रक्सौल की बड़ी मस्जिद में काली पट्टी बांधकर अता की गई अलविदा की नमाज हजारों ने मांगी अमन-चैन की दुआ,सुरक्षा के थे कड़े इंतजाम

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रक्सौल, संवाददाता
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल के ऐतिहासिक बड़ी मस्जिद में शुक्रवार को रमजान के अंतिम जुम्मे की अलविदा नमाज अता की गई। इस दौरान हजारों की संख्या में नमाजियों ने देश में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली के लिए दुआ मांगी। खास बात यह थी कि कई नमाजियों ने अपने हाथों में काली पट्टी बांधकर नमाज अदा की। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने विरोध के प्रतीक के रूप में काली पट्टी पहनकर नमाज पढ़ी। इसे वक्फ बोर्ड के नियमों में संशोधन के खिलाफ एक शांतिपूर्ण विरोध के तौर पर बताया गया।
रक्सौल की बड़ी मस्जिद में अलविदा की नमाज में हर वर्ष की तरह इस बार भी पड़ोसी देश नेपाल के सैकड़ों नमाजी शामिल हुए। नेपाल के वीरगंज, परसा, और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग रक्सौल पहुंचकर नमाज अदा करते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र में आपसी सद्भाव और भाईचारे का यह नजारा देखने को मिला, जहां दोनों देशों के नमाजियों ने एक साथ मिलकर दुआएं मांगी।
अलविदा की नमाज को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सीसीटीवी कैमरों से चारों ओर निगरानी रखी गई। बड़ी मस्जिद के आसपास महिला पुलिस बल की तैनाती की गई थी, ताकि महिलाओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। रक्सौल थाना प्रभारी राजीव नंदन सिंह और डीएसपी धीरेंद्र कुमार स्वयं सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे। नमाज के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल अलर्ट रहा।
नमाज के दौरान नमाजियों द्वारा काली पट्टी बांधकर नमाज पढ़ना वक्फ बोर्ड के नियमों के खिलाफ विरोध का प्रतीक माना जा रहा है। नमाजियों का मानना है कि वक्फ बोर्ड द्वारा लिए जा रहे कुछ निर्णय उनके धार्मिक अधिकारों के विपरीत हैं। हालांकि, इस विरोध प्रदर्शन में पूरी तरह शांति और संयम का परिचय दिया गया। पूर्व राज्यसभा सांसद साबिर अली ने अलविदा की नमाज के बाद नमाजियों के साथ सामूहिक रूप से देश में अमन-चैन, भाईचारे और समृद्धि के लिए विशेष दुआ मांगी। लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर ईद की अग्रिम शुभकामनाएं दीं।

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