AI Impact Summit तकनीक के आईने में भविष्य

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AI Impact Summit 2026 : मौजूदा समय की सबसे गहरी बहसों का वैश्विक मंच
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  • • AI IMPACT SUMIT मौजूदा समय की सबसे गहरी बहसों का वैश्विक मंच • एआई नई असमानताएँ रचेगा या हर वर्ग को सशक्त करने का सेतु बनेगा? • एआई नई असमानताओं का औज़ार बनेगा या व्यापक सशक्तिकरण का माध्यम? • तीव्र डिजिटल परिवर्तन के बीच भारत इस बदलाव के केंद्र में •एआई का लोकतंत्रीकरण मूलतः सामाजिक न्याय का प्रश्न है •हम कैसा कल गढ़ना चाहते हैं ? यह सबसे बड़ा सवाल

नीरज कृष्ण (वरिष्ठ स्तंभकार)

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AI Impact Summit :16 से 20 फरवरी के बीच भारत में विश्व का चौथा एआई इम्पैक्ट समिट आयोजित है। ये तिथियाँ मात्र कैलेंडर का हिस्सा नहीं, बल्कि उस निर्णायक क्षण का संकेत हैं जहाँ तकनीक, समाज और भविष्य एक ही संवाद में समाहित होते दिखते हैं। इंडिया एआई मिशन के तहत आयोजित हो रहे इस सम्मलेन में सौ सेअधिक देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इससे भारत के लिए वैश्विक निवेश और तकनीकी साझेदारी के नए अवसर खुलने की उम्मीद है। भारत में सम्मेलन से ठीक पहले सरकार ने आईटी नियमों (2021) में संशोधन कर एआई-जनित सामग्री और डीपफेक पर सख्त नियंत्रण का संकेत दिया है। अब सोशल मीडिया व डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एआई से निर्मित वीडियो, फोटो, ऑडियो या टेक्स्ट की स्पष्ट लेबलिंग अनिवार्य होगी, तथा हानिकारक या भ्रामक सामग्री को कुछ ही घंटों में हटाना होगा। उल्लंघन की स्थिति में कंपनियों के लिए कानूनी जवाबदेही तय की गई है। यह कदम नवाचार के साथ जिम्मेदारी के संतुलन का स्पष्ट संदेश देता है।

AI Impact Summit : मौजूदा समय की सबसे गहरी बहसों का वैश्विक मंच

 इस बार समिट का केंद्र ‘पीपल, प्लैनेट एंड प्रोग्रेस’ का संतुलित मंत्र होगा—जहाँ भारत एआई विमर्श को प्रभाव, समावेशन और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का संकल्प दिखाएगा। संवाद के केंद्र में मानव संसाधन विकास, सुरक्षित व भरोसेमंद एआई, नवाचार, एआई संसाधनों की लोकतांत्रिक पहुँच और आर्थिक प्रगति जैसे निर्णायक आयाम रहेंगे, जो तकनीक को मानवीय और टिकाऊ भविष्य से जोड़ते हैं। ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ तकनीकी आयोजन से कहीं अधिक—हमारे समय की सबसे गहरी बहसों का वैश्विक मंच है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जो कभी कल्पना का विषय थी, आज शासन, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा की धुरी बन चुकी है; ऐसे दौर में भारत का यह सम्मेलन विश्व-विमर्श का स्वाभाविक केंद्र बनता है।

AI Impact Summit : नवाचार के साथ जवाबदेही ही भविष्य का नया मानक होगी

ब्लेचली पार्क (2023) से सियोल (2024) और फ्रांस (2025) तक, इस समिट ने एआई सुरक्षा, जोखिम और सहयोग की दिशा तय की है। भारत में आगामी संस्करण से पहले एआई-जनित सामग्री और डीपफेक पर सख्त आईटी प्रावधान लागू होना स्पष्ट करता है कि नवाचार के साथ जवाबदेही ही भविष्य का नया मानक होगी। एआई इम्पैक्ट समिट इस बार वैश्विक नेतृत्व और तकनीकी दूरदृष्टि का सघन संगम बनकर उभरता है। नरेंद्र मोदी और इमैनुएल मैक्रों जैसे नीति-निर्माताओं के साथ, सुंदर पिचाई, सैम ऑल्टमैन, शांतनु नारायण और क्रिस्टियानो एमोन भविष्य की दिशा पर विचार रखेंगे। मुकेश अंबानी उद्योग–प्रौद्योगिकी सेतु की दृष्टि देंगे, जबकि डारियो अमोडेई, डेमिस हासाबिस और आर्थर मेंश अनुसंधान की अग्रिम पंक्ति का प्रतिनिधित्व करेंगे।

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AI Impact Summit : एआई नई असमानताएँ रचेगा या हर वर्ग को सशक्त करने का सेतु बनेगा?

अलेक्जेंडर वांग शासन-डेटा की जटिलताओं पर प्रकाश डालेंगे, तो विशाल सिक्का सहित भारतीय नवाचार की नई ऊर्जा भी मुखर होगी। यह मंच नामों से अधिक, विचारों का निर्णायक संवाद है। इस समिट का केंद्रीय विचार—“एआई का लोकतंत्रीकरण और एआई की खाई को पाटना”—तकनीक से आगे बढ़कर सामाजिक न्याय का प्रश्न बन जाता है। लोकतंत्रीकरण का अर्थ केवल एआई की उपलब्धता नहीं, बल्कि उसकी न्यायपूर्ण पहुँच, समान उपयोग और व्यापक लाभ-साझेदारी है। असली चुनौती यही है कि क्या एआई कुछ शक्तिशाली हाथों में सिमटकर नई असमानताएँ रचेगा, या समाज के हर वर्ग को सशक्त करने का सेतु बनेगा? यही द्वंद्व आज की निर्णायक तकनीकी-नैतिक बहस है।

AI Impact Summit : एआई नई असमानताओं का औज़ार बनेगा या व्यापक सशक्तिकरण का माध्यम?

भारत के लिए यह सम्मेलन अवसर और उत्तरदायित्व, दोनों का प्रतीक है। यह जहाँ वैश्विक निवेश और साझेदारी के द्वार खोल सकता है, वहीं नीति-निर्माण और नवाचार को नई दिशा दे सकता है। एआई में नेतृत्व की आकांक्षा केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि रणनीतिक स्वायत्तता और ज्ञान-निर्माण की अभिलाषा है—विशेषकर ऐसे भारत के लिए, जिसकी जनसंख्या युवा है और डिजिटल परिवर्तन तीव्र, इस क्रांति के केंद्र में खड़ा दिखाई देता है। परंतु अवसर जितने बड़े हैं, प्रश्न भी उतने ही गहरे हैं। समिट का मुख्य विषय—“एआई का लोकतंत्रीकरण और खाई को पाटना”—दरअसल हमारे समय की सबसे गहरी नैतिक-वैचारिक चुनौती है। लोकतंत्रीकरण केवल तकनीक की उपलब्धता नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण पहुँच और लाभों के समान वितरण का वादा है। निर्णायक प्रश्न यही है कि क्या एआई नई असमानताओं का औज़ार बनेगा या व्यापक सशक्तिकरण का माध्यम?

AI Impact Summit : तीव्र डिजिटल परिवर्तन के बीच भारत इस बदलाव के केंद्र में

भारत के लिए यह सम्मेलन रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यह न केवल निवेश और साझेदारी के अवसर खोलता है, बल्कि नीति, नवाचार और ज्ञान-नेतृत्व की दिशा भी तय करता है। युवा जनसंख्या और तीव्र डिजिटल परिवर्तन के बीच भारत इस बदलाव के केंद्र में है—जहाँ अवसरों के साथ गंभीर जिम्मेदारियाँ भी जुड़ी हैं। रोजगार, सुरक्षा और पर्यावरण—ये तीनों विमर्श इस परिवर्तन की कसौटी हैं। स्वचालन जहाँ पारंपरिक नौकरियों पर प्रश्नचिह्न लगाता है, वहीं नए कौशल और भूमिकाओं की संभावना भी रचता है। एआई की बढ़ती शक्ति सुरक्षा और गोपनीयता के लिए चुनौतियाँ लाती है, तो डेटा सेंटरों की ऊर्जा-खपत पर्यावरणीय संतुलन का प्रश्न उठाती है। इसलिए भविष्य का मार्ग तकनीकी प्रगति, नैतिक विवेक और टिकाऊ दृष्टि के संतुलन से ही प्रशस्त होगा।

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AI Impact Summit : एआई का लोकतंत्रीकरण मूलतः सामाजिक न्याय का प्रश्न है

एआई इम्पैक्ट समिट में रोजगार का विमर्श भय और संभावना के बीच संतुलन खोजने का प्रयास है—जहाँ स्वचालन से उत्पन्न दबाव के साथ-साथ नए कौशल और नई कार्य-संस्कृतियों की उभरती दुनिया भी केंद्र में है। यही दृष्टि इसका सार है। जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता कूटनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा की संरचनाओं को पुनर्परिभाषित कर रही है, तब भारत का इस मंच को रणनीतिक प्राथमिकता देना एक स्पष्ट संदेश है कि यह केवल तकनीक का उत्सव नहीं, बल्कि

मानव और मशीन के साझा भविष्य पर गंभीर मनन है। एआई का लोकतंत्रीकरण मूलतः सामाजिक न्याय का प्रश्न है। यदि यह तकनीक केवल संसाधन-संपन्न वर्ग तक सीमित रही, तो असमानताएँ और गहरी होंगी; किंतु शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और शासन में समावेशी उपयोग से यह अवसरों का अभूतपूर्व विस्तार कर सकती है—

AI Impact Summit :तकनीक एक नए डिजिटल विभाजन का कारण बन सकती है

ग्रामीण कक्षाओं से लेकर दूरस्थ उपचार और किसान निर्णयों तक। यही वह बिंदु है जहाँ एआई उपकरण नहीं, परिवर्तन की शक्ति बनती है।भारत की बहुभाषिक और बहुसांस्कृतिक वास्तविकता इस विमर्श को और संवेदनशील बनाती है। भाषाएँ यहाँ पहचान और ज्ञान की धरोहर हैं; अतः एआई का लोकतंत्रीकरण तभी सार्थक होगा जब प्रणालियाँ स्थानीय भाषाओं, बोलियों और सामाजिक संदर्भों को आत्मसात करें। अन्यथा, तकनीक एक नए डिजिटल विभाजन का कारण बन सकती है। इसलिए अनुसंधान और विकास का केंद्र स्थानीय आवश्यकताएँ और भाषाई विविधता ही होना चाहिए।

AI Impact Summit : हम कैसा कल गढ़ना चाहते हैं ?

समिट के प्रदर्शनी स्टॉल और कॉरपोरेट प्रस्तुतियाँ तकनीकी उपलब्धियों का आकर्षक दृश्य अवश्य रचेंगी, किंतु वास्तविक अर्थ उस गहन संवाद में निहित है जो इनके पीछे स्पंदित होता है। तकनीक यहाँ मात्र उत्पाद नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक आकांक्षाओं, मूल्यों और भविष्य-दृष्टि का प्रतिबिंब बनकर उभरती है—हम कैसा कल गढ़ना चाहते हैं और उसमें मानव की भूमिका क्या होगी।

AI Impact Summit : प्रतिस्पर्धा और सहयोग की नई रेखाएँ खिंच रही तकनीक

एआई के इस युग में मूल प्रश्न मानव-केंद्रिकता का है। क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमारी सृजनात्मकता और निर्णय-क्षमता का विस्तार बनेगी, या उनका विकल्प? यह बहस तकनीकी से अधिक नैतिक और दार्शनिक है। यदि उद्देश्य मानव कल्याण है, तो पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास की अनिवार्य शर्तें हैं। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य—आर्थिक अनिश्चितताओं, बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों और तीव्र डिजिटल परिवर्तन—ने

एआई को महज़ तकनीक से कहीं अधिक, एक निर्णायक रणनीतिक शक्ति बना दिया है। प्रतिस्पर्धा और सहयोग की नई रेखाएँ खिंच रही हैं, और भारत के सामने यह ऐतिहासिक अवसर है कि वह उपभोग की सीमा से आगे बढ़कर सृजन और वैचारिक नेतृत्व का ध्वजवाहक बने।

AI Impact Summit : तकनीक का सार मानव बुद्धि, आकांक्षा और मूल्यों में निहित

किन्तु हर संभावना अपने साथ उत्तरदायित्व भी लाती है। तकनीकी प्रगति तभी सार्थक है जब वह मानवीय गरिमा, सामाजिक संतुलन और नैतिक विवेक के साथ सामंजस्य स्थापित करे। नीति-निर्माताओं, उद्योग, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के बीच सतत, संवेदनशील संवाद ही इस संतुलन का आधार है—और ऐसे मंच उस सामूहिक समझ के निर्माण के अपरिहार्य सेतु। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की विशेषता यही है कि यह एआई को केवल आर्थिक सामर्थ्य नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की शक्ति के रूप में देखने का दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यह याद दिलाता है कि तकनीक का सार मानव बुद्धि, आकांक्षा और मूल्यों में निहित है—अतः उसके केंद्र में मानव हित ही होना चाहिए।

AI Impact Summit : निष्कर्ष

अंततः, यह सम्मेलन हमारे समय का दर्पण है। एआई का भविष्य तयशुदा नहीं; वह हमारी नीतियों, निर्णयों और नैतिक प्राथमिकताओं से आकार लेगा। यह युग भय का स्रोत बनेगा या सृजन का माध्यम—उत्तर मशीनों में नहीं, हमारी सामाजिक चेतना में छिपा है। भारत में यह आयोजन इसलिए एक तकनीकी घटना से बढ़कर है बल्कि यह बदलती सभ्यता का संकेत है। भारत के लिए यह क्षण मेजबानी से आगे, नेतृत्व का आह्वान है: ऐसा नेतृत्व जो तकनीकी प्रगति को मानवीय

संवेदना और सामाजिक न्याय से जोड़ सके। यदि यह समिट उस दिशा में सार्थक कदम सिद्ध हुई, तो यह केवल सम्मेलन नहीं, इतिहास की स्मरणीय पंक्ति बनेगी।

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