Artificial Intelligence Impact on Children: मोबाइल क्रांति से एआई युग तक
इस सदी में जिस तकनीकी उत्पाद ने अभूतपूर्व विकास किया है, वह है मोबाइल फोन। भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल फोन उत्पादक होने के साथ-साथ सबसे अधिक उपयोगकर्ताओं वाला देश भी है। सस्ते स्मार्टफोन और दुनिया की तीसरी सबसे सस्ती इंटरनेट सेवा ने घर-घर में मोबाइल पहुंचा दिया है।
लेकिन Artificial Intelligence Impact on Children का असली सवाल यहीं से शुरू होता है। नन्हे बच्चे, जो कभी खिलौनों से खेलते थे, आज स्मार्टफोन से चिपके रहते हैं। कई माता-पिता बच्चों को व्यस्त रखने या उनसे पीछा छुड़ाने के लिए उनके हाथ में मोबाइल थमा देते हैं।
लाखों बच्चे ऐसे हैं जो बिना फोन देखे खाना नहीं खाते, न खेलते हैं, न हंसते हैं। वे वर्चुअल दुनिया से इस कदर जुड़ चुके हैं कि वास्तविक जीवन से उनका जुड़ाव कम होता जा रहा है।
एआई की धमाकेदार एंट्री और बच्चों पर प्रभाव

Artificial Intelligence Impact on Children तब और गहरा हो गया जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई ने शिक्षा और मनोरंजन की दुनिया में तेजी से प्रवेश किया।
एआई एक ऐसी आधुनिक तकनीक है जो तत्काल परिणाम देती है। यह पलक झपकते सवालों के जवाब दे सकती है, लेख लिख सकती है, ड्राइंग बना सकती है और लगभग वह सब कुछ कर सकती है जो एक बच्चा चाहता है।
यहीं पर गंभीर समस्या पैदा हो सकती है। बच्चा कैसे तय करेगा कि क्या सही है और क्या गलत? क्या वह हर जानकारी को सत्य मानेगा?
इंटरनेट ने बच्चों को उम्र से पहले परिपक्व बनाना शुरू कर दिया था, अब एआई उन्हें उस स्तर तक पहुंचा सकता है जिसके बारे में पहले कल्पना भी नहीं की गई थी।
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फिक्की-यूनिसेफ कार्यशाला में चेतावनी
हाल ही में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन के दौरान फिक्की-यूनिसेफ की संयुक्त कार्यशाला में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार Ajay Sood ने कहा कि भारत में डिजिटल पैठ तेजी से बढ़ रही है और बच्चे एआई संचालित प्लेटफॉर्म्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि एक समग्र और सशक्त फ्रेमवर्क तैयार करना जरूरी है, ताकि बच्चों का संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सके।
Artificial Intelligence Impact on Children को समझने के लिए यह देखना होगा कि बच्चे किस प्रकार की सूचना पाना चाहते हैं और एआई उपयोग के बाद उनका व्यवहार कैसा बदलता है।
इसमें अभिभावकों, स्कूलों और शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
एआई: दोधारी तलवार क्यों?
Artificial Intelligence Impact on Children को दोधारी तलवार इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह जहां विकास में सहयोगी हो सकता है, वहीं नुकसान भी पहुंचा सकता है।
जरूरी है कि एआई के जोखिमों को समझा जाए और उसकी धार को संतुलित किया जाए।
अगर बच्चे एआई पर अत्यधिक निर्भर हो जाएंगे, तो उनकी स्वतंत्र सोचने की क्षमता और सरल बुद्धिमत्ता कमजोर पड़ सकती है।
इसलिए यह तय करना आवश्यक है कि बच्चों की एआई तक पहुंच कितनी हो और उसे किस प्रकार नियंत्रित किया जाए।
सरकार और विशेषज्ञों की पहल
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी सचिव S Krishnan ने एआई इंपैक्ट समिट के दौरान कहा कि एआई को भय की दृष्टि से नहीं बल्कि अवसर के रूप में देखना चाहिए।
समिट का उद्देश्य था कि मानव जाति, पृथ्वी और विकास के लिए एआई का सकारात्मक उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
Artificial Intelligence Impact on Children को ध्यान में रखते हुए यह जरूरी है कि शासन एक ऐसा तंत्र विकसित करे जो बच्चों को अवसर दे, लेकिन सुरक्षा भी सुनिश्चित करे।
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शिक्षा, स्वास्थ्य और एडटेक में एआई का विस्तार
एआई अब शिक्षा, स्वास्थ्य और खेलकूद जैसे क्षेत्रों में तेजी से प्रवेश कर चुका है। भारत का एडटेक उद्योग एआई की मदद से आधुनिक शिक्षा प्रदान कर रहा है।
Artificial Intelligence Impact on Children के तहत बच्चों की परफॉर्मेंस, सीखने के पैटर्न और सोचने के तरीके में बदलाव आ रहा है।
लेकिन हर देश की परंपराएं और संस्कार अलग हैं। ऐसे में बच्चों को सही मार्गदर्शन देना बेहद जरूरी है ताकि वे गलत दिशा में न जाएं।
54,000 बच्चों की वैश्विक रिपोर्ट का संदेश
दुनिया के 184 देशों के 54,000 बच्चों और किशोरों पर आधारित एक सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई डिजाइनिंग, उपयोग और संचालन में बच्चों को केंद्र में रखा जाना चाहिए।
Artificial Intelligence Impact on Children को सुरक्षित बनाने के लिए यह जरूरी है कि तेजी से विकसित हो रहे एआई टूल्स को नियंत्रित किया जाए।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सरकारें एआई मॉनिटरिंग संगठनों को मजबूत करें और उनमें ऐसे विशेषज्ञ हों जो बच्चों के अधिकार, शिक्षा और डेटा सुरक्षा को समझते हों।
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