फरवरी 2026 में हुए बांग्लादेश के संसदीय चुनावों ने दक्षिण एशियाई राजनीति का पूरा समीकरण बदल दिया है। लंबे राजनीतिक उथल-पुथल, छात्र आंदोलनों और सत्ता विरोधी लहर के बीच हुए इस चुनाव में विपक्षी दल Bangladesh Nationalist Party (बीएनपी) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल किया। 300 सदस्यीय संसद में पार्टी ने लगभग 151 से 209 सीटें जीतकर सत्ता पर मजबूत दावा ठोक दिया।
यह जनादेश केवल सरकार परिवर्तन नहीं, बल्कि बांग्लादेश की विदेश नीति, भारत के साथ संबंधों और क्षेत्रीय भू-राजनीति में संभावित बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है।
Bangladesh Election 2026: Bangladesh Nationalist Party की जीत और सत्ता समीकरण में बड़ा बदलाव
बीएनपी की यह जीत इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यह अपदस्थ प्रधानमंत्री Sheikh Hasina और उनकी पार्टी Awami League के राजनीतिक पतन के बाद पहला बड़ा चुनाव था। 2024 के छात्र-आंदोलन से उपजी सत्ता विरोधी लहर ने अवामी लीग के लंबे शासन को गंभीर चुनौती दी थी, जिसका असर चुनाव परिणामों में साफ दिखा।
बीएनपी ने अपने अभियान में जिन मुद्दों को प्रमुखता दी, वे जनता के बीच असरदार साबित हुए:
• गरीबी उन्मूलन
• भ्रष्टाचार पर सख्ती
• विदेशी निवेश बढ़ाने का वादा
• प्रशासनिक सुधार
• लोकतांत्रिक संस्थाओं की बहाली
इन वादों ने खासकर शहरी मध्यम वर्ग और युवा मतदाताओं को पार्टी के पक्ष में लामबंद किया।
चुनाव में Jamaat-e-Islami को अपेक्षाकृत कम सीटें मिलीं, जिससे यह भी संकेत गया कि जनादेश का केंद्र बीएनपी ही रही।
यह भी पढ़ें : https://livebihar.com/bihar-cricket-association-samman-samaroh-2026-patna/
Bangladesh Election 2026: Tarique Rahman का उदय और भारत-बांग्लादेश रिश्तों की नई दिशा
बीएनपी की जीत के साथ सबसे बड़ा राजनीतिक उभार पार्टी के शीर्ष नेता Tarique Rahman का माना जा रहा है, जो संभावित प्रधानमंत्री के रूप में देखे जा रहे हैं। उनकी राजनीतिक छवि को उनकी मां और पूर्व प्रधानमंत्री Khaleda Zia की विरासत का विस्तार माना जा रहा है।
तारिक रहमान ने हालिया भाषणों में संयमित और संतुलित विदेश नीति के संकेत दिए हैं। उन्होंने “Bangladesh First” का नारा देते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी सरकार न तो भारत विरोधी होगी और न ही किसी अन्य शक्ति के प्रभाव में चलेगी।
Do Follow us : https://www.facebook.com/share/1CWTaAHLaw/?mibextid=wwXIfr
भारत के लिए सियासी और रणनीतिक मायने
बीएनपी की जीत का भारत पर बहुस्तरीय प्रभाव पड़ सकता है।
- सीमा सुरक्षा और पूर्वोत्तर स्थिरता
भारत को आशंका है कि यदि पाकिस्तान या कट्टरपंथी समूहों के साथ समीकरण मजबूत होते हैं तो पूर्वोत्तर राज्यों में सुरक्षा चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं।
- चरमपंथ और अल्पसंख्यक सुरक्षा
भारत की प्रमुख चिंता बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर रहती है। हालांकि तारिक रहमान ने अपने भाषणों में कानून का राज और अल्पसंख्यक सुरक्षा का आश्वासन दिया है।
- हसीना प्रत्यर्पण विवाद
सबसे बड़ा कूटनीतिक तनाव का मुद्दा शेख हसीना का प्रत्यर्पण हो सकता है, क्योंकि बीएनपी उनकी वापसी की मांग उठा रही है जबकि भारत उन्हें शरण दिए हुए है।
विदेश नीति: संतुलन या झुकाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि नई सरकार “संतुलित विदेश नीति” अपनाने की कोशिश करेगी, लेकिन कुछ संभावित बदलाव दिख सकते हैं:
• चीन निवेश में वृद्धि
• पाकिस्तान से कूटनीतिक संपर्क
• क्षेत्रीय व्यापार ब्लॉक्स में पुनर्संतुलन
रिपोर्ट्स के अनुसार चीन पहले ही अरबों डॉलर के निवेश प्रस्तावों पर काम कर रहा है, जिससे दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है।
जल बंटवारा और सीमा विवाद
नई सरकार पुराने लंबित मुद्दों को फिर उठा सकती है:
• तीस्ता जल बंटवारा
• सीमा हत्याएँ (जैसे फेलानी प्रकरण)
• अवैध आव्रजन
• सीमा व्यापार
इन मुद्दों पर कड़ा रुख भारत-बांग्लादेश वार्ता को जटिल बना सकता है।
संबंध सुधार के संकेत भी मौजूद
हालांकि तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। चुनाव से पहले दोनों पक्षों में बैक-चैनल कूटनीति तेज हुई थी।
• भारतीय विदेश मंत्री S. Jaishankar और तारिक रहमान के बीच संवाद
• भारतीय उच्चायुक्त Pranay Verma की बीएनपी नेताओं से मुलाकात
• सुरक्षा हितों के सम्मान का आश्वासन
यह संकेत देते हैं कि व्यावहारिक जरूरतें दोनों देशों को सहयोग की राह पर बनाए रख सकती हैं।
भाषणों में बदला लहजा
ढाका वापसी (25 दिसंबर 2025) के बाद अपने शुरुआती भाषणों में तारिक रहमान ने:
• भारत का सीधा उल्लेख नहीं किया
• अल्पसंख्यक सुरक्षा पर जोर दिया
• हिंसा विरोध और कानून व्यवस्था की बात की
• समावेशी राष्ट्रवाद का संदेश दिया
खुफिया और कूटनीतिक विश्लेषकों ने इसे “India-Neutral” रुख बताया है, जो 2001-06 के तनावपूर्ण दौर से अलग माना जा रहा है।
बांग्लादेश चुनाव 2026 का जनादेश केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि दक्षिण एशियाई भू-राजनीति के पुनर्संतुलन का संकेत है। बीएनपी की जीत से जहां राजनीतिक स्थिरता की उम्मीद जगी है, वहीं भारत के लिए नई कूटनीतिक चुनौतियाँ भी सामने आई हैं।
तारिक रहमान का संयमित रुख, समानता-आधारित संबंधों की बात और अल्पसंख्यक सुरक्षा के आश्वासन सकारात्मक संकेत जरूर देते हैं, लेकिन हसीना प्रत्यर्पण, चीन-पाक समीकरण और सीमा मुद्दे भविष्य की दिशा तय करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐतिहासिक अविश्वास खत्म होने में समय लगेगा, पर व्यावहारिक हित अंततः दोनों देशों को सहयोग की राह पर बनाए रखेंगे।
Do Follow us : https://www.youtube.com/results?search_query=livebihar

