भारतीय लोकतंत्र में चुनावी मौसम आते ही Freebie Politics in Indian Democracy पर बहस तेज हो जाती है। जनसेवा का स्वरूप बदलकर जनलुभावन घोषणाओं में परिवर्तित होता दिखता है। राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त योजनाओं को चुनावी सफलता का शॉर्टकट बनाए जाने की प्रवृत्ति लगातार मजबूत हो रही है।
- Supreme Court on Freebies: Warning for Electoral Integrity
- Fiscal Discipline vs Freebie Culture in India
- Role of Election Commission of India in Monitoring Freebie Announcements
- Employment Generation vs Free Cash Schemes Debate
- Freebie Politics and Voter Responsibility in Democracy
- Need for Transparent and Sustainable Policy Framework
असम, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनावी हलचल के बीच इस संस्कृति का प्रभाव और स्पष्ट दिखाई देता है। इसी संदर्भ में हाल ही में Supreme Court of India ने मुफ्त योजनाओं के अनियंत्रित विस्तार पर गंभीर टिप्पणी की, जिसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
Supreme Court on Freebies: Warning for Electoral Integrity
Supreme Court of India ने यह प्रश्न उठाया कि क्या चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर मुफ्त योजनाओं की घोषणा लोकतांत्रिक समानता को प्रभावित करती है? अदालत की चिंता केवल कानूनी नहीं, बल्कि नैतिक और आर्थिक भी है।
जब राजस्व घाटे से जूझ रहे राज्य मुफ्त बिजली, मुफ्त यात्रा या नकद वितरण की घोषणाएं करते हैं, तो यह सवाल उठता है कि संसाधन कहां से आएंगे और इसकी कीमत कौन चुकाएगा।
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Fiscal Discipline vs Freebie Culture in India
राजकोषीय अनुशासन किसी भी राज्य की आर्थिक मजबूती की नींव है। यदि सरकारें अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के लिए खजाना खाली करती हैं, तो दीर्घकालिक विकास बाधित होता है।
जो धन बुनियादी ढांचे, अस्पतालों, शिक्षा सुधार और रोजगार सृजन में लगना चाहिए, वह चुनावी लाभ के लिए खर्च हो जाता है। इससे Indian Fiscal Responsibility Debate और गहरा होता है।
लक्षित सामाजिक सुरक्षा और अतिरेक उदारता में अंतर है। एक ओर वे योजनाएं हैं जो नागरिक को आत्मनिर्भर बनाती हैं, दूसरी ओर वे घोषणाएं जो निर्भरता को बढ़ावा देती हैं।
Role of Election Commission of India in Monitoring Freebie Announcements
चुनावी निष्पक्षता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी Election Commission of India पर आती है। यदि आचार संहिता लागू रहने के दौरान बड़े पैमाने पर आर्थिक वितरण होता है, तो विपक्ष इसे असमान प्रतिस्पर्धा मानता है।
ऐसे मामलों में सख्त निगरानी और पारदर्शिता आवश्यक है, ताकि कोई भी दल मतदाताओं को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित न कर सके।
Employment Generation vs Free Cash Schemes Debate
रोजगार सृजन और कौशल विकास स्थायी सशक्तीकरण का आधार हैं। जब व्यक्ति अपने श्रम से आय अर्जित करता है, तो उसमें आत्मसम्मान और आत्मविश्वास विकसित होता है।
इसके विपरीत, निरंतर मुफ्त सुविधाएं व्यक्ति को सरकार-निर्भर बना सकती हैं। लोकतंत्र केवल मतदान की प्रक्रिया नहीं, बल्कि सक्रिय और जिम्मेदार नागरिकता का नाम है।
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Freebie Politics and Voter Responsibility in Democracy
लोकतंत्र की मजबूती केवल संस्थाओं से नहीं, बल्कि नागरिकों की सजगता से भी आती है। यदि मतदाता केवल तात्कालिक लाभ देखकर मतदान करता है, तो वह अनजाने में ऐसी संस्कृति को प्रोत्साहित करता है जो भविष्य में आर्थिक असंतुलन को जन्म दे सकती है।
परिपक्व मतदाता वही है जो घोषणाओं की आर्थिक व्यवहार्यता और दीर्घकालिक प्रभाव को समझे।
Need for Transparent and Sustainable Policy Framework
मुफ्त योजनाओं का हर स्वरूप गलत नहीं है। आपातकालीन परिस्थितियों, महामारी या प्राकृतिक आपदा के समय राहत देना राज्य का कर्तव्य है।
लेकिन चुनावी मौसम में अचानक घोषणाओं की बाढ़ और वित्तीय परिणामों की अनदेखी लोकतांत्रिक परिपक्वता के अनुरूप नहीं है।
भारत यदि वैश्विक मंच पर सशक्त लोकतंत्र के रूप में स्थापित होना चाहता है, तो उसे Sustainable Development Policies, राजकोषीय अनुशासन और चुनावी निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
लोकतंत्र की रक्षा तभी संभव है जब शासन और नागरिक दोनों अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें।
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