हिंदी साहित्य की एक पूरी पीढ़ी अब धीरे-धीरे हमारे बीच से विदा ले रही है। पहले कवि विनोद कुमार शुक्ल और अब वयोवृद्ध कथाकार, संपादक और वैचारिक हस्तक्षेप की प्रतीक पत्रिका पहल के स्तंभ ज्ञानरंजन। यह केवल एक लेखक का जाना नहीं है, बल्कि उस साहित्यिक चेतना का क्षरण है, जो बड़े शहरों की चकाचौंध से दूर छोटे शहरों में जन्म लेकर हिंदी को नई दृष्टि देती रही।
ज्ञानरंजन अक्सर कहा करते थे कि “बड़े कहानीकार कभी बड़े शहरों में पैदा नहीं होते।” उनका यह कथन केवल एक विचार नहीं, बल्कि उनका अपना जीवन और लेखन था।
Gyanranjan Hindi Writer: इलाहाबाद से जबलपुर,एक टूटन और एक नई शुरुआत
16 अगस्त 1960 का दिन ज्ञानरंजन के जीवन का निर्णायक मोड़ था। इलाहाबाद जैसी साहित्यिक नगरी को छोड़कर जबलपुर के एक कॉलेज में लेक्चरर की नौकरी स्वीकार करना उनके लिए आसान नहीं था। ट्रेन में बैठकर वे देर तक रोए थे। लेकिन नौकरी को उन्होंने मजबूरी नहीं, बल्कि अवसर में बदला।
जबलपुर जाकर उन्होंने ठान लिया था कि वे वहां अपनी एक नई साहित्यिक दुनिया रचेंगे—और उन्होंने सचमुच रची।
जबलपुर पहले से ही साहित्यिक दृष्टि से उर्वर था। हरिशंकर परसाई, मायाराम सुरजन, सेठ गोविंद दास, भवानी प्रसाद तिवारी जैसे नाम वहां मौजूद थे। ज्ञानरंजन इस दुनिया में अकेले नहीं पड़े। वे जल्दी ही इस मंडली के केंद्र में आ गए। इलाहाबाद उनके भीतर था, और जबलपुर उनकी नई कर्मभूमि।
यह भी पढ़े : https://livebihar.com/hindi-language-debate-hindi-vs-mandarin-india-china/
Gyanranjan Hindi Writer: पारिवारिक संस्कार और प्रारंभिक जीवन
ज्ञानरंजन का जन्म 21 नवंबर 1936 को महाराष्ट्र के अकोला में हुआ। मूल रूप से उनका परिवार बिहार के आरा से था, लेकिन पिता बाद में बनारस में बस गए। उनके पिता गांधीवादी थे—लेखक, संपादक और नैतिक मूल्यों के पक्षधर। तीन भाइयों में ज्ञानरंजन बीच वाले थे, लेकिन पिता का असर सबसे गहरा उन्हीं पर पड़ा।
पिता ने उन्हें भाषा, लेखन और वैचारिक स्पष्टता दी, जबकि दादी की देसी, देशज और कभी-कभी अश्लील लगने वाली कथाओं ने उनके भीतर कहानी कहने की कला को जन्म दिया।
दिल्ली में आज़ादी के बाद के दंगों का दौर उन्होंने नजदीक से देखा। एक दलित बस्ती में रहते हुए समाज के सबसे निचले पायदान का यथार्थ उनके भीतर उतरता चला गया। गांधी जी की सलाह पर परिवार इलाहाबाद गया और वहीं से ज्ञानरंजन की साहित्यिक यात्रा को दिशा मिली।
Gyanranjan Hindi Writer: इलाहाबाद की चौकड़ी और लेखक का निर्माण
इलाहाबाद उस समय हिंदी साहित्य का तीर्थ था। निराला, महादेवी, केदारनाथ अग्रवाल, हरिवंश राय बच्चन—सब वहीं थे। ज्ञानरंजन का उठना-बैठना उपेंद्रनाथ अश्क और नीलाभ के यहां हुआ।
हरिवंश राय बच्चन ने उन्हें धर्मयुग में कॉलम लिखने का अवसर दिया। यहीं से लेखक का आत्मविश्वास पुख्ता हुआ।
इलाहाबाद की चर्चित चौकड़ी—ज्ञानरंजन, दूधनाथ सिंह, काशीनाथ सिंह और रवीन्द्र कालिया—हिंदी साहित्य में एक वैचारिक हस्तक्षेप थी। अक्खड़ स्वभाव, समझौते से इनकार और साफगोई—यह उनकी पहचान थी।
Gyanranjan Hindi Writer: कहानीकार ज्ञानरंजन,कम लेकिन यादगार
ज्ञानरंजन धुआंधार लिखने वाले लेखक नहीं थे। उन्होंने कुल मिलाकर केवल लगभग 25 कहानियां लिखीं, लेकिन हर कहानी साहित्यिक स्मृति में स्थायी हो गई।
अमरूद, कबाड़खाना, फेंस के इधर-उधर, पिता, घंटा—इन कहानियों में मध्यवर्गीय जीवन का ऐसा सच है, जो बिना शोर किए भीतर उतर जाता है।
उनकी कहानियों का संकलन सपना नहीं आज भी हिंदी कथा साहित्य का जरूरी पाठ है। भाषा संयमित, दृष्टि पैनी और संवेदना गहरी—यही उनकी विशेषता रही।
Do Follow us. : https://www.facebook.com/share/1CWTaAHLaw/?mibextid=wwXIfr
Gyanranjan Hindi Writer: ‘पहल’ और वैचारिक प्रतिबद्धता की परंपरा
ज्ञानरंजन को केवल कहानीकार कहना अधूरा होगा। वे पहल के संपादक थे—एक ऐसी साहित्यिक पत्रिका, जिसने 1973 से लेकर 125 अंकों तक हिंदी साहित्य को वैचारिक धार दी।
इमरजेंसी से पहले तक सरकार से सहायता मिली, लेकिन वैचारिक असहमति के चलते बाद में पहल बिना किसी सरकारी सहयोग के निकलती रही। यह संपादकीय साहस आज दुर्लभ है।
पहल प्रगतिशील थी, लेकिन जड़ नहीं। उसने असहमति को जगह दी, बहस को जीवित रखा और सत्ता से सवाल पूछे। यही उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी।
Gyanranjan Hindi Writer: विरासत और मौन
ज्ञानरंजन का जाना उस पीढ़ी के जाने का संकेत है, जिसने साहित्य को केवल रचना नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी माना।
आज जब साहित्य तेजी से बाज़ार में बदल रहा है, ज्ञानरंजन जैसे लेखक हमें याद दिलाते हैं कि कम लिखकर भी गहरी छाप छोड़ी जा सकती है।
वे चले गए, लेकिन छोटे शहरों से उठी बड़ी कहानी परंपरा अभी ज़िंदा है—उनकी रचनाओं में, पहल की स्मृति में और उन पाठकों में, जो आज भी उनकी कहानियों में खुद को खोजते हैं।
Do Follow us. : https://www.youtube.com/results?search_query=livebihar

