Budget Session 2026: संसद में हंगामे से गरमा गया बजट सत्र — प्रधानमंत्री का 97 मिनट का पलटवार, विपक्ष पर साधा तीखा निशाना

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राज्यसभा में विपक्ष पर हमला बोलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
Highlights
  • • लोकसभा में राष्ट्रपति अभिभाषण पर बिना चर्चा धन्यवाद प्रस्ताव पारित • राज्यसभा में पीएम मोदी का 97 मिनट लंबा भाषण • राहुल गांधी के बयान पर सत्ता पक्ष का तीखा विरोध • सिख और दलित अपमान मुद्दे पर सियासत तेज • चुनावी राज्यों में संसद आचरण बन सकता है बड़ा मुद्दा

Budget Session 2026 Parliament Uproar: हल्ले-गुल्ले की भेंट चढ़ता दिखा सत्र

वर्ष 2026 का बजट सत्र इस बार अपने आर्थिक एजेंडे से ज्यादा राजनीतिक टकराव और अभूतपूर्व हंगामे को लेकर चर्चा में है। संसद के दोनों सदनों में जिस तरह का गतिरोध देखने को मिला, उसने संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थिति इतनी असामान्य रही कि संसदीय इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर लोकसभा में प्रधानमंत्री उत्तर ही नहीं दे सके और अभिभाषण बिना चर्चा के पारित हो गया।

यह घटनाक्रम अपने आप में ऐतिहासिक और चिंताजनक माना जा रहा है। सामान्यतः राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान सरकार अपनी नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर विस्तार से जवाब देती है, जबकि विपक्ष सरकार को घेरने का प्रयास करता है। लेकिन इस बार बहस की जगह टकराव ने ले ली।

हालाँकि लोकसभा में गतिरोध रहा, लेकिन राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 97 मिनट लंबा भाषण देकर विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया और सरकार के विज़न को सामने रखा। उनका संबोधन न केवल राजनीतिक जवाब था बल्कि विकास, वैश्विक साझेदारी और भविष्य की रणनीति पर भी केंद्रित रहा।

Budget Session 2026 Parliament Uproar: राहुल गांधी के बयान पर सियासी घमासान

Budget Session 2026: संसद में हंगामे से गरमा गया बजट सत्र — प्रधानमंत्री का 97 मिनट का पलटवार, विपक्ष पर साधा तीखा निशाना 1

राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान हुए हंगामे के बाद जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का अवसर मिला तो उन्होंने कथित तौर पर विषय से हटकर पुराने सैन्य मुद्दों को उठाया। पूर्व सेना प्रमुख से जुड़ी एक अप्रकाशित पुस्तक का हवाला देते हुए चीनी घुसपैठ का मुद्दा उठाने की कोशिश ने सदन का तापमान और बढ़ा दिया।

लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नियमों का हवाला देकर व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई, लेकिन राहुल गांधी अपने रुख पर अड़े रहे। सत्ता पक्ष ने इसे न केवल सदन की गरिमा के खिलाफ बताया बल्कि सेना का मनोबल गिराने वाला भी करार दिया।

इसी दौरान सदन में एक और विवाद उस समय खड़ा हुआ जब आरोप लगे कि विपक्षी महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री का रास्ता रोकने की रणनीति बनाई। स्थिति ऐसी बनी कि लोकसभा अध्यक्ष को प्रधानमंत्री से सदन में न आने का अनुरोध करना पड़ा। सत्ता पक्ष ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादा के विपरीत और दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

Budget Session 2026 Parliament Uproar: राज्यसभा में प्रधानमंत्री का तीखा जवाब

राज्यसभा में अपने विस्तृत संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर कई मोर्चों पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस का बहिष्कार कर विपक्ष ने न केवल संवैधानिक पद का अपमान किया बल्कि एक आदिवासी महिला राष्ट्रपति का भी अनादर किया।

प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को “गद्दार” कहे जाने के बयान को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने इसे सिख समुदाय का अपमान बताते हुए कहा कि कांग्रेस से कई नेता अलग हुए लेकिन किसी को गद्दार नहीं कहा गया।

उन्होंने सदन में चेयर पर कागज फेंके जाने की घटनाओं का जिक्र करते हुए इसे असम और दलित समाज का अपमान बताया, क्योंकि उस समय चेयर पर क्रमशः असम और दलित समुदाय से आने वाले सदस्य बैठे थे।

कांग्रेस के नारों पर सीधा प्रहार

प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर हमला तेज करते हुए “मोदी तेरी कब्र खुदेगी” जैसे नारों का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या धारा 370 हटाने, 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने, नॉर्थ-ईस्ट में शांति स्थापित करने या आतंकवाद पर सख्त कार्रवाई करने की वजह से ऐसे नारे लगाए जा रहे हैं?

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “मोहब्बत की दुकान” की बात करने वाले ही नफरत के नारे लगा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इसे विपक्ष की हताशा और सत्ता खोने की पीड़ा का परिणाम बताया।

वैश्विक समझौतों और विकास एजेंडे का उल्लेख

अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का भी जिक्र किया। उन्होंने यूरोपियन यूनियन और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि आज दुनिया भारत के साथ साझेदारी चाहती है।

उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि जब उन्हें अवसर मिला था तब ऐसे समझौते क्यों नहीं हो पाए। यह टिप्पणी सीधे तौर पर पूर्ववर्ती सरकारों की आर्थिक कूटनीति पर प्रहार मानी गई।

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विपक्ष के रवैये पर राजनीतिक असर

सत्र के दौरान कांग्रेस, लेफ्ट, डीएमके और टीएमसी पर भी प्रधानमंत्री ने निशाना साधा। पश्चिम बंगाल सरकार को उन्होंने “निर्मम” बताते हुए कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा का मुद्दा उठाया।

साथ ही राज्यसभा सांसद सदानंद मास्टर का उदाहरण देते हुए वैचारिक असहिष्णुता पर चर्चा की। उनके साथ हुई हिंसा का उल्लेख कर प्रधानमंत्री ने राजनीतिक विचारधारा के नाम पर हिंसा की निंदा की।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने विपक्ष को सरकार पर हमलावर होने का अवसर कम और सरकार को पलटवार का अवसर ज्यादा दे दिया। संसद में हुए व्यवहार को अब चुनावी राज्यों में बड़ा मुद्दा बनाया जा सकता है।

आगे की राजनीति पर संभावित प्रभाव

वर्तमान घटनाक्रम के बाद यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि सत्तारूढ़ दल विपक्ष पर “संसदीय आचरण” और “संवैधानिक संस्थाओं के अपमान” का मुद्दा जोर-शोर से उठाएगा। सिख और दलित प्रतिनिधियों के अपमान का आरोप भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन सकता है।

दूसरी ओर विपक्ष सरकार को बहस से बचने और मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाता रहेगा। ऐसे में बजट सत्र का शेष हिस्सा भी टकरावपूर्ण रहने की आशंका जताई जा रही है।

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