Law and order in Bihar:कानून-व्यवस्था के सवाल पर दावों और जमीनी हकीकत के बीच बढ़ती खाई

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POLITICS ON LAW AND ORDER IN BIHAR
Highlights
  • . बिहार में कानून व्यवस्था के सवाल पर राजनीति . विपक्ष का आरोप सरकार का निवारण तंत्र कमजोर . सूबे में अपराधियों का मनोबल बढ़ा . बिहार में कानून-व्यवस्था की चुनौती बहुआयामी

रिपोर्ट-अनुभव सिन्हा

Law and order in Bihar:बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस तेज हो गई है। हाल के दिनों में सामने आई आपराधिक घटनाओं ने राज्य सरकार के दावों पर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार द्वारा किए जा रहे “सख्त कार्रवाई” और “जीरो टॉलरेंस” के दावे ज़मीनी स्तर पर असरदार साबित नहीं हो पा रहे हैं। महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा और नए रूप में सिर उठा रहा जातीय संघर्ष गंभीर चिंता का विषय है।

Law and order in Bihar: सरकार का निवारण तंत्र कमजोर

राज्य सरकार की ओर से समय-समय पर यह कहा जाता रहा है कि अपराध नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने कई बैठकों में पुलिस प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संगठित अपराध और रंगदारी जैसे मामलों में कठोर कार्रवाई हो। डीजीपी स्तर पर समीक्षा बैठकें आयोजित की गई हैं और जिलों को अलर्ट पर रखा गया है।

इसके बावजूद, हाल के महीनों में हत्या, लूट, अपहरण और गोलीबारी की घटनाओं ने आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना बढ़ाई है। राजधानी पटना सहित कई जिलों में व्यापारियों और ठेकेदारों से रंगदारी मांगने की घटनाएं सुर्खियों में रही हैं। कुछ मामलों में पुलिस ने त्वरित गिरफ्तारी का दावा किया, लेकिन विपक्ष का कहना है कि अपराध की पुनरावृत्ति यह साबित करती है कि निवारक तंत्र कमजोर है।

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Law and order in Bihar: सूबे में अपराधियों का मनोबल बढ़ा

विपक्षी नेता Tejashwi Yadav ने हालिया प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं है और प्रशासनिक तंत्र पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया है। उनका कहना है कि अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ है, जबकि आम जनता भय के माहौल में जी रही है। उन्होंने सरकार से विस्तृत श्वेत पत्र जारी करने की मांग भी की है।

सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं का पलटवार है कि विपक्ष अपराध की घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। उनका कहना है कि अपराध के आंकड़ों की तुलना पिछले वर्षों से की जानी चाहिए, जिससे स्पष्ट होगा कि कई श्रेणियों में कमी आई है। सरकार का दावा है कि त्वरित सुनवाई और विशेष अदालतों के माध्यम से दोषसिद्धि दर बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है।

Law and order in Bihar: बिहार में कानून-व्यवस्था की चुनौती बहुआयामी

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में कानून-व्यवस्था की चुनौती बहुआयामी है। सीमावर्ती जिलों में अवैध हथियारों की

तस्करी, भूमि विवाद, पंचायत स्तर पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक असमानता—ये सभी कारक अपराध की पृष्ठभूमि तैयार करते हैं। पुलिस बल की संख्या और संसाधनों की उपलब्धता भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कई थानों में स्वीकृत पदों की तुलना में कर्मियों की संख्या कम बताई जाती है, जिससे जांच और गश्ती व्यवस्था प्रभावित होती है।

ग्रामीण इलाकों में भूमि विवाद और आपसी रंजिशें अक्सर हिंसक रूप ले लेती हैं। शहरी क्षेत्रों में साइबर अपराध और आर्थिक धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी संसाधनों और आधुनिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है, ताकि बदलते अपराध स्वरूप का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

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Law and order in Bihar: अपराध में कमी के प्रमाणित आंकड़े जुटाई जाएं

कानून-व्यवस्था का सीधा संबंध निवेश और आर्थिक गतिविधियों से भी है। उद्योग और व्यापार जगत की ओर से कई बार सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है। यदि सुरक्षा की भावना कमजोर होती है, तो निवेश प्रभावित हो सकता है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती केवल अपराध नियंत्रण की नहीं, बल्कि भरोसा बहाल करने की भी है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले चुनावी परिदृश्य में कानून-व्यवस्था एक केंद्रीय मुद्दा बन सकता है। यदि अपराध की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश नहीं लगा, तो विपक्ष इसे बड़े चुनावी नैरेटिव में बदल सकता है। वहीं, सरकार के लिए यह आवश्यक होगा कि वह केवल बयानबाज़ी से आगे बढ़कर ठोस परिणाम प्रस्तुत करे—चाहे वह दोषसिद्धि दर हो, अपराध में कमी के प्रमाणित आंकड़े हों या पुलिस सुधार के ठोस कदम।

फिलहाल, बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर बहस जारी है। दावे और प्रतिदावे के बीच आम नागरिक की प्राथमिक अपेक्षा सुरक्षा और स्थिरता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासनिक सख्ती और नीतिगत सुधार जमीनी स्तर पर कितना असर दिखाते हैं और क्या सरकार अपने दावों को ठोस परिणामों में बदल पाती है।

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