बिहार की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है। चुनाव में करारी हार के बाद अब बिहार की राजनीती में के केंद्र में महागठबंधन की अंदरूनी कलह आ गई है। कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बीच पहले से चली आ रही तल्खी अब खुलकर सामने आने लगी है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के ताजा बयान ने महागठबंधन की एकजुटता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
इस बयान के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं, क्योंकि चुनावी हार के बाद पहली बार कांग्रेस की ओर से इतना सीधा और तीखा हमला सामने आया है।
Bihar Politics: चुनावी हार के बाद महागठबंधन में बढ़ा तनाव
बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को जिस तरह की शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा, उसके बाद से ही गठबंधन के भीतर मतभेद उभरने लगे थे। जहां एक ओर कांग्रेस के कई नेता हार की जिम्मेदारी राजद और तेजस्वी यादव पर डाल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजद की ओर से इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है।
इस बीच तेजस्वी यादव का करीब एक महीने से परिवार के साथ विदेश दौरे पर रहना भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि जब पार्टी और गठबंधन आत्ममंथन के दौर से गुजर रहा है, तब नेता प्रतिपक्ष का विदेश में समय बिताना गलत संदेश देता है।
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Mahagathbandhan News: शकील अहमद खान के बयान से मचा सियासी बवाल

महागठबंधन में नई दरार की वजह बने हैं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कांग्रेस विधायक दल के पूर्व नेता शकील अहमद खान। उन्होंने राजद के साथ कांग्रेस के गठबंधन को खुलकर “घाटे का सौदा” करार दिया है।
शकील अहमद खान ने कहा कि बिहार में महागठबंधन अब सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है। राजद के साथ रहने से कांग्रेस को न तो चुनावी लाभ मिल रहा है और न ही संगठनात्मक मजबूती। उन्होंने यहां तक कह दिया कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को इस गठबंधन पर गंभीरता से पुनर्विचार करना चाहिए।
Congress RJD Alliance: सीट बंटवारे से लेकर रणनीति तक सवाल
शकील अहमद खान ने आरोप लगाया कि महागठबंधन में सीट बंटवारे से लेकर चुनावी रणनीति तक कांग्रेस की भूमिका सीमित कर दी गई। उन्होंने कहा कि राजद के दबदबे के कारण कांग्रेस अपनी स्वतंत्र पहचान नहीं बना पा रही है।
उनके मुताबिक, गठबंधन में रहने के बावजूद कांग्रेस की न तो सीटों की संख्या बढ़ रही है और न ही वोट प्रतिशत में कोई ठोस इजाफा हो रहा है। इसका सीधा असर जमीनी कार्यकर्ताओं पर पड़ रहा है, जिनके बीच भ्रम और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
Bihar Politics Update: खुद की हार के बाद भी नहीं बदला रुख
गौरतलब है कि शकील अहमद खान इस चुनाव में तीसरी बार जीत की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन उन्हें कदवा विधानसभा सीट से अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हार की जिम्मेदारी खुद पर लेने के बजाय गठबंधन की संरचना पर सवाल खड़े कर दिए।
उनका यह बयान बताता है कि कांग्रेस के भीतर असंतोष अब सिर्फ बंद कमरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सार्वजनिक मंच पर आ चुका है।
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Tejashwi Yadav Politics: बढ़ी सियासी टेंशन
शकील अहमद खान के बयान के बाद सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या महागठबंधन टूटने की कगार पर है। तेजस्वी यादव के लिए यह स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि चुनाव में मिली हार के बाद महागठबंधन की एकजुटता बनाए रखना उनकी बड़ी जिम्मेदारी है।
243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए ने 202 सीटों पर जीत दर्ज कर प्रचंड बहुमत हासिल किया, जबकि महागठबंधन महज 35 सीटों पर सिमट गया। इसमें राजद को 25 और कांग्रेस को केवल 6 सीटें मिलीं।
Bihar Politics News: दिल्ली बैठक में भी फूटा था गुस्सा
चुनावी हार के बाद कांग्रेस ने दिल्ली में एक अहम बैठक बुलाई थी। इस बैठक में भी कई नेताओं ने हार का ठीकरा राजद और तेजस्वी यादव पर ही फोड़ा था। अब शकील अहमद खान के बयान ने उस अंदरूनी नाराजगी को सार्वजनिक कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर समय रहते महागठबंधन के भीतर संवाद नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में यह दरार और गहरी हो सकती है।
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