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पटनाः बिहार के शिक्षा विभाग में अपर मुख्य सचिव पद पर तैनाती के बाद लगातार एक्शन ले रहे केके पाठक का डंडा फिर से चला है। शिक्षा विभाग ने 230 से ज्यादा कॉलेजों के प्रिंसपल का वेतन रोकने का आदेश जारी कर दिया है। शिक्षा विभाग ने कहा है कि बार-बार कहने के बावजूद इन प्रिंसिपल ने निर्देश का पालन नहीं किया। लिहाजा उनके वेतन पर रोक लगायी जाती है।

शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक इस दफे बिहार के 230 से ज्यादा अनुदानित कॉलेजों के प्रिंसिपल का वेतन बंद करने का आदेश जारी किया है। ये वैसे कॉलेज हैं जिन्हे राज्य सरकार अनुदान देती है। कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के रिजल्ट के आधार पर सरकार उन्हें अनुदान देती है। जिससे प्रिंसपल से लेकर दूसरे शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन मिलता है। शिक्षा विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली अनुदान की राशि से 200 से अधिक कॉलेजों के प्राचार्य या प्रभारी प्राचार्य वेतन नहीं लेंगे। ऐसे प्रिंसिपल कॉलेज के आंतरिक स्रोत से प्राप्त होने वाली राशि से भी अपना वेतन नहीं ले पायेंगे। 

शिक्षा विभाग के मुताबिक गल-शीट पर सूचना उपलब्ध नहीं कराने के कारण यह कार्रवाई की गयी है. विभाग की ओर से उनसे बार-बार कहे जाने पर भी सूचना उपलब्ध नहीं करायी गयी. ऐसे में विभाग ने ये कार्रवाई की है. शिक्षा विभाग ने चेतावनी दी है कि राज्य सरकार से अनुदान पाने वाले वैसे कॉलेजों की संबद्धता रद्द कर दी जायेगी, जो सरकारी निर्देशों का पालन नहीं करेंगे. ऐसे कॉलेजों को हर दिन गुगल-शीट पर अपने दिन भर की गतिविधि की जानकारी देने का निर्देश दिया गया है. अगर इसका पालन नहीं होगा तो उनकी संबद्धता रद्द कर दी जायेगी. शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों को पत्र लिखकर इस मामले में जरूरी कार्रवाई करने को कहा है. जिन संस्थानों को चेतावनी दी गयी है उनमें सामान्य कोर्स, प्रोफेसनल, वोकेशनल और बीएड कोर्स चलाने वाले सभी कॉलेज शामिल हैं. विभाग ने कहा है कि गूगल-शीट पर सूचना नहीं देना बताता है कि शिक्षक संस्थान गंभीर लापरवाही कर रहे हैं.  शिक्षा विभाग की उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. रेखा कुमारी ने सभी विश्वविद्यालय के कुलसचिवों को इस संबंध में शुक्रवार को पत्र जारी किया है।

उच्च शिक्षा निदेशक के पत्र में कहा गया है कि शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए हर शिक्षण संस्थान को प्रतिदिन गूगल-शीट में सूचनाओं को अपडेट करने का निर्देश दिया गया है. हर कॉलेज को ये काम करना है. गुगल सीट में हर कॉलेज को ये बताना है कि उस दिन कितने शिक्षक और विद्यार्थी कॉलेज में आए. कितनी क्लास हुई. अगर छात्र-छात्राओं के लिए अलग से कोई गतिविधि हुई तो उसकी जानकारी भी देनी होगी. शिक्षा विभाग ने अपनी समीक्षा के दौरान ये पाया है कि राज्य में 300 से अधिक ऐसे कॉलेज-संस्थान हैं, जो हर दिन अपना ब्योरा नहीं दे रहे हैं. ऐसे में सारे यूनिवर्सिटी को कहा गया है कि उनके द्वारा जिन कॉलेजों-संस्थानों को संबंधन दिया गया है, उनमें जो लापरवाही बरत रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाये. हर यूनिवर्सिटी को ये भी कहा गया है कि वे अपने स्तर से भी निर्देश जारी करें कि हर कॉलेज रोज हर हाल में गूगल-शीट पर सभी सूचना उपलब्ध कराये।

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