Bihar Politics: बिहार की नई सरकार बनने से पहले सियासत का तापमान चरम पर है। सरकार गठन का दौर अपने निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुका है, लेकिन इसके बीच सबसे बड़ी रस्साकशी विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर हो रही है। भाजपा और जदयू के बीच यह लड़ाई खामोश जरूर है, लेकिन बेहद तीखी और रणनीतिक। दोनों ही दल इस अहम पद पर कब्जा जमाना चाहते हैं, क्योंकि बिहार की राजनीति में स्पीकर की कुर्सी सत्ता संतुलन का सबसे प्रभावशाली बिंदु मानी जाती है।
- Bihar Politics: क्यों बढ़ी विधानसभा अध्यक्ष पद को लेकर BJP–JDU में खींचतान?
- Bihar Politics: नई कैबिनेट का गणित – ‘हर 6 विधायकों पर 1 मंत्री’ वाला फार्मूला लागू
- हर 6 विधायकों पर मिलेगा 1 मंत्री पद
- Bihar Politics: जिसे स्पीकर पद मिलेगा, उसके एक मंत्री पद की कटौती
- Bihar Politics: LJP(R), HAM और रालोमो – इनके लिए तय हुआ हिस्सा
- Bihar Politics: कौन लौटेगा कैबिनेट में? किसकी कुर्सी हिलेगी?
- Bihar Politics: बिहार में अधिकतम 36 मंत्री बन सकते हैं – लेकिन शपथ को लेकर दो फॉर्मूले टकराए
- Bihar Politics: स्पीकर, डिप्टी सीएम और मंत्रालयों की बंटवारी – तीन मोर्चों पर सबसे ज्यादा खींचतान
दूसरी तरफ, नई कैबिनेट का लगभग तय फार्मूला भी सामने आ चुका है, जिसमें सत्ता का पूरा समीकरण बेहद वैज्ञानिक और गणितीय अंदाज़ में बांटा गया है। यह फार्मूला तय करेगा कि सत्ता का वास्तविक चेहरा कैसा होगा और किस दल की राजनीतिक पकड़ ज्यादा मजबूत दिखाई देगी।
Bihar Politics: क्यों बढ़ी विधानसभा अध्यक्ष पद को लेकर BJP–JDU में खींचतान?
विधानसभा अध्यक्ष पद को लेकर दोनों दलों के पास अपनी-अपनी दलीलें हैं।
• JDU का तर्क: विधान परिषद का सभापति पहले से ही बीजेपी के पास है, इसलिए विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी उसे मिलनी चाहिए।
• BJP का तर्क: मुख्यमंत्री का पद JDU के पास है, इसलिए स्पीकर पद पर उनका स्वाभाविक हक बनता है।
दोनों दल अपनी-अपनी रणनीतिक मजबूती दिखाने के प्रयास में जुटे हैं, और यही खींचतान फिलहाल सत्ता की नई तस्वीर को अंतिम रूप देने में सबसे बड़ी रुकावट बन रही है।
Bihar Politics: नई कैबिनेट का गणित – ‘हर 6 विधायकों पर 1 मंत्री’ वाला फार्मूला लागू
सरकार गठन का जो नया फार्मूला तैयार हुआ है, वह बिल्कुल गणितीय पैटर्न पर आधारित है—
हर 6 विधायकों पर मिलेगा 1 मंत्री पद
इसी तर्ज पर भाजपा और जदयू दोनों से 15–15 मंत्री बनाए जाएंगे। इसमें मुख्यमंत्री का पद शामिल नहीं है। यानी दोनों दल सत्ता संतुलन के लिहाज़ से बराबर की हिस्सेदारी रखते दिखाई देंगे।
लेकिन यहाँ एक अहम ट्विस्ट है—
Bihar Politics: जिसे स्पीकर पद मिलेगा, उसके एक मंत्री पद की कटौती
क्योंकि स्पीकर पद भी कैबिनेट के बाहर रहते हुए सत्ता संरचना का बड़ा हिस्सा माना जाता है, इसलिए जिसकी पार्टी को यह पद मिलेगा, उसके खाते से एक मंत्री पद काट लिया जाएगा।
यही वजह है कि BJP और JDU दोनों इस कुर्सी को किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहते।
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Bihar Politics: LJP(R), HAM और रालोमो – इनके लिए तय हुआ हिस्सा
नई कैबिनेट में एनडीए के घटक दलों का फॉर्मूला भी लगभग तैयार है।
• LJP (रामविलास) के लिए गणित:
• अगर डिप्टी सीएम पद मिलता है → 2 मंत्री पद
• अगर डिप्टी सीएम नहीं मिलता → 3 मंत्री पद
• HAM (जीतनराम मांझी): 1 मंत्री पद तय
• रालोमो (उपेंद्र कुशवाहा): 1 मंत्री पद तय
यह समीकरण गठबंधन की मजबूती और जातीय संतुलन दोनों को ध्यान में रखते हुए सेट किया गया है।
Bihar Politics: कौन लौटेगा कैबिनेट में? किसकी कुर्सी हिलेगी?
सूत्रों के अनुसार नई कैबिनेट में अधिकतर पुराने मंत्रियों की वापसी तय मानी जा रही है। सरकार यह जोखिम नहीं लेना चाहती कि विपक्ष भ्रष्टाचार और अपराध के मुद्दे पर हमला बोले।
हालाँकि,
• जिन मंत्रियों पर हाल में गंभीर आरोप लगे
• या जिनका प्रदर्शन कमजोर रहा
उनकी कुर्सी पर तलवार लटक रही है और उन्हें बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है।
Bihar Politics: बिहार में अधिकतम 36 मंत्री बन सकते हैं – लेकिन शपथ को लेकर दो फॉर्मूले टकराए
संविधान के अनुसार बिहार में कुल सीएम सहित 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। लेकिन शपथ ग्रहण को लेकर दो प्रस्तावों पर चर्चाएँ तेज हैं—
पहला प्रस्ताव
सीएम, डिप्टी सीएम और 5–6 मंत्री पहले शपथ लें।
बाकी मंत्रियों को बाद में शामिल किया जाए।
दूसरा प्रस्ताव
सीएम, दोनों डिप्टी सीएम और लगभग 20 मंत्री एक साथ शपथ लें।
शेष मंत्री बाद में लिए जाएँ।
दोनों प्रस्तावों पर मंथन जारी है और आज-कल में अंतिम निर्णय सामने आ सकता है।
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Bihar Politics: स्पीकर, डिप्टी सीएम और मंत्रालयों की बंटवारी – तीन मोर्चों पर सबसे ज्यादा खींचतान
फिलहाल सत्ता के इस खेल में तीन मोर्चे सबसे गर्म हैं—
1. विधानसभा अध्यक्ष का पद
2. डिप्टी सीएम का फार्मूला
3. कौन-सा मंत्रालय किसके पास जाएगा
इन तीनों मुद्दों पर सहमति बनते ही नई सरकार की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी। लेकिन जब तक यह फैसला नहीं होता, तब तक बिहार की राजनीति में रणनीतिक हलचल जारी रहने की पूरी संभावना है।
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