाजाही, मुलाकात और इलाज की प्रक्रिया कानूनी प्रोटोकॉल के तहत होगी।

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Pappu Yadav Judicial Custody: 9 फरवरी को जमानत पर सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 9 फरवरी को तय की गई है। बचाव पक्ष के वकील ऋषिकेश नारायण नारायण सिन्हा ने जानकारी दी कि इसी दिन जमानत याचिका पर कोर्ट में बहस होगी।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, स्वास्थ्य आधार, गिरफ्तारी की परिस्थितियां और केस की प्रकृति—तीनों पहलुओं पर सुनवाई के दौरान चर्चा हो सकती है। जमानत मिलती है या नहीं, यह अब अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगा।

Pappu Yadav Judicial Custody: मकान कब्जा विवाद से जुड़ा है मामला

गिरफ्तारी जिस मामले में हुई है, वह एक मकान पर कब्जे से जुड़ा पुराना विवाद बताया जा रहा है। यह केस करीब 31 साल पुराना है, जिसे लेकर पुलिस ने कार्रवाई की।

सूत्रों के अनुसार शुक्रवार रात पुलिस टीम उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची थी। गिरफ्तारी से पहले हाई वोल्टेज ड्रामा भी देखने को मिला। समर्थकों की मौजूदगी, राजनीतिक बयानबाज़ी और पुलिस कार्रवाई—इन सबके कारण माहौल देर रात तक गर्म रहा।

आखिरकार पुलिस ने देर रात उन्हें हिरासत में लेकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की।

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Pappu Yadav Judicial Custody: गिरफ्तारी का राजनीतिक असर

सांसद की गिरफ्तारी का असर सिर्फ कानूनी दायरे तक सीमित नहीं है। इसका राजनीतिक संदेश भी निकाला जा रहा है। पूर्णिया और सीमांचल क्षेत्र में पप्पू यादव का मजबूत जनाधार माना जाता है, ऐसे में यह मामला क्षेत्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।

संभावित राजनीतिक असर:
• समर्थकों में आक्रोश और विरोध प्रदर्शन की संभावना
• विपक्ष द्वारा कार्रवाई पर सवाल
• क्षेत्रीय समीकरणों में हलचल
• आगामी चुनावी रणनीतियों पर असर
• सीमांचल राजनीति में ध्रुवीकरण की संभावना

Pappu Yadav Judicial Custody: आगे क्या?

अब पूरा मामला 9 फरवरी की सुनवाई पर टिका है। अगर जमानत मिलती है तो उन्हें राहत मिल सकती है, अन्यथा ज्यूडिशियल कस्टडी की अवधि बढ़ सकती है।

स्वास्थ्य आधार पर अस्पताल में रहने की अनुमति फिलहाल अंतरिम राहत मानी जा रही है। कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ स्थिति स्पष्ट होगी कि उन्हें जेल भेजा जाएगा या अस्पताल में ही रखा जाएगा।

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