बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। 25 दिसंबर की आधी रात को पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास में अचानक हलचल देखने को मिली। सूत्रों के अनुसार, देर रात राबड़ी आवास से 4 से 5 गाड़ियां बाहर निकलीं और आवास खाली करने की प्रक्रिया शुरू हो गई। सबसे अहम बात यह रही कि इस दौरान न तो राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पटना में मौजूद थे और न ही नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव। आवास में सिर्फ राबड़ी देवी मौजूद थीं।
इस घटनाक्रम के सामने आते ही बिहार की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और इसे राजद के लिए एक बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
Bihar Politics: आधी रात क्यों शुरू हुई शिफ्टिंग?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गुरुवार देर रात 4 से 5 छोटी गाड़ियां 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास पर पहुंचीं। इन गाड़ियों के जरिए घर का सामान गोला रोड स्थित गौशाला में शिफ्ट किया गया। बताया जा रहा है कि यह शिफ्टिंग पूरी तरह से चरणबद्ध तरीके से की जा रही है।
रात के अंधेरे में हुई इस प्रक्रिया के दौरान राबड़ी आवास से पौधे, गार्डन से जुड़ा सामान और अन्य घरेलू वस्तुएं बाहर ले जाते हुए तस्वीरें भी सामने आई हैं। हालांकि राष्ट्रीय जनता दल की ओर से इस शिफ्टिंग को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि नहीं की गई है।
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Bihar Politics: एक महीने पहले मिला था नोटिस

गौरतलब है कि राबड़ी आवास को खाली करने का नोटिस ठीक एक महीने पहले, 25 नवंबर को मिला था। भवन निर्माण विभाग ने लालू परिवार को आधिकारिक रूप से 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने का आदेश दिया था।
इसके साथ ही विभाग की ओर से बिहार विधान परिषद में नेता विपक्ष के लिए हार्डिंग रोड स्थित आवास संख्या-39 आवंटित किए जाने की जानकारी भी दी गई थी। लालू परिवार पिछले करीब 20 वर्षों से राबड़ी आवास में रह रहा है, ऐसे में यह नोटिस उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं माना गया था।
Bihar Politics: राजद का दावा और बदली जमीनी हकीकत
नोटिस मिलने के बाद राष्ट्रीय जनता दल की ओर से दावा किया गया था कि लालू परिवार राबड़ी आवास खाली नहीं करेगा। पार्टी नेताओं ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया था। लेकिन अब, नोटिस मिलने के एक महीने बाद आधी रात को सामान शिफ्ट होने की खबरों ने सियासी समीकरणों को नई दिशा दे दी है।
सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल घर का पूरा सामान गोला रोड स्थित गौशाला में रखा जा रहा है। इसके बाद धीरे-धीरे इसे महुआ बाग और आर्य समाज रोड स्थित आवासों में शिफ्ट किया जाएगा। यानी साफ है कि राबड़ी आवास को एक ही दिन में नहीं, बल्कि चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह खाली किया जाएगा।
Bihar Politics: राबड़ी आवास, बिहार राजनीति का सत्ता केंद्र
10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास सिर्फ एक सरकारी घर नहीं रहा है, बल्कि यह बिहार की राजनीति का सबसे अहम केंद्र माना जाता रहा है। 23 जून 1997 को जब चारा घोटाला मामले में लालू यादव के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई, तब इसी आवास से सत्ता के बड़े फैसले हुए।
25 जुलाई 1997 को गिरफ्तारी की आशंका के बीच लालू यादव ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद 30 जुलाई 1997 को उन्होंने सरेंडर किया और दिसंबर 1997 तक जेल में रहे, लेकिन पार्टी की कमान उनके हाथ में ही रही।
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Bihar Politics: दो दशकों का राजनीतिक अध्याय खत्म?
वर्ष 2005 में राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित यह सरकारी आवास आवंटित किया गया था। इसके बाद से यह घर लालू परिवार, राजद की रणनीति और बिहार की सियासत का केंद्र बना रहा। तमाम राजनीतिक बैठकों, विरोध-प्रदर्शनों और रणनीतिक फैसलों की गवाही यह आवास देता रहा है।
अब जब आधी रात को सामान शिफ्ट होने लगा है, तो इसे सिर्फ एक आवास खाली करने की कार्रवाई नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति के एक लंबे अध्याय के समापन के रूप में देखा जा रहा है।
Bihar Politics: सियासी संकेत क्या हैं?
लालू-तेजस्वी की गैरमौजूदगी में आधी रात को राबड़ी आवास खाली होना कई राजनीतिक संकेत देता है। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या राजद आने वाले समय में अपनी रणनीति और ठिकानों को पूरी तरह बदलने जा रही है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
एक बात तय मानी जा रही है कि राबड़ी आवास के खाली होने के साथ बिहार की राजनीति में प्रतीकात्मक रूप से एक युग का अंत हो रहा है।
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