अशोक भाटिया, (वरिष्ठ स्तंभकार )
1971 के बाद पहली बार पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सीधा व्यापार शुरू हुआ है। इस नए व्यापारिक संबंध के तहत, पहली बार पाकिस्तान का एक जहाज सरकारी माल लेकर बांग्लादेश के लिए रवाना हुआ। फरवरी की शुरुआत में, बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच एक समझौता हुआ, जिसके तहत बांग्लादेश ने ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ पाकिस्तान के माध्यम से 50 हजार टन पाकिस्तानी चावल खरीदने का निर्णय लिया। बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के सत्ता में आने के बाद से ही बांग्लादेश पाकिस्तान से नजदीकियां बढाए जा रहा है। दोनों देश न केवल व्यापारिक बल्कि सैन्य सहयोग भी बढ़ाने में जुटे हैं।
युनूस प्रशासन के आने के बाद बांग्लादेश से भारत के संबंधों में तेजी से बदलाव आया है। शेख हसीना के प्रत्यर्पण और बॉर्डर पर फेंसिंग के मसले तक बांग्लादेश और भारत असहज डिप्लोमेसी में उलझे हैं।
पाकिस्तान के खुफिया विभाग आईएसआई के डायरेक्टर जनरल ऑफ एनालिसिस, मेजर जनरल शाहिद आमिर अफसर की बांग्लादेश यात्रा या पाकिस्तान के एक्सरसाइज अमान में बांग्लादेशी नेवी वॉरशिप का शामिल होना, दोनों देशों के बीच काफी तेजी से बढ़ रही नजदीकी गतिविधियां दिखाता है। पाकिस्तान और बांग्लादेश की नजदीकी से भारत के पूर्वोत्तर हिस्सों में चरमपंथी गतिविधियों को लेकर भारत के लिए सुरक्षा चिंताएं पैदा होना स्वाभाविक है।
पड़ोसी देश बांग्लादेश में मस्क के स्टारलिंक के आने की चर्चाए जोरों पर हैं। बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार युनूस ने मस्क से इस सर्विस को जल्द लॉन्च करने की इच्छा जताई है। भारत में यह सेवा अभी शुरू नहीं हो पाई है। सरकार की ओर से कुछ दिन पहले कहा गया था कि कंपनी को पहले सुरक्षा संबंधित मानकों पर खरा उतरना होगा। ऐसे में अगर बांग्लादेश में यह सर्विस लॉन्च हो जाती है तो सुरक्षा संबंधित चिंताओं से बेफिक्र नहीं हुआ जा सकता है।
गौरतलब है कि बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद नई दिल्ली और ढाका के बीच रिश्तों में खटास बढ़ती जा रही है।\ वहां हजारों हिंदुओं को हिंसा का सामना करना पड़ा, जिससे हालात और बिगड़ गए। अब बांग्लादेश उस देश से नजदीकी बढ़ा रहा है, जिसे भारत में दुश्मन की नजरों से देखा जाता है। बांग्लादेश ने पाकिस्तान के साथ सीधी फ्लाइट शुरू करने का फैसला किया है।
पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच बढ़ती भागीदारी अब भारत के क्षेत्रीय प्रभाव के लिए एक चुनौती है। आईएसआई प्रतिनिधिमंडल के ढाका पहुंचने से कुछ ही दिन पहले, सशस्त्र बल प्रभाग के प्रधान स्टाफ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल एसएम कमरुल हसन के नेतृत्व में एक बांग्लादेशी सैन्य प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान का केंद्र का दौरा किया था। पहले, पाकिस्तानी माल को श्रीलंका, सिंगापुर या मलेशिया में तीसरे पक्ष के बंदरगाहों के माध्यम से भेजा जाता था, जिससे रसद में देरी होती थी और लागत बढ़ जाती थी। सितंबर 2024 में बांग्लादेश ने व्यापार दक्षता पर इसके नकारात्मक प्रभाव का हवाला देते हुए पाकिस्तान से आयातित वस्तुओं के 100 प्रतिशत अनिवार्य भौतिक निरीक्षण को समाप्त कर दिया। ये उपाय दोनों पक्षों की ओर से वाणिज्यिक संबंधों को बढ़ाने के लिए एक मजबूत इरादे का संकेत देते हैं, जो परंपरागत रूप से मामूली रहे हैं।
पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ और मुहम्मद यूनुस की दो बार मुलाकात हो चुकी है। । पहली बार सितंबर 2024 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में और फिर दिसंबर में काहिरा में डी-8 शिखर सम्मेलन के दौरान। यूनुस ने 1971 के युद्ध से उपजे लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों के समाधान पर भी जोर दिया, इस बात पर जोर देते हुए कि उन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक बार और हमेशा के लिए निपटाने की जरूरत है। जवाब में शहबाज शरीफ ने आश्वासन दिया कि पाकिस्तान इन ऐतिहासिक विवादों को सुलझाने के तरीके तलाशेगा। 1971 के क्रूर मुक्ति संग्राम के बाद से ऐतिहासिक रूप से अलग-थलग पड़े दोनों राष्ट्र अब मेल-मिलाप कर रहे हैं। भारत के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच नई गर्मजोशी चिंता का विषय है। बांग्लादेश दक्षिण एशिया में अब तक भारत का सबसे करीबी सहयोगी रहा है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से इसकी निकटता को देखते हुए, उग्रवाद को नियंत्रित करने में बांग्लादेश का सहयोग महत्वपूर्ण रहा है।
अगले महीने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार की ढाका की यात्रा होनेवाली है, जो कि 2012 के बाद पहली बार हो रही है। हालांकि, बदलते कूटनीतिक संबंधों के बावजूद, बांग्लादेश व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग के लिए भारत पर बहुत अधिक निर्भर है। अपनी वर्तमान राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक संकट को देखते हुए, बांग्लादेश भारत को पूरी तरह से अलग-थलग करने का जोखिम नहीं उठाएगा
पाकिस्तान और बांग्लादेश के बदलते संबंध
