Bangladesh Textile Crisis India Yarn: भारत के सस्ते धागे में उलझा बांग्लादेश, कपड़ा उद्योग पर मंडराया बंदी का खतरा

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  • 1 फरवरी से स्पिनिंग मिलें बंद होने की चेतावनी • भारतीय यार्न पर 78% निर्भरता • 10 लाख नौकरियां खतरे में • गैस संकट और नीतिगत विफलता • भारत की खामोशी का असर

लेखकःअशोक भाटिया

भारत के खिलाफ लगातार ज़हर उगल रही बांग्लादेश की यूनुस सरकार को शायद यह अंदाज़ा नहीं था कि बिना किसी कड़े बयान, बिना किसी औपचारिक प्रतिबंध और बिना कोई सीधा कदम उठाए भारत की आर्थिक ताकत उसके सबसे बड़े उद्योग की कमर तोड़ सकती है। नई दिल्ली की चुप्पी के बीच बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग आज जिस संकट के मुहाने पर खड़ा है, वह उसकी अपनी नीतिगत भूलों और भारत पर बढ़ती निर्भरता का नतीजा बन चुका है।जिस कपड़ा उद्योग के दम पर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था सांस लेती थी, वही उद्योग अब अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है।

Bangladesh Textile Crisis India Yarn और बंद होती स्पिनिंग मिलें

बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जनवरी के अंत तक यार्न के ड्यूटी-फ्री आयात की सुविधा बहाल नहीं हुई, तो 1 फरवरी से देशभर की सभी स्पिनिंग यूनिट्स उत्पादन बंद कर देंगी।यह चेतावनी केवल एक संगठनात्मक बयान नहीं, बल्कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर अलार्म है।

राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड ने वाणिज्य मंत्रालय की सिफारिश पर बॉन्डेड वेयरहाउस सिस्टम के तहत यार्न के ड्यूटी-फ्री आयात को निलंबित कर दिया है। सरकार का दावा है कि सस्ते आयात ने घरेलू मिलों को तबाह कर दिया, लेकिन यही फैसला अब पूरे कपड़ा सेक्टर को ठप करने की कगार पर ले आया है।

Bangladesh Textile Crisis India Yarn में भारत की भूमिका

बांग्लादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेडीमेड गारमेंट निर्यातक है। जारा और एचएनएम जैसे वैश्विक ब्रांड्स के कपड़े वहीं बनते हैं। हर साल करीब 47 अरब डॉलर के कपड़े बांग्लादेश से दुनिया भर में निर्यात होते हैं।

लेकिन इस विशाल उद्योग की नींव भारत से आने वाले सस्ते और उच्च गुणवत्ता वाले यार्न पर टिकी है।साल 2025 में बांग्लादेश ने करीब 70 करोड़ किलोग्राम यार्न आयात किया, जिसमें से 78 प्रतिशत यानी लगभग 2 अरब डॉलर का यार्न केवल भारत से आया। भारतीय यार्न न सिर्फ गुणवत्ता में बेहतर है, बल्कि स्थानीय यार्न से 3 से 5 प्रतिशत सस्ता भी पड़ता है।

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बॉन्डेड वेयरहाउस सिस्टम बना अभिशाप

बॉन्डेड वेयरहाउस सिस्टम के तहत यार्न आयात पर कोई शुल्क नहीं लगता था। इसी सुविधा ने बांग्लादेश को भारतीय यार्न का आदी बना दिया।नतीजा यह हुआ कि स्थानीय मिलों के पास करीब 12,000 करोड़ टका का यार्न स्टॉक जमा हो गया, जिसे खरीदने वाला कोई नहीं है। इस संकट के चलते अब तक 50 से ज्यादा स्पिनिंग मिलें बंद हो चुकी हैं और उत्पादन क्षमता 50 प्रतिशत तक गिर गई है।

गैस संकट और नीतिगत अनिश्चितता ने बढ़ाई तबाही

पिछले 3-4 महीनों से बांग्लादेश गंभीर गैस संकट से जूझ रहा है। अनियमित आपूर्ति और ऊंची कीमतों के कारण कई मिलों को आधी क्षमता पर काम करना पड़ रहा है।इससे उद्योग को करीब 2 अरब डॉलर का सीधा नुकसान हुआ है। मिल मालिक सब्सिडी, सस्ती गैस और आर्थिक पैकेज की मांग कर रहे हैं, लेकिन अंतरिम सरकार की ओर से कोई ठोस राहत नहीं मिली।

Bangladesh Textile Crisis India Yarn और रोजगार पर खतरा

बीटीएमए चेयरमैन सलीम रहमान के अनुसार, भारतीय यार्न से बाजार पूरी तरह डंप हो चुका है।अब तक हजारों लोग बेरोजगार हो चुके हैं और अगर 1 फरवरी से उत्पादन बंद हुआ, तो करीब 10 लाख नौकरियां सीधे खतरे में पड़ जाएंगी।यह संकट केवल उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक अशांति और आर्थिक मंदी को भी जन्म दे सकता है।

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मिलर्स बनाम गारमेंट निर्यातक

इस पूरे घटनाक्रम ने बांग्लादेश में मिलर्स और गारमेंट निर्यातकों के बीच टकराव बढ़ा दिया है।मिलर्स का दावा है कि घरेलू उद्योग पूरी मांग पूरी कर सकता है, जबकि गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स का कहना है कि स्थानीय 10-30 काउंट कॉटन यार्न महंगा और गुणवत्ता में कमजोर है।गारमेंट उद्योग को डर है कि आयात पर रोक से लागत बढ़ेगी, डिलीवरी में देरी होगी और वैश्विक ऑर्डर्स छिन सकते हैं।

भारत की खामोशी और बांग्लादेश की रणनीतिक भूल

दिलचस्प बात यह है कि भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर न कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी, न कोई आक्रामक कदम उठाया।इसके बावजूद, भारत की मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और सस्ती उत्पादन क्षमता ने बांग्लादेश की कमजोर नीतियों को बेनकाब कर दिया।एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भारत के सस्ते धागों के जाल में उलझकर बांग्लादेश कब बर्बादी के मुहाने पर पहुंच गया, उसे खुद भी इसका अंदाज़ा नहीं हुआ।

1 फरवरी के बाद क्या होगा?

अगर स्पिनिंग मिलें बंद होती हैं, तो बांग्लादेश का 80 प्रतिशत निर्यात और करीब 40 लाख लोगों की रोज़ी-रोटी सीधे प्रभावित होगी।यह संकट बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के लिए सबसे बड़ी परीक्षा बन चुका है।

संदेश साफ है

भारत के खिलाफ बयानबाज़ी और पाकिस्तान के सहारे की उम्मीद बांग्लादेश को महंगी पड़ती दिख रही है।दिल्ली की बंद सड़कों की तरह, भारत की खामोशी भी आज एक सख़्त संदेश दे रही है — आर्थिक ताकत अब सबसे बड़ा हथियार है।

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