India Democracy: भारत की ऐतिहासिक लोकतांत्रिक यात्रा और वैश्विक मान्यता
स्वाधीनता के बाद भारत ने जिस लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाया, उसे अक्सर पश्चिमी मॉडल की नकल कहा गया। इंग्लैंड की 1215 की मैग्नाकार्टा संधि को आधुनिक लोकतंत्र की आधारशिला माना जाता रहा है और लंबे समय तक यही धारणा बनी रही कि लोकतंत्र की श्रेष्ठ प्रणाली पश्चिम की देन है। लेकिन भारतीय लोकतंत्र की आत्मा कहीं अधिक प्राचीन, समावेशी और लोककेंद्रित रही है। आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को जो लोकतांत्रिक नेतृत्व मिला है, वह इसी ऐतिहासिक सत्य की स्वीकृति का संकेत है।
- India Democracy: भारत की ऐतिहासिक लोकतांत्रिक यात्रा और वैश्विक मान्यता
- India Democracy: IDEA संगठन और भारत की भूमिका
- India Democracy: पश्चिमी मॉडल बनाम भारतीय लोकतांत्रिक सोच
- India Democracy: भारतीय चुनावी नवाचार और भागीदारी
- India Democracy: IDEA बैठक और भारत का वैचारिक नेतृत्व
- India Democracy: भारतीय लोकतंत्र की ऐतिहासिक जड़ें
- India Democracy: वैश्विक लोकतंत्र की चुनौतियां और भारत की भूमिका
- India Democracy: विविधता ही शक्ति
अंतरराष्ट्रीय लोकतांत्रिक एवं चुनावी सहायता संस्थान—इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेटिक एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस (IDEA)—की अध्यक्षता भारत को मिलना सिर्फ एक औपचारिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।
India Democracy: IDEA संगठन और भारत की भूमिका

1995 में 14 देशों द्वारा स्थापित IDEA संगठन आज 37 सदस्य देशों तक विस्तृत हो चुका है। इसके साथ ही अमेरिका और जापान जैसे देश स्थायी पर्यवेक्षक के रूप में इससे जुड़े हैं। दुनिया के लगभग आठ अरब लोगों में से करीब दो अरब बीस करोड़ पंजीकृत मतदाता इन सदस्य देशों में आते हैं, जिनमें अकेले भारत के मतदाताओं की संख्या 99 करोड़ 10 लाख से अधिक है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत न केवल दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, बल्कि चुनावी प्रबंधन की दृष्टि से भी सबसे जटिल और व्यापक प्रणाली संचालित करता है। इसी कारण IDEA की अध्यक्षता भारत को मिलना स्वाभाविक होते हुए भी ऐतिहासिक महत्व रखता है।
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India Democracy: भारतीय चुनाव आयोग और वैश्विक भरोसा
IDEA में केवल चुनाव आयोग या चुनाव संचालन करने वाली संस्थाएं ही सदस्य होती हैं। भारत की ओर से चुनाव आयोग इसका प्रतिनिधित्व करता है और इसी नाते संगठन की अध्यक्षता भी आयोग को सौंपी गई है। यह उस समय हुआ है जब देश के भीतर चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
ऐसे माहौल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय चुनाव आयोग को यह जिम्मेदारी मिलना इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक समुदाय भारतीय चुनाव प्रणाली पर भरोसा करता है।
India Democracy: पश्चिमी मॉडल बनाम भारतीय लोकतांत्रिक सोच
अब तक लोकतंत्र को पश्चिमी चश्मे से देखा जाता रहा, जहां संस्थागत स्वतंत्रता, संसदीय परंपराएं और बाजार-केंद्रित राजनीति हावी रही। इसके विपरीत भारतीय लोकतंत्र की जड़ें लोक सहभागिता, सामूहिक विमर्श और सामाजिक संतुलन में रही हैं।
सूचना क्रांति और सामाजिक जागरूकता के कारण आज का मतदाता केवल संस्थागत निर्णयों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अपनी व्यक्तिगत राय और भागीदारी को महत्व देता है। यही कारण है कि भारतीय लोकतंत्र की लचीली लेकिन मजबूत संरचना आज अधिक प्रासंगिक बनती जा रही है।
India Democracy: भारतीय चुनावी नवाचार और भागीदारी
भारतीय चुनावी तंत्र में मतदाता भागीदारी का लगातार बढ़ना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। एक अरब से अधिक मतदाताओं तक पहुंच बनाना और उन्हें मतदान प्रक्रिया से जोड़ना आसान कार्य नहीं है। यह भारतीय चुनाव आयोग की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें नवाचार और समावेशन को प्राथमिकता दी गई है।
India Democracy: डिजिटल और समावेशी चुनावी पहल
डिजिटल चुनावी प्रबंधन, दिव्यांग और दूरस्थ मतदाताओं तक पहुंच, चुनावी साक्षरता बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान और बूथ-स्तरीय नवाचारों ने भारतीय चुनाव प्रणाली को मजबूत किया है। यही कारण है कि तमाम राजनीतिक विवादों के बावजूद मतदाता भागीदारी में गिरावट नहीं आई।
India Democracy: IDEA बैठक और भारत का वैचारिक नेतृत्व
21 से 23 जनवरी के बीच IDEA सदस्य देशों के चुनाव प्रमुखों और अधिकारियों की बैठक भारत की अध्यक्षता में होने जा रही है। इस बैठक में दुनियाभर के चुनाव अधिकारी यह जानने के इच्छुक होंगे कि इतनी विशाल मतदाता संख्या के बावजूद भारत कैसे चुनावी पवित्रता बनाए रखता है और नागरिकों तक अंतिम बूथ तक कैसे पहुंचता है।
India Democracy: भारतीय लोकतंत्र की ऐतिहासिक जड़ें
भारतीय लोकतंत्र कोई नया विचार नहीं है। प्राचीन भारत का बज्जि गणतंत्र, चोल काल की ग्राम सभाएं और संत बसवेश्वर द्वारा स्थापित अनुभव मंडपम् जैसी संस्थाएं इस बात का प्रमाण हैं कि लोकतांत्रिक विमर्श भारतीय समाज की आत्मा में रचा-बसा है। इन परंपराओं को आधुनिक लोकतंत्र के प्रारंभिक स्वरूप के रूप में देखा जाता है।
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India Democracy: वैश्विक लोकतंत्र की चुनौतियां और भारत की भूमिका
आज वैश्विक लोकतंत्र के सामने ध्रुवीकरण, दुष्प्रचार, साइबर हस्तक्षेप, चुनावी धन की अपारदर्शिता और युवाओं की घटती भागीदारी जैसी चुनौतियां खड़ी हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का दुरुपयोग इन समस्याओं को और जटिल बना रहा है।
ऐसे समय में भारत का चुनावी अनुभव लोकतांत्रिक देशों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है। विविधता, असमानताओं और सामाजिक भिन्नताओं के बावजूद शांतिपूर्ण चुनाव प्रक्रिया भारत की सबसे बड़ी ताकत है।
India Democracy: विविधता ही शक्ति
भारत में महिलाओं, युवाओं और दिव्यांग मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करती है। विविध सामाजिक पहचान के बावजूद यदि भारत में पश्चिमी देशों जैसी तीव्र सामाजिक टकराव की स्थिति नहीं है, तो उसकी वजह चुनावी प्रक्रिया पर जनता का अटूट भरोसा है।
स्पष्ट है कि भारत की IDEA अध्यक्षता तभी सफल मानी जाएगी, जब यह संगठन केवल विमर्श तक सीमित न रहकर लोकतंत्र को अधिक सहभागी, समावेशी, तकनीक-सक्षम और मानवीय बनाने की दिशा में ठोस भूमिका निभाए।
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