स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार से यह दुर्दशा: 30 फीट धंस गई सड़क

By Team Live Bihar 104 Views
5 Min Read

मुजफ्फरपुर: स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत महज 7 माह पहले कलेक्ट्रेट व कमिश्नरी गेट के सामने बनी सड़क मंगलवार को 30 फीट धंस गई। कोई बड़ा हादसा न हो ,इसके लिए आनन-फानन में सड़क की घेराबंदी कर देर रात तक खुदाई का काम किया गया। हैरानी इस बात की है कि पिछले साल बारिश में यहीं पर नगर निगम की सुपर सकर मशीन सड़क धंसने से पलट गई थी। लेकिन, अब तक स्थाई रूप से इसे ठीक नहीं किया जा सका। जहां यह सड़क धंसी है, वहां सीवरेज लाइन व ड्रेनेज बना हुआ है। ड्रेनेज से बड़ा लीकेज हो रहा है।

बहरहाल, सड़क धंसने का ठीकरा स्मार्ट सिटी मैनेजमेंट अभी नगर निगम के पाइप लीकेज पर ही फोड़ रहा है। हालांकि, इसके धंसने से स्मार्ट सिटी के इंजीनियरों व निर्माण एजेंसियों में खलबली भी मची हुर्ई है। जिस रोड में यह हादसा हुआ है वहां तकरीबन 322 करोड़ की लागत से सीवरेज लाइन व 60 करोड़ की लागत से सड़क-ड्रेनेज का काम चल रहा है।

स्मार्ट सिटी इंजीनियर की मौजूदगी में जब जेसीबी से डैमेज सड़क की खुदाई हुई तो सभी हतप्रभ रह गए। सड़क के नीचे का हिस्सा 10 फीट से ज्यादा खोखला था। वहां की मिट्टी अगल-बगल में शिफ्ट हो गई थी। स्मार्ट सिटी इंजीनियरों की यह दलील किसी को नहीं पची कि निगम की पाइप के लीकेज होने से यह हादसा हुआ।

यदि ऐसा है तो पूरे शहर में ऐसी पाइप बिछी है। कहीं और सड़क क्यों नहीं धंस रही। सीवरेज लाइन बिछाने के बाद ठीक से सड़क दुरुस्त नहीं करने व ड्रेनेज से बड़ा लीकेज होने से हादसा हुआ। इस पर लोग स्मार्ट सिटी को भला-बुरा कह रहे थे । लोगों के विरोध के सामने स्मार्ट सिटी इंजीनियरों को कई बार मौके से भागना पड़ा।

उधर, स्मार्ट सिटी एमडी सह नगर आयुक्त ने इस मामले में जांच कराने की भी पहल नहीं की है। गोल-मटोल प्रेस नोट जारी कर बताया गया है कि वहां पर डेढ़ वर्ष पूर्व नाला बनाया गया था। निरीक्षण में पता चला कि वाटर सप्लाई की पाइपलाइन में लीकेज से सड़क धंस रही थी। लीकेज की समस्या का निदान हो गया है। धंसी हुई सड़क को ठीक कराया जा रहा है।

नगर विधायक विजेंद्र चौधरी ने कहा कि स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार की वजह से यह दुर्दशा है। जिस निर्माण एजेंसी की लापरवाही से सड़क धंसी उसकी जांच करा एजेंसी को ब्लैक लिस्टेड किया जाए। जिम्मेदार इंजीनियर पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। मॉनिटरिंग ठीक से होती तो सड़क नहीं धंसती। पिछली बार यही सड़क धंसी तो भी कार्रवाई नहीं की गई। सीएम को भी मामले से अवगत कराया जाएगा।

स्मार्ट सिटी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर सह मेयर निर्मला साहू का कहना है कि स्मार्ट सिटी के क्वालिटी को लेकर बार-बार बोलने के बावजूद नजरंदाज किया जा रहा है। स्थल जांच कर क्वालिटी के लिए कई बार नगर आयुक्त को भी बोला गया। लेकिन, जांच नहीं की गई। नगर विकास मंत्रालय, नगर विकास विभाग व मंत्री से भी स्थल जांच के लिए अनुरोध किया गया। भ्रष्टाचार को आगे भी उजागर करूंगी।

इस बाबत सिविल इंजिनियर ब्रजेश्वर ठाकुर की कही बातें आंख खोलने वाली हैं। उनकी पड़ताल में पता चला कि पाइप के अलावा स्मार्ट सिटी से बने ड्रेनेज से भी पानी का रिसाव हो रहा है। सड़क काफी दूर में खोखला है। पानी बहाव स्मार्ट सिटी का बहाना है। बारिश में तो और खराब स्थिति होगी। सड़क बनाने में घोर अनियमितता की गयी है। निर्माण के समय किसी इंजीनियर ने इसकी निगरानी नहीं की। टेक्निकल काम ठीक ने नहीं किया गया। नन टेक्निकल ढंग से काम किया गया है। खुदाई के बाद सड़क दुरुस्त करने में लापरवाही है। निर्माण के नाम पर पुराने सड़क को बनाने के नाम पर लीपापोती किया गया है। सड़क धंसने के साथ ड्रेनेज लीकेज की भी जांच होनी चाहिए।

Share This Article