लॉकडाउन के कारण मगही पान उत्पादक किसानों को भारी नुकसान, कारोबार बर्बाद, किसान खेती छोड़ने को मजबूर

By Team Live Bihar 185 Views
2 Min Read

कभी पान खाने के शौकीनों की कमी नहीं थी. बड़ी संख्या में लोग पान का सेवन करते थे. पान खाना लोग शुभ मानते थे तथा इससे पाचन क्रिया बेहतर होती थी. परंतु समय के साथ पान के शौकीनों की संख्या कम होती जा रही है.
वर्तमान समय में स्थिति यह है कि चुनिंदा लोग ही पान का सेवन करते हैं. पान के पत्ते की बिक्री नहीं होने से उत्पादकों की स्थिति दयनीय होती जा रही है.

आज स्थिति यह है कि पान उत्पादक किसान इसकी खेती से मुंह मोड़ रहे हैं.
जिले के करीब 12 गांवों में मगही पान की खेती होती है. बिहार की पहचान मगही पान की खेती के लिए भी है. मगध क्षेत्र के चार जिलों नालंदा, नवादा, गया व औरंगाबाद में मगही पान की खेती की जाती है.

इसलिये यहां के उत्पादित पान को मगही पान कहा जाता है. इन चार जिलों में करीब 439 हेक्टेयर में मगही पान की खेती की जाती है. करीब पांच हजार किसान खासकर चौरसिया बिरादरी के लोग पान की खेती से जुड़े हुए हैं.
एक कट्ठा में पान की खेती करने पर 25 से 30 हजार रुपये खर्च आता है. एक पौधे में 40 से 60 पत्ते होते हैं. एक कट्ठा में करीब 500 ढोली पान निकलता है. अगर उत्पादन ठीक रहा और कीमत अच्छी मिली तो एक कट्ठे में उत्पादित पान करीब 70 से 80 हजार रुपये में बिक जाता है.

मगही पान की बिक्री नहीं होने व इसकी खेती में अनिश्चितता के कारण बहुत सारे किसान इसकी खेती से मुंह मोड़ रहे हैं. अधिक उत्पादन होने पर बिक्री न होने की वजह से पान के पत्ते खराब होकर बर्बाद हो जाते हैं.

लॉकडाउन की वजह से भी मगही पान उत्पादक किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. पान अनुसंधान केंद्र इस्लामपुर द्वारा किसानों की इस समस्या से निजात दिलाने के लिए पान के पत्ते से तेल निकालने की यूनिट स्थापित करने का प्रोजेक्ट तैयार कर बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर को स्वीकृति के लिए भेजा गया था.

Share This Article