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बिहार की राजधानी पटना में एक दबंग वार्ड पार्षद द्वारा महिला टीचर से छेड़छाड़ करने का मामला अब देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास पहुंच गया है। पटना के गर्दनीबाग इलाके में महिला स्कूल टीचर संगं छेडखानी और बदसलूकी वाले इस मामले को लेकर अब प्रधानमंत्री कार्यालय ने बिहार के मुख्य सचिव से जवाब तलब किया है और इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट मांगी है। पीएमओ से बिहार के मुख्य सचिव को पत्र भेज कर इस बारे में सारी जानकारी भेजने को कहा है।

क्या है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार पटना के गर्दनीबाग इलाके का ये मामला करीब 4 महिने पूराना है। इस पूरे मामले में नेता पर पटना पुलिस की मेहरबानी साफ दिखती है। गर्दनीबाग के बाहुबली माने जाने वाले वार्ड पार्षद पति के खिलाफ केस दर्ज तो हुआ लेकिन पूरे मामले में पुलिस ने बिना देरी करते हुए बाहुबली नेता को क्लीन चिट भी दे दी। इस पूरे मामले में अब दबंग वार्ड पार्षद पति पीड़ित शिक्षिकाओं पर केस दर्ज कराने की धमकी दे रहा है।

दरअसल मामला जुलाई महीने का है। गर्दनीबाग साधनापुरी के एक गर्ल्स स्कूल की महिला शिक्षिका ने गर्दनीबाग थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी थी। इसमें स्थानीय वार्ड पार्षद श्वेता राय के पति अविनाश कुमार उर्फ मंटू पर कई गंभीर आरोप लगाये गये थे. महिला शिक्षिकाओं ने आरोप लगाया था कि दबंद मंटू अपने साथियों के साथ लगातार छेड़खानी कर रहा है. एक महिला शिक्षिका ने विरोध किया तो उसके निजी अंगों को सरेआम छेड़छाड़ किया गया. प्राथमिकी में अविनाश कुमार मंटू के साथ साथ उसकी वार्ड पार्षद पत्नी श्वेता राय को भी अभियुक्त बनाया गया था।

नहीं की कोई कार्रवाई

इस पूरे मामले को लेकर पीड़ित महिला शिक्षिका ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने आरोपियों को बचाने के लिए पूरी कोशिश की। वहीं इस बारे में गर्दनीबाग पुलिस ने मीडिया को ये बताया कि उसने सीसीटीवी फुटेज देखा है और उसमें कहीं छेडखानी की बात सामने नहीं आई। लेकिन दिलचस्प बात ये है कि एफआईआर में कहीं उस जगह का ही उल्लेख नहीं था जहां छेडखानी होने की बात पीड़ित द्वारा कही गई है। गर्दनीबाग पुलिस की माने तो पूरा मामला मामला साढ़े तीन कट्ठा जमीन का है. इसलिए अविनाश कुमार मंटू को फंसाया जा रहा है। लेकिन पुलिस ये नहीं बता पाई कि आरोप लगाने वाली शिक्षिका का जमीन से क्या संबंध है।

बताते चलें कि इस पूरे मामले को लेकर अब प्रधानमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लिया है। पीड़िता ने पटना पुलिस के कारनामों से त्रस्त होकर प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखा था, जिसपर पीएमओ ने संज्ञान लिया है।

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