Basant Panchami in Deoghar: बाबा बैद्यनाथ को बसंत पंचमी पर मिथिलांचल के लोगों द्वारा चिलक चढ़ाने की है परंपरा, तैयारियां शुरू

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बाबा बैद्यनाथ को बसंत पंचमी पर मिथिलांचल के लोगों द्वारा चिलक चढ़ाने की है परंपरा
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  • .Basant Panchami in Deoghar: बसंत पंचमी पर मिथिलांचल के लोग भोलेनाथ को चढ़ाते हैं तिलक . Basant Panchami in Devghar: बाबा बैद्यनाथ को तिलक चढ़ाने की मिथिला की है परंपरा . Basant Panchami in Deoghar: तिलक होते ही मिथिलांचल में हो जाता है होली का शुभारंभ . Basant Panchami in Deoghar: देवघर में अभी से उड़ने लगे अबीर गुलाल . Basant Panchami in Deoghar: बसंत पंचमी पर वीआईपी दर्शन पर रोक

देवघर में महाशिवरात्रि की तैयारियां शुरू हो गई हैं। द्वादश ज्योतिर्लिगों में शामिल बाबा  बैद्यनाथ धाम भगवान भोलेनाथ की भक्ति में लीन है। देवघर के बाबा बैद्यनाथ को बसंत पंचमी के मौके पर  मिथिलांचल के लोग तिलक चढ़ाएंगे। सलामी जल अर्पित करेंगे और विशेष पूजा करेंगे।

Basant Panchami in Deoghar: बसंत पंचमी पर मिथिलांचल के लोग भोलेनाथ को चढ़ाते हैं तिलक

महाशिवरात्रि से पहले बैद्यनाथ धाम में भक्तों की भीड़ जुटने लगी है। बहुत पुरानी परंपरा है कि बसंत पंचमी के दिन बाबा का तिलकोत्सव होता है। खास बात है कि मिथिलांचल के लोग भगवान भोलेनाथ को तिलक चढ़ाते हैं। इसके लिए मिथिलांचल से हजारों तिलकहरू देवघर पहुंच चुके हैं। बाबा के तिलक और सलामी जल अर्पण की सदियों पुरानी परंपरा को निभाने के लिए हजारों श्रद्धालुओं बाबाधाम की चल पड़े हैं।

Basant Panchami in Devghar: बाबा बैद्यनाथ को तिलक चढ़ाने की मिथिला की है परंपरा

Basant Panchami in Deoghar: बाबा बैद्यनाथ को बसंत पंचमी पर मिथिलांचल के लोगों द्वारा चिलक चढ़ाने की है परंपरा, तैयारियां शुरू 1

बसंत पंचमी पर बाबा बैद्यनाथ का तिलक करने की परंपरा मिथिला क्षेत्र में पीढ़ियों से चली आ रही है। समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी समेत मिथिलांचल के गांवों से तिलकहरू पैदल यात्रा करते हुए पहले सुल्तानगंज पहुंचते हैं। वहां से गंगाजल भरकर करीब 100 से 105 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा कर देवघर आते हैं। कांवर, पारंपरिक वेशभूषा और भक्ति भाव के साथ पहुंचे तिलकहरू बाबा को महाशिवरात्रि के विवाह का आमंत्रण देने आए हैं। बाबा नगरी में बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा माहौल भक्तिमय बना हुआ है।

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Basant Panchami in Deoghar: तिलक होते ही मिथिलांचल में हो जाता है होली का शुभारंभ

बसंत पंचमी के दिन भगवान को अबीर गुलाल चढ़ाने की परंपरा है। प्राचीन समय से ही श्रद्धालु भक्ति भाव से भगवान भोले शंकर के विवाह से पहले तैयारियां शुरू कर देते हैं। बाबाधाम पहुंचने पर पहले दिन बाबा को ‘पहला जल’ और दूसरे दिन ‘सलामी जल’ अर्पित किया जाता है। इसके साथ धान की बाली, आम का मंजर और शुद्ध घी चढ़ाने की भी अनोखी परंपरा है। मान्यता है कि बाबा का तिलक होते ही मिथिलांचल में होली का शुभारंभ हो जाता है। तिलक के बाद श्रद्धालु एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर खुशियां मनाते हैं।

Basant Panchami in Deoghar: देवघर में अभी से उड़ने लगे अबीर गुलाल

बताते चलें कि बड़ी संख्या में मिथिलांचल के लोग बाबा नगरी पहुंच गए हैं। आने वालों का तांता अभी भी लगा हुआ है।  देवघर पूरी तरह उत्सव के रंग में डूबा हुआ है। प्रशासनिक भवन परिसर और आसपास के इलाकों में विभिन्न जत्थों द्वारा भजन-कीर्तन हो रहा है। पारंपरिक लोकगीतों और शिव भजनों से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। भगवान भोले नाथ को तिलक चढ़ाने के साथ ही बाबा के दरबार में अबीर-गुलाल अर्पित कर लोग आपस में होली खेलने लगेगें।

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श्रद्धालुओं का कहना है कि यह यात्रा केवल आस्था नहीं, बल्कि पूर्वजों की परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम है। बसंत पंचमी पर पूजा-अर्चना और तिलक के बाद तिलकहरू अपने-अपने गांवों की ओर लौटेंगे, लेकिन बाबा नगरी में आस्था और भक्ति की यह गूंज लंबे समय तक बनी रहेगी।

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Basant Panchami in Deoghar: बसंत पंचमी पर वीआईपी दर्शन पर रोक

बाबा बैद्यनाथ धाम में भगवान भोले शंकर को तिलक चढ़ाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। जिला प्रशासन ने भी इस महान परंपरा को निभाने के लिए खास तैयारी की है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रशासन ने इस बार कड़े फैसले लिए हैं। जिला प्रशासन के  निर्देश पर बसंत पंचमी के दिन वीआईपी और आउट ऑफ टर्न दर्शन पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन का कहना है कि इस दिन सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर दिया जाएगा, ताकि सामान्य कतार में खड़े भक्तों को बिना किसी भेदभाव के सुगम दर्शन मिल सके। हालांकि 600 रुपए शुल्क वाला शीघ्र दर्शनम् विकल्प सीमित संख्या में उपलब्ध रहेगा, जिससे व्यवस्था प्रभावित न हो। प्रशासन ने साफ किया है कि भीड़ प्रबंधन में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

जिला प्रशासन को अनुमान है कि बसंत पंचमी के दिन लाखों श्रद्धालुओं बाबा नगरी दर्शन के लिए पहुंचेंगे। इसको देखते हुए मंदिर का पट अहले सुबह सुबह 3:05 बजे खोलने का निर्णय लिया गया है। इससे जलार्पण की प्रक्रिया सुबह से ही सुचारू रूप से शुरू हो सकेगी। सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। मानसरोवर से लेकर ओवरब्रिज तक विशेष बैरिकेडिंग, कतार प्रबंधन और कूपन व्यवस्था लागू की गई है। सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था या भगदड़ की स्थिति न बने।

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