Dharmendra की विदाई पर उठा विवाद: हेमा मालिनी की दूरी, प्रकाश कौर की भूमिका पर चर्चा

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Highlights
  • • धर्मेंद्र के निधन के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा • हेमा मालिनी के “त्याग” और प्रकाश कौर के “संयम” पर तीखी बहस • अंतिम संस्कार से हेमा मालिनी की दूरी पर सवाल • भारतीय राजनीति व फिल्म जगत के पुराने उदाहरणों से तुलना • प्रकाश कौर की सेवा और गरिमा की व्यापक चर्चा • देयोल परिवार ने हमेशा गरिमा से व्यवहार किया • अंतिम संस्कार को लेकर निर्णय को परिवार का निजी मामला माना गया

सुपरस्टार धर्मेंद्र के निधन के बाद सोशल मीडिया, फिल्म इंडस्ट्री और आम जनता के बीच भावनाओं का सैलाब उमड़ आया है। लेकिन इस शोक के माहौल के बीच एक नई बहस भी तेज़ हो गई है—हेमा मालिनी और धर्मेंद्र की पहली पत्नी प्रकाश कौर की भूमिका को लेकर। सोशल मीडिया दो धड़ों में बंट गया है। एक वर्ग हेमा मालिनी को “बलिदान और त्याग का प्रतीक” बता रहा है, तो दूसरा वर्ग प्रकाश कौर की गरिमा, संयम और वर्षों की सहनशीलता की चर्चा कर रहा है।

यह विवाद इसलिए भी उठ गया क्योंकि धर्मेंद्र के अंतिम संस्कार और शोकसभा में हेमा मालिनी दिखाई नहीं दीं, और इस पर कई तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। लेकिन यह मुद्दा सिर्फ इसी परिवार तक सीमित नहीं है—भारत में ऐसी कई उदाहरण हैं जहाँ पहली पत्नी, दूसरी पत्नी या साथ रहने वाली साथी के बीच जटिल भावनात्मक और सामाजिक स्थितियाँ बनीं।

Dharmendra Death, सोशल मीडिया में दो खेमे: हेमा मालिनी बनाम प्रकाश कौर की बहस

धर्मेंद्र के निधन के बाद इंटरनेट पर दो बड़ी राय उभरकर सामने आईं।

पहला वर्ग कह रहा है कि हेमा मालिनी ने अपने जीवन में कई बार त्याग किया, परिवार की खुशियों के लिए स्वयं को पीछे रखा और हमेशा गरिमा के साथ रहीं।

दूसरा वर्ग प्रकाश कौर की सहनशीलता और धैर्य का सम्मान कर रहा है। उन्होंने decades से चुपचाप अपना घर संभाला, कभी मीडिया में बोलकर विवाद नहीं किया और अपनी गरिमा बनाए रखी।

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यह भी याद दिलाया जा रहा है कि देयोल परिवार—सनी देयोल, बॉबी देओल और दोनों बहनों—ने भी कभी किसी के खिलाफ बयानबाज़ी नहीं की। फिर भी विवाद इसलिए उभरा क्योंकि अंतिम संस्कार में हेमा मालिनी की अनुपस्थिति पर लोग सवाल उठा रहे हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ: भारत में पहली और दूसरी पत्नी के बीच जटिल रिश्तों के उदाहरण

आपके दिए डेटा के अनुसार, ऐसे कई राजनीतिक और फिल्मी उदाहरण हैं जिन्होंने इस बहस को और दिलचस्प बना दिया है।

Dharmendra Death: एमजी रामाचंद्रन की पत्नी जानकी और जयललिता का अध्याय

दक्षिण भारत के दिग्गज नेता और सुपरस्टार एम.जी. रामाचंद्रन की पत्नी जानकी ने अपने जीवन में बहुत कुछ सहा। उन्होंने कभी अपने पति को तलाक नहीं दिया, और एमजीआर की मौत के समय जयललिता के साथ परिवार ने कैसा व्यवहार किया, यह राजनीतिक इतिहास का हिस्सा है। जयललिता को अंतिम यात्रा के ट्रक से नीचे उतरने तक की नौबत आई थी।

जॉर्ज फर्नांडिस, लैला कबीर और जया जेटली की जटिल कहानी

जॉर्ज फर्नांडिस की illness के दौरान उनकी पत्नी लैला कबीर वर्षों बाद वापस आईं और उनकी देखभाल संभाली। जया जेटली को अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा, लेकिन जॉर्ज फर्नांडिस ने संकेत दिया कि वे लैला कबीर के साथ रहना चाहते हैं। यह दिखाता है कि भारतीय पत्नियाँ अंततः अपने दायित्व निभाने लौट आती हैं, भले ही निजी संबंध कितने ही जटिल क्यों न हों।

Dharmendra Death: एन. टी. रामाराव और लक्ष्मी पार्वती का विवाद

एनटीआर ने अपनी पहली पत्नी के निधन के बाद लक्ष्मी पार्वती से विवाह किया, लेकिन उनके बच्चों और दामाद चंद्रबाबू नायडु को यह पसंद नहीं आया। नायडु के नेतृत्व में परिवार ने पार्टी पर कब्जा किया और एनटीआर के अंतिम वर्षों में लक्ष्मी पार्वती को पीछे धकेल दिया गया। एनटीआर की मृत्यु के बाद वह लगभग गुमनामी में चली गईं।

प्रकाश कौर की भूमिका: संयम और गरिमा की मिसाल

आपके दिए डेटा के अनुसार, प्रकाश कौर ने कभी मीडिया में जाकर कुछ नहीं कहा, न हेमा मालिनी के बारे में, न अपने पति के बारे में।

उन्होंने अपने बच्चों के साथ गरिमा से जीवन जिया।

धर्मेंद्र के बीमार पड़ने पर उन्होंने दिन-रात सेवा की।

बॉबी देओल के एक इंटरव्यू का हवाला दिया गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि “हेमा मालिनी मिलने नहीं आतीं, और मम्मी ही पापा का ध्यान रखती हैं।”

इन तथ्यों के आधार पर लोग कह रहे हैं कि प्रकाश कौर ने भी भारतीय पत्नी का वह रूप दिखाया जिसमें सहनशीलता और कर्तव्य सर्वोपरि होते हैं।

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Dharmendra Death: अंतिम संस्कार पर उठे सवाल और निजी फैसले का सम्मान

धर्मेंद्र के अंतिम संस्कार और शोकसभा को लेकर लोग बहस कर रहे हैं कि हेमा मालिनी को शामिल क्यों नहीं किया गया।

आपके दिए डेटा में यह भी कहा गया है कि यह पूरा मामला देयोल परिवार का निजी मामला है और निर्णय भी उन्हीं का होना चाहिए।

एक भावनात्मक और संतुलित राय यह भी सामने आई है कि—

यदि हेमा मालिनी को शोकसभा से दूर रखा गया, तो उन्हें अपनी अलग शोकसभा रख लेनी चाहिए थी।

देयोल परिवार हमेशा उनके प्रति सम्मानजनक रहा है, और परिवार की गरिमा बनाए रखनी चाहिए।

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