IRCTC Hotel Scam पर दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई, लालू यादव को राहत या झटका?

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IRCTC Hotel Scam केस में लालू यादव की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई
Highlights
  • • दिल्ली हाईकोर्ट में आज लालू यादव की याचिका पर सुनवाई • निचली अदालत के आरोप तय करने के आदेश को दी गई चुनौती • राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव भी मामले में आरोपी • IRCTC होटल और जमीन टेंडर में अनियमितताओं का आरोप • आज का फैसला तय करेगा आगे की कानूनी दिशा

दिल्ली हाईकोर्ट में आज एक ऐसी सुनवाई होने जा रही है, जिस पर सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश की राजनीतिक निगाहें टिकी हुई हैं। राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की याचिका पर आज सुनवाई होनी है। यह वही मामला है, जिसमें निचली अदालत ने लालू यादव के खिलाफ आरोप तय किए थे। अब सवाल यह है कि आज की सुनवाई में लालू परिवार को राहत मिलेगी या फिर कानूनी शिकंजा और कस जाएगा।

यह मामला उस दौर से जुड़ा है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल में रेलवे से जुड़े टेंडर और संपत्तियों के आवंटन में गंभीर अनियमितताएं हुईं, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।

IRCTC Hotel Scam: निचली अदालत के आदेश को लालू यादव ने दी चुनौती

लालू प्रसाद यादव ने दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए गए थे। निचली अदालत ने यह माना था कि प्रथम दृष्टया मामले में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, जिनके आधार पर मुकदमा चलाया जा सकता है।

अक्टूबर 2025 में दिए गए इस आदेश में कहा गया था कि IRCTC के अंतर्गत आने वाले होटलों और उनसे जुड़ी जमीनों के पट्टे देने की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई। आरोप है कि पात्रता शर्तों में बदलाव कर कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

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IRCTC Hotel Scam: न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा के समक्ष सुनवाई

IRCTC Hotel Scam पर दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई, लालू यादव को राहत या झटका? 1

यह याचिका दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा के समक्ष सूचीबद्ध है। आज यानी 5 जनवरी को होने वाली यह सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि इसी से तय होगा कि लालू यादव के खिलाफ आपराधिक मुकदमा आगे चलेगा या नहीं।

यदि हाईकोर्ट निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखता है, तो लालू यादव समेत उनके परिवार के सदस्यों को ट्रायल का सामना करना पड़ेगा। वहीं, यदि अदालत आरोप तय करने के आदेश को रद्द करती है, तो यह लालू परिवार के लिए बड़ी राहत मानी जाएगी।

IRCTC Hotel Scam: राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव भी आरोपों के घेरे में

इस मामले में लालू प्रसाद यादव अकेले आरोपी नहीं हैं। उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी तथा उनके बेटे, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर भी गंभीर आरोप तय किए गए हैं। इन पर आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी जैसे आरोप लगाए गए हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया और रेलवे की संपत्तियों का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया गया। अदालत ने यह भी माना कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल हुआ।

IRCTC Hotel Scam: राउज़ एवेन्यू कोर्ट की सख्त टिप्पणी

आरोप तय करते समय विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अपने आदेश में कहा था कि लालू प्रसाद यादव ने केंद्रीय रेल मंत्री के रूप में अपने पद का दुरुपयोग किया। अदालत के अनुसार, टेंडर की पात्रता शर्तों में कथित तौर पर हेरफेर किया गया ताकि कुछ चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा सके।

अदालत ने यह भी कहा कि लालू यादव कथित साजिश से पूरी तरह अवगत थे और उन्होंने निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई। इस कारण रेलवे और सरकारी संपत्तियों को आर्थिक नुकसान हुआ।

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IRCTC Hotel Scam और ‘लैंड फॉर जॉब’ मामला

IRCTC होटल टेंडर मामला और ‘लैंड फॉर जॉब’ मामला, दोनों ही रेलवे से जुड़ी कथित अनियमितताओं से जुड़े हुए हैं। आरोप है कि रेलवे में नियुक्तियों के बदले जमीन ली गई और इसके बदले में नियमों को दरकिनार किया गया।

इस पूरे मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय दोनों सक्रिय हैं। साल 2017 में दर्ज एफआईआर के बाद से लगातार जांच चल रही है, जिसमें रेलवे अधिकारी, निजी कंपनियां और लालू परिवार के सदस्य शामिल हैं।

IRCTC Hotel Scam: आज की सुनवाई क्यों है निर्णायक

आज की सुनवाई से यह तय होगा कि इस हाई-प्रोफाइल मामले की कानूनी दिशा क्या होगी। यदि हाईकोर्ट आरोप तय करने के आदेश को सही ठहराता है, तो लालू यादव की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। वहीं, राहत मिलने की स्थिति में यह राजद के लिए राजनीतिक रूप से भी बड़ी राहत होगी।

बिहार की राजनीति में लालू यादव का प्रभाव अभी भी मजबूत माना जाता है। ऐसे में अदालत का फैसला न सिर्फ कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी दूरगामी असर डाल सकता है।

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