बिहार विधानसभा में मंगलवार का दिन बेहद हंगामेदार रहा। चौकीदार और दफादार पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सियासी तापमान को चरम पर पहुँचा दिया। विपक्ष ने नारेबाजी और प्रदर्शन के जरिए सरकार को घेरने की कोशिश की, लेकिन मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने पलटवार करते हुए राजद सहित विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। सदन के भीतर आरोप-प्रत्यारोप का ऐसा दौर चला कि स्थिति कई बार नियंत्रण से बाहर जाती दिखी।
सदन में गरमाया माहौल: Bihar Assembly Uproar over Chowkidar Dafadar Protest बना बड़ा मुद्दा
सोमवार को पटना में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे चौकीदार और दफादार पर पुलिस लाठीचार्ज के बाद यह मामला तूल पकड़ गया। अगले ही दिन विधानसभा में विपक्ष ने इसे सरकार की संवेदनहीनता बताते हुए जोरदार हंगामा किया। राजद के कुमार सर्बजीत समेत कई विपक्षी सदस्य पहले सदन के बाहर प्रदर्शन करते दिखे और फिर अंदर सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष की नारेबाजी पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिनके शासनकाल में बिहार में कोई ठोस काम नहीं हुआ, वे आज विकास पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बेबुनियाद आरोप लगाने से सच्चाई नहीं बदलती। सदन में उन्होंने संख्या बल का भी जिक्र किया और कहा कि आज सत्तापक्ष के पास 202 विधायक हैं, जबकि विपक्ष सीमित संख्या में सिमट चुका है।
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लालू-राबड़ी काल का जिक्र और पलटवार: Bihar Assembly Uproar over Chowkidar Dafadar Protest पर तीखी बयानबाजी
मुख्यमंत्री ने बहस के दौरान पुराने शासनकाल का हवाला देते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब शाम के बाद लोग घरों से निकलने से डरते थे। उन्होंने संकेत दिया कि वर्तमान समय में राज्य में विकास कार्यों की रफ्तार तेज हुई है और कानून व्यवस्था मजबूत हुई है। उनका यह बयान सीधे तौर पर राजद शासनकाल पर हमला माना गया।
जैसे ही मुख्यमंत्री ने विपक्ष को चुपचाप बैठने की नसीहत दी, विपक्षी सदस्य वेल में आ गए और प्लेकार्ड लहराते हुए नारेबाजी करने लगे। स्थिति बिगड़ती देख स्पीकर Prem Kumar ने मार्शलों को बुलाने का आदेश दिया और हंगामा कर रहे सदस्यों से प्लेकार्ड हटवाए।
सरकार का आश्वासन और विपक्ष की मांग

हंगामे के बीच संसदीय कार्य मंत्री Vijay Kumar Chaudhary ने कहा कि सरकार चौकीदार और दफादार के मुद्दे को गंभीरता से देखेगी। वहीं मंत्री Bijendra Prasad Yadav ने स्पष्ट किया कि प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर उनकी मांगों पर चर्चा की जाएगी।
लोजपा विधायक Raju Tiwari ने भी लाठीचार्ज करने वालों पर कार्रवाई की मांग की, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह मुद्दा केवल विपक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्तापक्ष के भीतर भी चिंता का विषय बना हुआ है।
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राजनीतिक संदेश और चुनावी संकेत
इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक प्रशासनिक मसले तक सीमित नहीं देखा जा रहा। विधानसभा के भीतर हुई तीखी बयानबाजी आने वाले राजनीतिक समीकरणों की ओर भी संकेत कर रही है। मुख्यमंत्री का यह कहना कि विपक्ष आगे भी सरकार में नहीं आने वाला, स्पष्ट रूप से राजनीतिक आत्मविश्वास का प्रदर्शन है।
दूसरी ओर, चौकीदार और दफादार जैसे जमीनी स्तर के कर्मियों का मुद्दा ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक असर डाल सकता है। यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस निर्णय नहीं हुआ, तो विपक्ष इसे बड़ा जनांदोलन बनाने की कोशिश कर सकता है।
क्या आगे बढ़ेगा विवाद?
फिलहाल सरकार ने प्रतिनिधिमंडल से बातचीत का आश्वासन दिया है, लेकिन विपक्ष लाठीचार्ज की न्यायिक जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्मा सकता है।
विधानसभा की इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि राजनीतिक टकराव अब और तेज होने वाला है। सदन के भीतर की तल्खी सड़कों तक पहुंच सकती है।
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