बिहार में शराबबंदी को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान सदन की दहलीज पर ऐसा राजनीतिक टकराव देखने को मिला, जिसने साफ कर दिया कि यह मुद्दा अब केवल कानून का नहीं, बल्कि जनादेश, नैतिकता और राजनीतिक रणनीति का केंद्र बन चुका है। सत्ता पक्ष जहां इसे सामाजिक सुधार का ऐतिहासिक कदम बता रहा है, वहीं विपक्ष और कुछ सहयोगी दल इसके असर और क्रियान्वयन पर तीखे सवाल उठा रहे हैं।
बजट सत्र के बीच मंगलवार को हुई बहस ने यह संकेत दे दिया कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी गरमाने वाला है।
Bihar News Liquor Ban Debate: विपक्ष का हमला, ‘कागजी शराबबंदी’ का आरोप
सदन में राजद और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने शराबबंदी की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप है कि जमीनी स्तर पर कानून का सही क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। एआइएमआइएम विधायक Tauseef Alam ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि पुलिस की मिलीभगत से घर-घर शराब बिक रही है और वे खुद ऐसी जगह दिखा सकते हैं।
कांग्रेस के विधायक मनोज विश्वास ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि यदि कानून इतना प्रभावी है तो अवैध कारोबार की शिकायतें क्यों आ रही हैं। विपक्ष ने इसे “कागजी शराबबंदी” करार देते हुए समीक्षा की मांग उठाई।
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Bihar News Liquor Ban Debate: सरकार का पलटवार, ‘जनादेश की कसौटी’ का तर्क
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री Vijay Kumar Chaudhary ने स्पष्ट कहा कि जब पूर्ण शराबबंदी लागू की गई थी, तब संभावित राजस्व हानि का पूरा आकलन कर लिया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि इसके बाद राज्य में कई चुनाव हुए और हर बार जनता ने मुख्यमंत्री Nitish Kumar की नीति पर भरोसा जताया।
सरकार का कहना है कि लोकतंत्र में जनता का जनादेश सबसे बड़ी कसौटी होता है। यदि जनता लगातार समर्थन दे रही है तो समीक्षा की मांग केवल राजनीतिक बयानबाजी है।
अशोक चौधरी का कांग्रेस पर तंज (Bihar News Liquor Ban Debate)
ग्रामीण कार्य मंत्री Ashok Choudhary ने कांग्रेस विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो नेता आज शराबबंदी पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें शायद अपनी पार्टी के मूल सिद्धांतों की जानकारी नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस की सदस्यता की शर्तों में ही शराब न पीने का संकल्प शामिल रहा है।
Bihar News Liquor Ban Debate: NDA में भी सुर अलग?
राजनीतिक हलचल तब और बढ़ गई जब एनडीए के सहयोगी दल रालोमो के विधायक माधव आनंद ने खुलकर शराबबंदी की समीक्षा की मांग कर दी। उन्होंने इसे जनहित का विषय बताते हुए कानून में लचीलापन लाने की वकालत की।
इस बयान के बाद जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि शराबबंदी किसी एक दल का फैसला नहीं, बल्कि सर्वदलीय सहमति से लिया गया निर्णय था। ऐसे में इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है।
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Bihar News Liquor Ban Debate: सामाजिक सुधार बनाम क्रियान्वयन का सवाल
सत्ता पक्ष शराबबंदी को सामाजिक सुधार का प्रतीक बता रहा है। उनका तर्क है कि इससे घरेलू हिंसा में कमी आई, परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरी और सामाजिक वातावरण बेहतर हुआ।
वहीं विपक्ष का कहना है कि कानून का उद्देश्य अच्छा हो सकता है, लेकिन क्रियान्वयन में खामियां हैं। अवैध तस्करी, पुलिस पर आरोप और राजस्व पर असर जैसे मुद्दों को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
यह स्पष्ट है कि शराबबंदी अब केवल प्रशासनिक नीति नहीं रही, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक विमर्श बन चुकी है।
बिहार में शराबबंदी को लेकर जारी बहस ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। सत्ता पक्ष इसे जनता के अटूट जनादेश और सामाजिक सुधार का प्रतीक बता रहा है, जबकि विपक्ष और कुछ सहयोगी दल इसकी समीक्षा की मांग कर रहे हैं। बजट सत्र के दौरान हुई तीखी बहस से संकेत मिलता है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक केंद्र में बना रहेगा।
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