Buxar Pension Case : जिंदा होकर भी ‘मृत’ घोषित! 80 वर्षीय Shanti Devi सिस्टम से लड़ने को मजबूर

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जिंदा महिला को मृत घोषित कर बंद की पेंशन
Highlights
  • • 80 वर्षीय महिला को रिकॉर्ड में मृत घोषित • वृद्धा पेंशन हुई बंद • महादलित विधवा की आर्थिक हालत खराब • जीवित प्रमाण लेकर दफ्तरों के चक्कर • प्रशासन ने जांच शुरू की

बिहार के बक्सर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां 80 वर्षीया वृद्ध महिला को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वह जीवित हैं और अपने अधिकार के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। वृद्धा पेंशन ही उनके जीवन का एकमात्र सहारा थी, जो अब बंद हो चुकी है। यह मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है।

Buxar Pension Case: सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित हुईं Shanti Devi

डुमरांव प्रखंड के नया भोजपुर वार्ड संख्या आठ की रहने वाली शांति देवी इन दिनों अपनी जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही हैं। स्वर्गीय रामचंद्र चौधरी की विधवा शांति देवी को सरकारी फाइलों में मृत घोषित कर दिया गया है। इस एक गलती ने उनका जीवन संकट में डाल दिया है।

वृद्धा पेंशन, जो उनके दैनिक जीवन का आधार थी, अचानक बंद हो गई। पहले तो उन्हें लगा कि यह कोई तकनीकी समस्या होगी, लेकिन जब कई महीनों तक पैसा नहीं आया, तब उन्हें मामले की गंभीरता का अंदाजा हुआ।

Buxar Pension Case: पेंशन बंद होने से टूटा जीवन का सहारा

महादलित समुदाय से आने वाली शांति देवी बेहद गरीब और असहाय हैं। उम्र के इस पड़ाव पर उनका शरीर भी साथ नहीं देता। आंखों की रोशनी कमजोर हो चुकी है और चलने-फिरने में भी सहारे की जरूरत पड़ती है।

ऐसे में वृद्धा पेंशन ही उनके जीवन का एकमात्र आर्थिक सहारा थी। इसी राशि से दवा, राशन और दैनिक जरूरतें पूरी होती थीं। पेंशन बंद होते ही उनकी आर्थिक स्थिति और बदतर हो गई।

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Buxar Pension Case: जिंदा होने का प्रमाण लेकर दफ्तर-दफ्तर भटक रहीं

जब पेंशन बंद हुई, तब शांति देवी वार्ड पार्षद कन्हैया राम के साथ प्रखंड कार्यालय पहुंचीं। वहां जांच के दौरान जो जानकारी सामने आई, उसने सभी को चौंका दिया।

बताया गया कि विकास मित्र बृज कुमार द्वारा दी गई रिपोर्ट में उन्हें मृत बताया गया था। इसी आधार पर उनकी पेंशन बंद कर दी गई। यह सुनते ही वृद्ध महिला के पैरों तले जमीन खिसक गई।

अब स्थिति यह है कि जीवित शांति देवी को खुद के जीवित होने का प्रमाण देना पड़ रहा है। कभी आधार कार्ड, कभी जीवित प्रमाण पत्र, तो कभी नए आवेदन — हर बार नई प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है।

Buxar Pension Case: वार्ड पार्षद ने उठाई आवाज

स्थानीय वार्ड पार्षद कन्हैया राम ने मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से तत्काल सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि शांति देवी बेहद गरीब और लाचार विधवा महिला हैं, जिनका सहारा सिर्फ पेंशन है।

उन्होंने कहा कि सरकारी लापरवाही का खामियाजा एक बेबस वृद्ध महिला भुगत रही है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

Buxar Pension Case: प्रशासन ने शुरू की जांच

डुमरांव के प्रखंड विकास पदाधिकारी संदीप कुमार पांडे ने मामले को संज्ञान में लिया है। उन्होंने बताया कि शांति देवी का आवेदन प्राप्त हो चुका है और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

अधिकारियों के अनुसार, नवंबर माह तक पेंशन का भुगतान हुआ था। गलती कहां हुई, इसकी जांच की जा रही है। आश्वासन दिया गया है कि त्रुटि सुधार कर जल्द ही पेंशन पुनः चालू करा दी जाएगी।

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Buxar Pension Case: सिस्टम पर खड़े हुए बड़े सवाल

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की परेशानी नहीं, बल्कि सिस्टम की खामियों को उजागर करता है। सवाल उठता है कि बिना सत्यापन किसी जीवित व्यक्ति को मृत कैसे घोषित कर दिया गया?

यदि वार्ड स्तर की रिपोर्ट के आधार पर ऐसी कार्रवाई हो सकती है, तो यह पूरे पेंशन सत्यापन तंत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

Buxar Pension Case: राहत की उम्मीद, लेकिन दर्द कायम

हालांकि प्रशासन ने जांच और सुधार का भरोसा दिया है, लेकिन तब तक शांति देवी की परेशानी खत्म नहीं होगी जब तक पेंशन बहाल नहीं हो जाती।

उनकी लड़ाई केवल आर्थिक नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है — जिंदा होकर भी जिंदा साबित करने की लड़ाई।

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