मुजफ्फरपुर: फार्मेसी के छात्र-छात्राओं ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिसकी लागत सिर्फ 45 पैसे प्रति इकाई है और यह आर्थिक और पर्यावरण की दृष्टि से काफी लाभकारी है।
एमआईटी फार्मेसी विभाग केछात्र-छात्राओं ने मौसमी (मीठा नींबू)के छिलकों से बायोडिग्रेडेबल कप, प्लेटऔर दीया जैसे उपयोगी उत्पाद बनाने की नवीन तकनीक विकसित की है। इस मॉडल को तैयार करने की लागत मात्र 45 पैसे प्रति उत्पाद आई है, जो इसेआर्थिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टि से काफी लाभकारी बनाता है। बता दें कि मौसमी के छिलकों में विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर की प्रचुर मात्रा होती है जो प्रतिरक्षा को बढ़ाने,पाचन में सुधार करने और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सहायक हैं।
स्टूडेंट्स ने बताया कि 8 वें सेमेस्टर में उन्हें अपना प्रोजेक्ट तैयार करना होता है। यह परियोजना 8 वें सेमेस्टर के स्टूडेंट्स प्रेमजीत कुमार, लवकुश, राखी कुमारी,सोनम कुमारी, प्रतिभा कुमारी और रविरंजन ने पूरी की है। छात्रों ने इस परियोजना के माध्यम से कृषि अपशिष्टको उपयोगी और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों में बदलने की संभावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है।
मार्गदर्शक प्रो. रवि कुमार, प्रो. निर्मल कश्यप ने इसे स्थाई विकास की दिशा में महत्वपूर्णकदम बताया, जो न केवल पर्यावरण बल्कि समाज के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगा। प्रो.मनीष भारती ने कहा कि यह भविष्य की स्टार्टअप संभावनाओं को मजबूत करता है। विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने कहा कि यह परियोजना एक सफल स्टार्टअप के रूप में विकसित हो सकती है। यह पर्यावरण केअनुकूल उत्पाद बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी समाधान प्रदान करती है। मौजूदा समय में स्थाई विकास और स्वच्छता की दृष्टि से इस तरह के नवाचार बेहद आवश्यक हैं। मौसमी के छिलकों का उपयोग त्वचा की देखभाल और स्वास्थ्य के लिए भी किया जा सकता है। इन गुणों के कारण छात्रोंकी ओर से बनाए गए बॉयोडिग्रेडेबल उत्पादन न केवल प्लास्टिक के स्थाई विकल्प हैं,बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हैं। एमआईटी की स्थाई तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता इस परियोजना के माध्यम से एक बार फिर सिद्ध हुई है।