बांग्लादेश की राजनीति ने 12 फरवरी को एक ऐतिहासिक मोड़ ले लिया, जब देश में शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद पहला संसदीय चुनाव संपन्न हुआ। यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि उस राजनीतिक युग के अंत और नए शक्ति संतुलन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जिसने दशकों तक बांग्लादेश की राजनीति को आकार दिया था।
- Bangladesh Election 2026: बीएनपी बनाम जमात — सत्ता के लिए सीधी टक्कर
- Bangladesh Election 2026: बीएनपी का अनुभव बनाम जमात का वैचारिक मॉडल
- Bangladesh Election 2026: जमात-ए-इस्लामी और शफीक उर रहमान का उभार
- Bangladesh Election 2026: छात्र राजनीति और नई ताकत का प्रवेश
- Bangladesh Election 2026: ऐतिहासिक विवाद और जमात का अतीत
- Bangladesh Election 2026: भारत-बांग्लादेश संबंधों पर संभावित असर
- Bangladesh Election 2026: जनमत संग्रह और संवैधानिक बदलाव
शेख हसीना के देश छोड़ने और उनकी पार्टी आवामी लीग के प्रतिबंधित होने के बाद राजनीतिक मैदान लगभग खाली हो गया था। ऐसे में मुख्य मुकाबला दो पुरानी लेकिन वैचारिक रूप से भिन्न ताकतों — बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी — के बीच सिमट गया।
Bangladesh Election 2026: बीएनपी बनाम जमात — सत्ता के लिए सीधी टक्कर
इस चुनाव में कुल 51 राजनीतिक दल मैदान में थे, लेकिन असली संघर्ष बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी गठबंधनों के बीच रहा। 300 संसदीय सीटों पर लगभग 2000 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई।
बीएनपी की कमान तारिक रहमान के हाथों में है, जो उस राजनीतिक परिवार से आते हैं जिसने दशकों तक बांग्लादेश की सत्ता पर गहरी पकड़ बनाए रखी। उनके माता-पिता — जिया उर रहमान और खालिदा जिया — दोनों देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं।
दूसरी ओर जमात-ए-इस्लामी की अगुवाई 67 वर्षीय डॉ. शफीक उर रहमान कर रहे हैं, जिनकी राजनीति पारंपरिक सत्ता मॉडल से अलग मानी जा रही है।
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Bangladesh Election 2026: बीएनपी का अनुभव बनाम जमात का वैचारिक मॉडल

बीएनपी का चुनावी अभियान अपेक्षाकृत सीधा और कल्याणकारी वादों पर आधारित रहा। प्रमुख वादों में शामिल हैं:
• गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता
• कोई भी नेता 10 वर्ष से अधिक प्रधानमंत्री न रहे
• विदेशी निवेश लाकर अर्थव्यवस्था सुधारना
• भ्रष्टाचार पर सख्ती
तारिक रहमान लगातार अपनी रैलियों में पारिवारिक राजनीतिक विरासत का उल्लेख करते रहे। उनका कहना रहा कि देश चलाने का वास्तविक अनुभव केवल उनकी पार्टी के पास है।
Bangladesh Election 2026: जमात-ए-इस्लामी और शफीक उर रहमान का उभार
जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामिस्ट पार्टी मानी जाती है। इसके नेता डॉ. शफीक उर रहमान पेशे से सरकारी डॉक्टर रह चुके हैं। 2019 में वे पार्टी प्रमुख बने, उस समय पार्टी पर प्रतिबंध था।
दिसंबर 2022 में उन्हें आतंकवाद से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार किया गया था और 15 महीने बाद जमानत मिली। मार्च 2025 में अंतरिम सरकार बनने के बाद केस से उनका नाम हटा दिया गया।
उनकी रैलियाँ और भाषण लगातार सुर्खियों में रहे। ढाका की एक बड़ी रैली में वे मंच पर दो बार बेहोश हो गए, लेकिन डॉक्टरों की सलाह के बावजूद भाषण पूरा किया — इससे समर्थकों में उनकी छवि और मजबूत हुई।
Bangladesh Election 2026: महिला प्रतिनिधित्व पर विवाद
जमात-ए-इस्लामी ने इस चुनाव में एक भी महिला उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया। इस निर्णय से देश का प्रगतिशील और उदार वर्ग असहज दिखा।
महिला प्रतिनिधित्व की कमी को लेकर सामाजिक संगठनों और विश्लेषकों ने सवाल उठाए, खासकर ऐसे समय में जब बांग्लादेश महिला नेतृत्व (शेख हसीना, खालिदा जिया) के लंबे इतिहास से गुजरा है।
Bangladesh Election 2026: छात्र राजनीति और नई ताकत का प्रवेश
जमात के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन में नेशनल सिटिजन पार्टी भी शामिल है। यह पार्टी छात्र आंदोलनों से उभरी, जिन्होंने शेख हसीना विरोधी प्रदर्शनों में बड़ी भूमिका निभाई थी।
युवा मतदाताओं का झुकाव इस गठबंधन की ओर देखा जा रहा है, जिससे चुनावी समीकरण और रोचक हो गए।
Bangladesh Election 2026: ऐतिहासिक विवाद और जमात का अतीत
जमात-ए-इस्लामी का अतीत विवादों से भरा रहा है:
• 1971 के मुक्ति संग्राम का विरोध
• कई नेताओं को युद्ध अपराध मामलों में सजा
• 2013 में पार्टी पर प्रतिबंध
लेकिन 2024 के राजनीतिक बदलावों के बाद पार्टी ने पुनः सक्रिय राजनीति में वापसी की — और अब सत्ता की दावेदार है।
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Bangladesh Election 2026: भारत-बांग्लादेश संबंधों पर संभावित असर
चुनाव परिणाम भारत के लिए भी रणनीतिक महत्व रखते हैं।
• बीएनपी शासनकाल में भारत से रिश्ते उतने सहज नहीं रहे
• तारिक रहमान ने ‘समावेशी बांग्लादेश’ का संदेश दिया
• लेकिन तीस्ता जल बंटवारे जैसे मुद्दों पर आक्रामक रुख संकेतित
वहीं जमात प्रमुख ने भारत पर सांकेतिक नरमी दिखाई है, जिससे कूटनीतिक संभावनाएँ खुली हैं।
भारत पहले ही सभी पक्षों से संपर्क बनाए हुए है, क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा, अल्पसंख्यक हालात और पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकी जैसे मुद्दे चिंता का कारण हैं।
Bangladesh Election 2026: जनमत संग्रह और संवैधानिक बदलाव
इस चुनाव के साथ जनमत संग्रह भी कराया गया, जिसमें मतदाताओं से संवैधानिक सुधारों पर ‘हाँ’ या ‘ना’ में राय मांगी गई।
प्रस्तावित सुधार:
• संसद का उच्च सदन (100 सदस्य)
• प्रधानमंत्री के लिए 2 कार्यकाल सीमा
• तटस्थ सरकार के तहत चुनाव
• सुप्रीम कोर्ट जज नियुक्ति में पारदर्शिता
• भ्रष्टाचार विरोधी आयोग
यदि पारित हुआ, तो नई संसद संविधान सभा की तरह काम करेगी।
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