120 क्विंटल आचार बेच कमा रही 10 लाख सालाना कोरोना में पति ने छोड़ी थी नौकरी, 2022 से शुरू कर 3 महिलाओं को दिया रोजगार

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सहरसा, संवाददाता
सहरसा के चांदनी चौक की रहने वाली जूली प्रवीण ने कठिन समय में हिम्मत दिखाते हुए एक ऐसा रास्ता चुना, जिससे आज उनकी पहचान बन गई है। कोरोना काल में पति का व्यापार ठप होने के बाद जूली ने हार मानने की जगह कुछ नया करने की ठानी। उन्होंने घर में अचार बनाने का काम शुरू किया, जो आज प्रेरणा की मिसाल बन गया है।
जनवरी 2022 में जूली ने किराए के मकान में अचार बनाने का काम शुरू किया था। पहले साल महज 50 हजार रुपए की कमाई हुई, लेकिन लगन और मेहनत रंग लाई। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से 2 लाख रुपए का लोन मिला और कारोबार ने रफ्तार पकड़ ली। जूली आज 12 प्रकार के स्वादिष्ट अचार तैयार करती हैं। लाल मिर्च भरुआ, मिक्स अचार, हरी मिर्च, आंवला, कटहल, इमली कैरी और बिरयानी स्पेशल जैसे अचारों की इलाके में जबरदस्त मांग है। वह हर महीने में 10 क्विंटल से अधिक अचार का उत्पादन करती हैं।
जूली के पति मो. मेहताब अब इस कारोबार में कंधे से कंधा मिलाकर साथ दे रहे हैं। वह ग्रामीण इलाकों तक सप्लाई करते हैं और अब दोनों का सपना है कि वे कोसी और सीमांचल क्षेत्रों में अपना अचार ब्रांड स्थापित करें। जूली सिर्फ खुद आत्मनिर्भर नहीं बनीं, बल्कि उन्होंने तीन अन्य महिलाओं खलीदा रजिया, गुलबसा और गुलजारा प्रवीण को रोजगार भी दिया है। इन सभी को रोजाना 200 रुपए मजदूरी मिलती है। जूली का अचार कारोबार आज सालाना 8-10 लाख रुपए तक पहुंच चुका है। दो बच्चों की मां जूली ने साबित कर दिया कि संकट के समय साहस और मेहनत से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। उनकी यह कहानी दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है, जो दिखाता है कि सीमित संसाधनों में भी सफलता की इबारत लिखी जा सकती है।

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