Holika Dahan 2026: 2 मार्च को होलिका दहन, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और संपूर्ण विधि

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2 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला होलिका दहन, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक
Highlights
  • • 2 मार्च 2026 (सोमवार) को होलिका दहन किया जाएगा। • शुभ मुहूर्त शाम 05:52 बजे से रात 08:20 बजे तक रहेगा। • फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च सुबह 05:19 बजे से 3 मार्च सुबह 04:33 बजे तक रहेगी। • होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। • पूजा में गंगाजल, रोली, अक्षत, कच्चा सूत, नारियल और गेहूं की नई बालियां प्रमुख रूप से अर्पित की जाती हैं। • होलिका की 3, 5 या 7 परिक्रमा करने की परंपरा है। • नई फसल की बालियां अग्नि में समर्पित करने का विशेष धार्मिक महत्व है। • परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है।

2 मार्च 2026, सोमवार को होलिका दहन किया जाएगा। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है और हर वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन होलिका की अग्नि नकारात्मक शक्तियों का नाश कर जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

Holika Dahan 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त


• होलिका दहन: 02 मार्च 2026 (सोमवार)
• फाल्गुन पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 02 मार्च 2026, सुबह 05:19 बजे
• फाल्गुन पूर्णिमा तिथि समाप्त: 03 मार्च 2026, सुबह 04:33 बजे
• होलिका दहन का शुभ मुहूर्त: शाम 05:52 बजे से रात 08:20 बजे तक

इसी शुभ समय में विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

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पूजन सामग्री सूची (Samagri List)


• गंगाजल या शुद्ध जल से भरा लोटा
• कच्चा सूत (मोली)
• रोली और अक्षत
• पीली सरसों
• हल्दी की गांठ
• अगरबत्ती
• दीपक
• गोबर के कंडों (बड़कुल्ले) की माला
• बताशे
• गुड़
• फल
• गेहूं की नई बालियां
• नारियल

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होलिका दहन की सरल पूजा विधि

Holika Dahan 2026: 2 मार्च को होलिका दहन, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और संपूर्ण विधि 1


1. शाम के समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. सार्वजनिक होलिका स्थल पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
3. भगवान विष्णु और भक्त प्रह्लाद का स्मरण कर पूजा का संकल्प लें।
4. होलिका को जल अर्पित करें और रोली, अक्षत, फूल, हल्दी, मूंग दाल, बताशे आदि अर्पित करें।
5. कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर 3, 5 या 7 बार लपेटते हुए परिक्रमा करें।
6. गेहूं की नई बालियां और नारियल अग्नि में समर्पित करें।
7. अंत में परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और खुशहाली की प्रार्थना करें।

होलिका दहन की यह पावन परंपरा हमें सत्य, आस्था और सकारात्मकता का संदेश देती है। सही मुहूर्त में श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा जीवन में मंगल फल प्रदान करती है।

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