India Pakistan Conflict: अमेरिका के बाद चीन का बड़ा दावा, कहा– हमने रुकवाया भारत-पाक युद्ध

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India Pakistan Conflict को लेकर चीन और भारत के बीच बयानबाजी
Highlights
  • • अमेरिका के बाद चीन ने भी सीजफायर का दावा किया • चीनी विदेश मंत्री ने मध्यस्थता की बात कही • भारत ने तीसरे पक्ष की भूमिका सिरे से नकारी • सैन्य अधिकारियों के बीच सीधी बातचीत से समझौता • चीन पर पहले भी फर्जी सूचना फैलाने के आरोप

India Pakistan Conflict पर चौधरी बनने की होड़, अब चीन भी मैदान में

दुनिया की में महाशक्ति बनने की दौड़ में अमेरिका और चीन आमने-सामने दिख रहे हैं। भारत-पाक के बीच हालिया सैन्य तनाव के बाद पहले अमेरिका ने यह दावा किया कि सीजफायर उसकी पहल पर हुआ। अब उसी कड़ी में चीन ने भी बड़ा बयान देकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।

चीन का कहना है कि जब पहलगाम हमले के बाद हालात बिगड़ने लगे और ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ, तब उसने दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने की कोशिश की और अहम भूमिका निभाई। इस बयान के साथ ही भारत-पाक संघर्ष को लेकर वैश्विक मंच पर श्रेय लेने की प्रतिस्पर्धा खुलकर सामने आ गई है।

India Pakistan Conflict में चीनी विदेश मंत्री का मध्यस्थता का दावा

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा कि चीन पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाने में मदद करता रहा है। उन्होंने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान भी चीन ने सक्रिय भूमिका निभाई और दोनों पक्षों को संयम बरतने के लिए प्रेरित किया।

चीन के विदेश मंत्रालय ने इस बयान को आधिकारिक तौर पर सोशल मीडिया पर साझा किया, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि एशिया में शांति बनाए रखने में चीन एक जिम्मेदार शक्ति है। हालांकि, यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका पहले ही सीजफायर का श्रेय लेने का दावा कर चुका है।

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India Pakistan Conflict पर भारत का दो टूक जवाब, तीसरे पक्ष की भूमिका से इनकार

चीन के दावे पर भारत सरकार ने साफ और सख्त प्रतिक्रिया दी है। भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भारत-पाक के बीच संघर्ष रोकने में किसी भी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं रही।

भारत का कहना है कि यह पूरी तरह से दोनों देशों की सेनाओं के बीच हुई सीधी बातचीत का नतीजा था। जब हालात गंभीर हो गए और दोनों पक्षों को नुकसान हुआ, तब पाकिस्तान की ओर से संपर्क साधा गया।

India Pakistan Conflict में सैन्य स्तर पर हुई सीधी बातचीत

भारत के अनुसार, पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन ने भारतीय डीजीएमओ से संपर्क किया था। इसके बाद दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत हुई और 10 मई से जमीन, हवा और समुद्र में सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी।

भारत ने यह भी साफ किया कि यह निर्णय किसी बाहरी दबाव या मध्यस्थता का परिणाम नहीं था, बल्कि सैन्य समझदारी और हालात को नियंत्रण में रखने के लिए लिया गया कदम था।

India Pakistan Conflict और चीन पर फर्जी सूचना फैलाने के आरोप

चीन के ताजा दावे को लेकर एक और सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ कूटनीतिक छवि सुधारने की कोशिश है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले साल नवंबर में अमेरिकी मीडिया में आई एक रिपोर्ट में चीन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे।

रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के बाद चीन ने सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की थी। आरोप था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए फर्जी खातों से भ्रामक तस्वीरें और सामग्री साझा की गईं।

India Pakistan Conflict के बहाने सैन्य छवि युद्ध?

इन रिपोर्टों में कहा गया कि ऐसी सामग्री का मकसद भारत द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे राफेल लड़ाकू विमानों की छवि को नुकसान पहुंचाना और चीन के अपने लड़ाकू विमान को बढ़ावा देना था।

हालांकि चीन ने इन आरोपों को खारिज किया, लेकिन इस पृष्ठभूमि में भारत-पाक संघर्ष को रुकवाने का ताजा दावा कई सवाल खड़े करता है।

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India Pakistan Conflict के दौरान चीन की संयम की अपील

यह भी सच है कि जब भारत-पाक के बीच युद्ध जैसे हालात बने और ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ, उसी दिन चीन ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की थी।

चीन ने उस समय भारत की सैन्य कार्रवाई पर चिंता जताई थी और कहा था कि वह पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। हालांकि, अपील और मध्यस्थता के दावे के बीच बड़ा अंतर है, जिसे भारत लगातार रेखांकित कर रहा है।

India Pakistan Conflict पर दावे या दबाव की राजनीति?

घटना के सात-आठ महीने बाद चीन का यह कहना कि उसने भारत-पाक संघर्ष रुकवाया, कई संकेत देता है। एक ओर अमेरिका पहले ही खुद को वैश्विक मध्यस्थ के रूप में पेश कर चुका है, वहीं चीन भी पीछे नहीं रहना चाहता।

यह दावा भारत पर कूटनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है या फिर अमेरिका के दावे को संतुलित करने का प्रयास, यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी सुरक्षा और सैन्य फैसले किसी बाहरी चौधरी के इशारों पर नहीं चलते।

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