बिहार में बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य में 1 अप्रैल 2026 से बिजली दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। बिजली कंपनियों ने घाटे और वर्षों पुराने बकाये की भरपाई के लिए नई टैरिफ याचिका दाखिल की है, जिसमें प्रति यूनिट 35 पैसे तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है।
- Bihar Electricity Bill: 35 पैसे प्रति यूनिट बढ़ाने का प्रस्ताव क्यों?
- Bihar Electricity Bill: मार्च में नई दरों का ऐलान, 1 अप्रैल से लागू होने की तैयारी
- Bihar Electricity Bill: 2012 से जुड़ा है हजारों करोड़ का बकाया विवाद
- Bihar Electricity Bill: 2015 में खारिज हुई मांग, फिर एप्टेल पहुंचा मामला
- Bihar Electricity Bill: ब्याज जोड़ते ही बकाया पहुंचा 5000 करोड़ के पार
- Bihar Electricity Bill: उपभोक्ताओं पर कितना पड़ेगा असर?
- Bihar Electricity Bill: 125 यूनिट फ्री बिजली योजना पर क्या असर?
- Bihar Electricity Bill: अब आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी निगाहें
राज्य सरकार जहां 125 यूनिट फ्री बिजली योजना के जरिए राहत देने का दावा कर रही है, वहीं संभावित दर वृद्धि की खबर ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। अगर प्रस्ताव मंजूर होता है तो घरेलू से लेकर व्यावसायिक उपभोक्ताओं तक सभी की जेब पर असर पड़ सकता है।
Bihar Electricity Bill: 35 पैसे प्रति यूनिट बढ़ाने का प्रस्ताव क्यों?
बिजली कंपनियों का कहना है कि उन्हें भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है। टैरिफ पिटीशन में कंपनियों ने तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक के पुराने बकाये को शामिल किया है।
इसी बकाये की भरपाई के लिए सभी श्रेणियों की बिजली दरों में 35 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकार मानते हैं कि यदि आयोग कंपनियों की दलीलों को स्वीकार करता है तो दर वृद्धि लगभग तय मानी जाएगी।
Bihar Electricity Bill: मार्च में नई दरों का ऐलान, 1 अप्रैल से लागू होने की तैयारी
टैरिफ याचिका पर जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब अंतिम फैसला बिहार विद्युत विनियामक आयोग को लेना है।
सूत्रों के अनुसार आयोग मार्च 2026 के दूसरे सप्ताह में नई दरों की घोषणा कर सकता है। प्रस्तावित नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होकर 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेंगी।
फिलहाल आयोग कंपनियों द्वारा सौंपे गए वित्तीय दस्तावेजों और बकाया दावों का विस्तृत अध्ययन कर रहा है।
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Bihar Electricity Bill: 2012 से जुड़ा है हजारों करोड़ का बकाया विवाद

दर वृद्धि प्रस्ताव की जड़ वर्ष 2012 में हुए बिजली बोर्ड पुनर्गठन से जुड़ी है। उसी समय अलग-अलग बिजली कंपनियों का गठन किया गया था।
पुनर्गठन के दौरान एसेट और लायबिलिटी को लेकर करीब 1100 करोड़ रुपये का मामला सामने आया था। उस समय यह तय हुआ था कि बोर्ड के सभी पुराने दायित्वों का भुगतान राज्य सरकार करेगी, लेकिन कंपनियों को यह राशि प्राप्त नहीं हो सकी।
Bihar Electricity Bill: 2015 में खारिज हुई मांग, फिर एप्टेल पहुंचा मामला
वर्ष 2015 में कंपनियों ने टैरिफ पिटीशन के जरिए इस बकाये की मांग उठाई थी, लेकिन विनियामक आयोग ने इसे खारिज कर दिया था। आयोग ने कंपनियों को राज्य सरकार से राशि मांगने को कहा था।
इसके बाद मामला विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एप्टेल) पहुंचा, जहां सुनवाई के बाद आयोग का फैसला पलट दिया गया। न्यायाधिकरण ने कंपनियों के पक्ष में निर्णय देते हुए मूल राशि के साथ ब्याज देने का आदेश दिया।
Bihar Electricity Bill: ब्याज जोड़ते ही बकाया पहुंचा 5000 करोड़ के पार
एप्टेल के आदेश के बाद बकाया राशि पर ब्याज जुड़ता गया और कुल दावा बढ़कर पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया।
अब कंपनियों ने दोबारा टैरिफ पिटीशन में तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि को शामिल कर लिया है, जिससे दर वृद्धि का रास्ता और मजबूत माना जा रहा है।
Bihar Electricity Bill: उपभोक्ताओं पर कितना पड़ेगा असर?
यदि 35 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी लागू होती है तो—
• घरेलू उपभोक्ताओं का मासिक बिल बढ़ेगा
• व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की लागत बढ़ेगी
• छोटे उद्योगों के संचालन खर्च में इजाफा होगा
• अधिक खपत करने वाले उपभोक्ताओं पर ज्यादा बोझ पड़ेगा
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि वितरण कंपनियां फिलहाल मुनाफे में हैं, इसलिए वृद्धि का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा।
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Bihar Electricity Bill: 125 यूनिट फ्री बिजली योजना पर क्या असर?
राज्य सरकार की 125 यूनिट फ्री बिजली योजना जारी रहने की संभावना है। लेकिन बढ़ी हुई दरें फ्री यूनिट से ऊपर की खपत पर लागू होंगी।
यानी सीमित खपत वाले उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, जबकि मध्यम और अधिक खपत करने वालों का बिल बढ़ सकता है।
Bihar Electricity Bill: अब आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी निगाहें
मार्च के दूसरे सप्ताह में होने वाली घोषणा से यह साफ हो जाएगा कि बिजली दरें बढ़ेंगी या नहीं।
यदि प्रस्ताव मंजूर हुआ तो 1 अप्रैल 2026 से बिहार में बिजली महंगी होना तय माना जा रहा है। फिलहाल उपभोक्ता, उद्योग और व्यापार जगत सभी अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
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